ITR 2026: अपने इनकम टैक्स रिटर्न पर चाहिए मैक्सिमम रिफंड तो आईटीआर फाइल करते समय अपनाएं ये 5 शानदार तरीके
Income Tax Return Best Strategies: टैक्स रिफंड ज्यादा से ज्यादा पाने का मतलब सिर्फ आखिरी समय में डिडक्शन ढूंढना नहीं है। इसकी शुरुआत यह पक्का करने से होती है कि आपका टैक्स रिटर्न आपकी इनकम, इन्वेस्टमेंट और पहले से भरे गए टैक्स की सही जानकारी दे।
इनकम टैक्स रिफंड तब जारी किया जाता है जब किसी वित्तीय वर्ष के दौरान टैक्सपेयर द्वारा चुकाया गया टैक्स, उसकी वास्तविक टैक्स देनदारी से अधिक हो जाता है।
Income Tax Return Best Strategies: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने का सीजन आते ही टैक्सपेयर्स के मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि वे अपना टैक्स रिफंड कैसे बढ़ाएं। टैक्स रिफंड को अधिकतम करना सिर्फ आखिरी समय में डिडक्शन ढूंढने तक सीमित नहीं है बल्कि इसकी शुरुआत इस बात से होती है कि आपका टैक्स रिटर्न आपकी इनकम, निवेश और पहले से भुगतान किए गए टैक्स को बिल्कुल सही-सही दर्शाता हो।
क्या होता है इनकम टैक्स रिफंड?
इनकम टैक्स रिफंड तब जारी किया जाता है जब किसी वित्तीय वर्ष के दौरान टैक्सपेयर द्वारा चुकाया गया टैक्स, उसकी वास्तविक टैक्स देनदारी से अधिक हो जाता है। यह एक्स्ट्रा टैक्स सोर्स पर टैक्स कटौती (TDS), सोर्स पर टैक्स कलेक्शन (TCS) या एडवांस टैक्स के रूप में जमा हो सकता है। टैक्सपेयर्स अपना आईटीआर दाखिल करके इस एक्स्ट्रा टैक्स अमाउंट को क्लेम कर सकते हैं। आपको बता दें कि रिटर्न फाइल करने के बाद रिफंड का स्टेटस इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल और दूसरे ऑप्शन की मदद से ऑनलाइन ट्रैक भी किया जा सकता है।
क्लियरटैक्स की टैक्स एक्सपर्ट चांदनी आनंदन के मुताबिक टैक्सपेयर्स को अपने लिए लागू सभी उपलब्ध छूटों और कटौतियों को क्लोजली रिव्यू करना चाहिए। दोनों टैक्स रिजीम के फायदों की तुलना करनी चाहिए और यह वेरिफाई करना चाहिए कि टैक्स डॉक्युमेंट्स में दी गई जानकारी ऑफिशियल रिकॉर्ड से मैच करती हो। आपकी छोटी सी गलती भी रिफंड में देरी कर सकती है या नोटिस का कारण बन सकती है।
मैक्सिमम रिफंड पाने की 5 शानदार स्ट्रैटिजी
अपने इनकम टैक्स रिफंड को अधिकतम करने के लिए टैक्सपेयर्स को नीचे दिए गए तरीकों को अपनाना चाहिए:
1- दोनों टैक्स रिजीम (Old vs New) की तुलना करें
रिटर्न फाइल करने से पहले पुरानी और नई दोनों टैक्स व्यवस्थाओं के तहत अपनी टैक्स देनदारी की तुलना करें। उस रिजीम का चयन करें जिसमें आपका टैक्स आउटगो सबसे कम हो। अगर वित्त वर्ष के दौरान आपका अधिक टीडीएस कट चुका है तो सही रिजीम चुनकर आप अपना रिफंड काफी हद तक बढ़ा सकते हैं।
2- ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत डिडक्शंस का पूरा लाभ उठाएं
अगर आप ओल्ड टैक्स रिजीम चुनते हैं तो आप अलग-अलग कटौतियों के माध्यम से अपनी टैक्स योग्य इनकम को कम कर सकते हैं। इसके लिए नीचे दी गई जानकारी को देखें-
सेक्शन 80C: पीपीएफ, ईएलएसएस, ईपीएफ, एनएससी, जीवन बीमा प्रीमियम और 5 साल की टैक्स-सेविंग एफडी में निवेश करके आप ₹1.5 लाख तक की कटौती का दावा कर सकते हैं।
