ITR Filing: रिटर्न भरने की डेडलाइन से 2 दिन पहले AIS में गलत एंट्री की मिल रही शिकायतें, जानिए क्या है मामला

ITR Filing 2024: कई टैक्सपेयर्स ने एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट में ऐसे ट्रांजेक्शन होने की जानकारी दी है, जिसकी उम्मीद उन्हें नहीं थी। क्रेडिट कार्ड के लिए रेफर करने पर मिला कैशबैक इसका उदाहरण है। इसके रिटर्न फाइल करने की डेडलाइन से ठीक पहले टैक्सपेयर्स की मुश्किल बढ़ गई है

अपडेटेड Jul 30, 2024 पर 11:10 AM
शेयरों के ट्रांजेक्शन के मामले में भी गलत रिपोर्टिंग की शिकायत मिली है।

जिन टैक्सपेयर्स ने अब तक रिटर्न फाइल नहीं किया है उन्हें अपने एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (एआईएस) के डेटा चेक कर लेना चाहिए। खासकर यह उन टैक्सपेयर्स के लिए ज्यादा जरूरी है, जो खुद यानी बगैर किसी सीए या इंटरमीडियरी के रिटर्न फाइल करने जा रहे हैं। उनके एआईएस में कुछ ऐसी एंट्रीज शामिल हो सकती हैं, जिन्हें शामिल नहीं होना चाहिए। इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए अब सिर्फ दो दिन बचे हैं। 31 जुलाई तक इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना जरूरी है। इसके बाद फाइल करने पर पेनाल्टी लगेगी और टैक्स पर इंटरेस्ट भी चुकाना होगा।

AIS में कैशबैक की भी रिपोर्टिंग

एआईएस (AIS) में गलत एंट्री शामिल होने की शिकायत मिल रही है। एक टैक्सपेयर ने बताया कि उसने अपने एआईएस में एक ऐसा ट्रांजेक्शन देखा, जिसकी उम्मीद उसने नहीं की थी। दरअसल, यह क्रेडिट कार्ड के लिए किसी को रेफर करने के बदले में मिला कैशबैक था। इस कैशबैक पर टैक्स लगना चाहिए या नहीं, इस बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं है। बिलियन बेसकैंप के फाउंडर वैभव सांकला ने कहा, "कैशबैक अक्सर व्यक्ति के खर्च से जुड़ा एक तरह का डिस्काउंट है। यह एक्सपेंस में किया गया रिडक्शन हैं न कि इनकम। इसके अलावा प्वाइंट्स की रुपये में वैल्यू निकालना भी मुश्किल है, क्योंकि इसके साथ एक्सपायरी और रिडेम्प्शन के क्लॉज जुड़े होते हैं।"


कई ट्रांजेक्शन पर टैक्स के नियम स्पष्ट नहीं

मनीकंट्रोल ने इस बारे में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की राय जानने की कोशिश की। उनका कहना था कि ऐसे कुछ मामले देखने को मिले हैं, जिनमें ट्रांजेक्शन की वैल्यू ज्यादा है और कुछ ऐसे ट्रांजेक्शन भी हैं, जिनके टैक्स के दायरे में आने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इस तरह की गलतियों की वजह इस समझ का अभाव हो सकता है कि एआईएस में किस तरह के ट्रांजेक्शन शामिल होने चाहिए।

एक ही ट्रांजेक्शन की कई बार रिपोर्टिंग

बैंक, स्टॉक ब्रोकर्स और रजिस्ट्रार्स, म्चुअल फंड्स, क्रेडिट कार्ड इश्यू करने वाले बैंक, स्कूल, होटल, ट्रैवल एजेंट्स, फॉरेक्स सर्विस प्रोवाइडर्स, ज्वैलर्स, डिविडेंड देने वाली कंपनियों, इलेक्ट्रिसिटी यूटिलिटी प्रोवाइडर्स और प्रॉपर्टी सब-रजिस्ट्रार को व्यक्ति के हाई वैल्यू ट्रांजेक्शन की जानकारी उसके पैन के साथ सरकार को देना जरूरी है। इसका मकसद यह है कि हाई-वैल्यू ट्रांजेक्शन पर टैक्सपेयर्स से टैक्स वसूला जाए।

शेयरों के ट्रांजेक्शन में भी गलत रिपोर्टिंग

शेयरों के ट्रांजेक्शन के मामले में भी गलत रिपोर्टिंग की शिकायत मिली है। नियम है कि सिर्फ 10 लाख से ज्यादा वैल्यू के शेयर ट्रांजेक्शन की रिपोर्टिंग होनी चाहिए। यह देखने में आया है कि एक ही ट्रांजेक्शन के बारे में कई एजेंसीज की तरफ से जानकारी दी गई हैं। इनमें कंपनीज, स्टॉक एक्सचेंज, डिपॉजिटरीज और स्टॉक ब्रोकर्स शामिल हैं। इसके अलावा ट्रांजेक्शन की वैल्यू भी गलत है। म्यूचुअल फंड्स के मामले में भी एक ही ट्रांजेक्शन की कई रिपोर्टिंग की गई हैं। 10 लाख रुपये या इससे ज्यादा वैल्यू के ट्रांजेक्शन की जानकारी CAMS, KFinTech जैसी ट्रांसफर एजेंसियों और म्यूचुअल फंड हाउस की तरफ से की गई है।

यह भी पढ़ें: ITR Filing: रिटर्न फाइल करने के कितने दिन बाद आएगा रिफंड, क्या इंटरेस्ट भी मिलेगा? 

एआईएस के फीडबैक सिस्टम के जरिए शिकायत का विकल्प

इस बारे में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स का कहना है कि अगर किसी टैक्सपेयर्स को अपने बिजनेस के नेचर की वजह से कैशबैक मिला है तो उसे बिजनेस इनकम या इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज के रूप में दिखाया जा सकता है। टैक्सपेयर्स को यह भी चेक करने की जरूरत है कि एआईएस में शामिल इनकम उससे जुड़ी है या नहीं। अगर इसे गलती से एआईएस में शामिल किया गया है तो टैक्सपेयर्स AIS के फीडबैक सिस्टम के तहत रिस्पॉन्स फाइल कर सकता है। फीडबैक सिस्टम में इस विकल्प का इस्तेमाल करना होगा कि यह इनकम मुझसे नहीं जुड़ा है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।