ITR Filing 2026: फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD को सबसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में गिना जाता है। नौकरीपेशा लोग, वरिष्ठ नागरिक और कम जोखिम लेने वाले निवेशक अक्सर FD में पैसा लगाते हैं।

ITR Filing 2026: फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD को सबसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में गिना जाता है। नौकरीपेशा लोग, वरिष्ठ नागरिक और कम जोखिम लेने वाले निवेशक अक्सर FD में पैसा लगाते हैं।
लेकिन FD से मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स फ्री नहीं होता। अगर नियमों की सही जानकारी न हो, तो बाद में टैक्स और पेनाल्टी दोनों भरनी पड़ सकती है।
FD का ब्याज कहां जुड़ता है?
FD से मिलने वाला ब्याज 'इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज' के तहत आता है। यानी बैंक से मिला ब्याज आपकी कुल सालाना आय में जोड़ दिया जाता है और उसी हिसाब से टैक्स लगाया जाता है।
मान लीजिए आपकी नौकरी से सालाना आय 9 लाख रुपये है और FD से 80 हजार रुपये ब्याज मिला है, तो आपकी कुल टैक्सेबल आय 9.80 लाख रुपये मानी जाएगी।
बैंक कब काटता है TDS?
अगर एक वित्त वर्ष में किसी बैंक से FD पर मिलने वाला कुल ब्याज तय सीमा से ज्यादा हो जाता है, तो बैंक TDS काटना शुरू कर देता है। सामान्य ग्राहकों के लिए यह सीमा 50 हजार रुपये है। वहीं वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा 1 लाख रुपये तक है।
अगर आपका PAN कार्ड बैंक में अपडेट है, तो आमतौर पर 10 प्रतिशत TDS कटता है। PAN अपडेट न होने पर ज्यादा TDS कट सकता है।
क्या सिर्फ TDS कटता है?
कई लोग मान लेते हैं कि TDS कट गया, तो अब कोई टैक्स नहीं देना होगा। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। अगर आप 20 प्रतिशत या 30 प्रतिशत टैक्स स्लैब में आते हैं, तो सिर्फ 10 प्रतिशत TDS कटने से पूरा हिसाब नहीं बनता। बाकी टैक्स आपको ITR भरते समय देना पड़ सकता है।
वहीं अगर आपकी कुल आय टैक्स सीमा से कम है, तो आप Form 15G या Form 15H जमा करके TDS कटने से बच सकते हैं। वरिष्ठ नागरिक Form 15H जमा करते हैं।
FD पर टैक्स कैसे बचाएं?
5 साल वाली Tax Saver FD पर सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट मिल सकती है। हालांकि इसमें लॉक-इन पीरियड होता है और बीच में पैसा नहीं निकाला जा सकता।
कुछ लोग अलग-अलग बैंकों में FD बांटकर भी TDS सीमा को मैनेज करने की कोशिश करते हैं।
निवेश से पहले ये बात जरूर समझें
FD सुरक्षित निवेश जरूर मानी जाती है, लेकिन टैक्स और महंगाई को जोड़कर देखें, तो असली रिटर्न काफी कम हो सकता है।
अगर आप ऊंचे टैक्स स्लैब में आते हैं, तो FD का पोस्ट-टैक्स रिटर्न कई बार उम्मीद से काफी कम रह जाता है। इसलिए सिर्फ ब्याज दर देखकर निवेश करने की बजाय टैक्स असर भी जरूर समझना चाहिए।
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