सेक्शन 80D: हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम के माध्यम से ₹25000 से ₹50000 तक की अतिरिक्त टैक्स बचत का दावा किया जा सकता है। यह क्लेम इंश्योर्ड शख्स और परिवार के सदस्यों की उम्र पर निर्भर करता है।
सेक्शन 24(b) और HRA: सैलरीड कर्मचारी निर्धारित शर्तों के अधीन हाउस रेंट अलाउंस (HRA) छूट का दावा कर सकते हैं। साथ ही खुद के घर के होम लोन के ब्याज पर ₹2 लाख तक की कटौती पा सकते हैं।
3- नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) का अतिरिक्त फायदा
नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में योगदान करने वाले लोग सेक्शन 80C की सीमा के ऊपर और अतिरिक्त सेक्शन 80CCD(1B) के तहत ₹50000 तक की एक्स्ट्रा कटौती का दावा कर सकते हैं। सेक्शन 80CCD(2) के तहत एंप्लॉयर के योगदान पर भी टैक्स लाभ मिलता है। यह कटौती दोनों टैक्स रिजीम (पुरानी और नई) में उपलब्ध है। इसके तहत एंप्लॉयर की कैटेगिरी के आधार पर ओल्ड रिजीम में वेतन के 10 प्रतिशत तक और न्यू रिजीम में 14 प्रतिशत तक के एंप्लॉयर योगदान पर दावा किया जा सकता है।
4- स्टैंडर्ड डिडक्शन और टैक्स रिबेट
सैलरीड टैक्सपेयर्स टैक्स योग्य इनकम की गणना करते समय ऑटोमेटिकली स्टैंडर्ड डिडक्शन के हकदार होते हैं। यह कटौती ओल्ड रिजीम के तहत ₹50000 और न्यू रिजीम के तहत ₹75000 है। इसके अलावा पात्र टैक्सपेयर्स सेक्शन 87A के तहत रिबेट का लाभ उठा सकते हैं जिससे अगर टैक्स योग्य आय निर्धारित सीमा के भीतर रहती है तो टैक्स देनदारी शून्य हो सकती है।
इसके अलावा फैमिली पेंशन प्राप्तकर्ताओं को सेक्शन 57(iia) के तहत कटौती मिलती है। यह कटौती ओल्ड रिजीम में ₹15000 तक और न्यू रिजीम में ₹25000 तक उपलब्ध है, जो टैक्स योग्य आय को कम करके रिफंड की पात्रता में सुधार करती है।
5- रिफंड क्लेम करने के लिए अपनाएं ये जरूरी स्टेप्स
रिफंड का दावा करने के लिए आईटीआर दाखिल करना अनिवार्य है, भले ही टैक्सपेयर के लिए सामान्य रूप से रिटर्न दाखिल करना जरूरी न हो। रिफंड प्रक्रिया को तेज करने के लिए इन बातों का ध्यान रखें:
सही ITR फॉर्म चुनें: इनकम के सोर्स, आवासीय स्थिति और टैक्सपेयर की श्रेणी के आधार पर सही फॉर्म चुनें। गलत फॉर्म चुनने से रिपोर्टिंग में त्रुटियां हो सकती हैं और रिफंड अटक सकता है।
आय की सटीक गणना: अपनी आय के सभी स्रोतों, लागू कटौतियों और छूटों को सही ढंग से घोषित करें।
TDS डिटेल वेरिफाई करें: रिटर्न में पहले से भरे हुए टीडीएस डिटेल का फॉर्म 16, फॉर्म 16A या अन्य संबंधित रिकॉर्ड से मिलान जरूर करें ताकि कोई विसंगति न रहे।
सही बैंक खाते का डिटेल दें: अपने एक्टिव बैंक खाते की सही जानकारी दर्ज करें क्योंकि रिफंड सीधे रिटर्न से लिंक बैंक खाते में ही क्रेडिट किया जाता है। गलत जानकारी देने से ट्रांसफर फेल हो सकता है।
तुरंत ई-वेरिफिकेशन पूरा करें: रिटर्न दाखिल करने के बाद जितनी जल्दी हो सके इसे ई-वेरीफाई करें। वेरिफिकेशन के बाद ही रिटर्न प्रोसेस होता है और समय पर वेरिफिकेशन से रिफंड जल्दी जारी होने में मदद मिलती है।