उन्होंने कहा, “तकनीक आधारित इस दुनिया में हम पहुंच और प्रोडक्ट्स को लगातार कमोडिटाइज करने या कमोडिटी के तौर पर लेने की बात कर रहे हैं, ऐसे में किसी के खाते तक एपीआई (API) पहुंच या मशीन रीडेबिलिटी कुछ चुनिंदा लोगों के लिए ही नहीं होनी चाहिए। हर कोई जो चाहता है, उसे हासिल करने में सक्षम होना चाहिए। वर्तमान में, कस्टमर्स को एपीआई के माध्यम से अपने ट्रेडिंग अकाउंट तक पहुंच मिलनी चाहिए। संभवतः इसे पेश किया जाना चाहिए, ताकि इसमें कोई नियामकीय मध्यस्थता न हो। इसका सरल सा उदाहरण (नॉन मशीन रीडेबिल) पीडीएफ कॉन्ट्रैक्ट नोट हैं, जो टैक्स फाइलिंग के लिए जरूरी हैं। वित्त वर्ष के अंत में ऐसे पीडीएफ का इम्पोर्ट खासा मुश्किल होगा और गलतियों की संभावनाएं भी होंगी। हमने मशीन-रीडेबिल कॉन्ट्रैक्ट नोट्स तैयार किए हैं, जिन्हें सिर्फ एक क्लिक से एपीआई के जरिए टैक्स फाइलिंग प्रोग्राम्स में इम्पोर्ट किया जा सकता है। यह ग्राहकों के लिए खासी फायदेमंद है।”