ITR Filing 2026: सैलरीड टैक्सपेयर्स अक्सर करते हैं ये 5 गलतियां, रिफंड में देरी से लेकर नोटिस आने का भी खतरा
ITR Filing 2026: क्या सिर्फ Form 16 देखकर ITR भर रहे हैं? यह गलती आपको महंगी पड़ सकती है। छोटी-सी चूक की वजह से रिफंड अटक सकता है, अतिरिक्त टैक्स देना पड़ सकता है या फिर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का नोटिस भी आ सकता है। जानिए डिटेल और बचने का तरीका।
कई टैक्सपेयर Form 16 डाउनलोड करते हैं और सीधे ITR भर देते हैं। यही बड़ी गलती साबित हो सकती है।
ITR Filing 2026: सैलरी पाने वाले ज्यादातर लोगों के लिए अब ITR भरना पहले से काफी आसान हो गया है। Form 16, Form 26AS और पहले से भरी जानकारी की वजह से पूरी प्रक्रिया डिजिटल हो चुकी है। फिर भी हर साल कई टैक्सपेयर गलतियां कर बैठते हैं। इनकी वजह से रिफंड अटक जाता है, अतिरिक्त टैक्स देना पड़ता है या इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का नोटिस आ जाता है।
सिर्फ Form 16 के भरोसे न रहें
कई लोग मान लेते हैं कि Form 16 में ITR के लिए जरूरी सारी जानकारी होती है। लेकिन, ऐसा नहीं है। इसमें सिर्फ सैलरी और कंपनी की ओर से काटा गया TDS दिखता है।
अगर आपको बैंक ब्याज, FD, RD, डिविडेंड, किराया, कैपिटल गेन, फ्रीलांसिंग या किसी दूसरे स्रोत से कमाई हुई है, तो वह Form 16 में नहीं दिखेगी। ऐसी आय छूटने पर बाद में परेशानी हो सकती है।
2. इन तीनों का मिलान जरूर करें
कई टैक्सपेयर Form 16 डाउनलोड करते हैं और सीधे ITR भर देते हैं। यही बड़ी गलती साबित हो सकती है।
Form 26AS में TDS, TCS और जमा किए गए टैक्स की जानकारी होती है। वहीं AIS में आपकी आय और वित्तीय लेनदेन का काफी विस्तृत रिकॉर्ड मिलता है। अगर इन दस्तावेजों और ITR में अंतर रह जाता है, तो रिफंड प्रभावित हो सकता है या अतिरिक्त टैक्स की मांग आ सकती है।
3. सही ITR फॉर्म चुनना जरूरी
हर टैक्सपेयर के लिए एक ही ITR फॉर्म नहीं होता। आपकी आय के स्रोत के हिसाब से फॉर्म बदलता है।
अगर आपके पास कैपिटल गेन, विदेशी एसेट, एक से ज्यादा मकान या बिजनेस इनकम है, तो अलग ITR फॉर्म लागू हो सकता है। गलत फॉर्म चुनने पर रिटर्न को डिफेक्टिव माना जा सकता है और बाद में सुधार करना पड़ सकता है।
4. सिर्फ सैलरी TDS पर भरोसा न करें
कई लोग सोचते हैं कि कंपनी ने सैलरी से TDS काट लिया है, इसलिए उनका टैक्स पूरा हो गया। लेकिन यह हमेशा सही नहीं होता।
अगर बैंक ब्याज, किराया, डिविडेंड या निवेश से अतिरिक्त कमाई हुई है, तो कुल टैक्स देनदारी बढ़ सकती है। ऐसे मामलों में Advance Tax देना पड़ सकता है। अगर यह समय पर नहीं दिया गया, तो ब्याज भी देना पड़ सकता है।
5. बिना दस्तावेज के छूट का दावा न करें
80C, 80D, होम लोन ब्याज या HRA जैसी छूट का दावा करते समय जरूरी दस्तावेज अपने पास जरूर रखें।
हालांकि ITR के साथ दस्तावेज अपलोड नहीं करने होते, लेकिन जरूरत पड़ने पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट उन्हें मांग सकता है। गलत दावा करने पर अतिरिक्त टैक्स और ब्याज देना पड़ सकता है।
6. छोटी गलती भी पड़ सकती है भारी
ज्यादातर मामलों में टैक्स से जुड़ी परेशानी किसी जटिल नियम की वजह से नहीं, बल्कि ऐसी छोटी गलतियों की वजह से होती है। सभी आय की सही जानकारी देना, AIS और Form 26AS का मिलान करना और सही ITR फॉर्म चुनना आपको नोटिस, रिफंड में देरी और अतिरिक्त टैक्स की मांग से बचा सकता है।
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