ITR Filing 2026: डिविडेंड और बोनस शेयर मिले हैं? ITR भरते समय भूलकर भी न करें ये गलती
ITR Filing 2026: शेयरों से डिविडेंड मिला है या बोनस शेयर बेचे हैं? ITR भरते समय एक छोटी गलती भी AIS और Form 26AS से मिसमैच करा सकती है। जानिए डिविडेंड और बोनस शेयरों की सही टैक्स रिपोर्टिंग का पूरा तरीका।
ITR-1, ITR-2, ITR-3 और ITR-4 में डिविडेंड इनकम को 'इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज' के तहत दिखाना चाहिए।
ITR Filing 2026: अगर आपने वित्त वर्ष 2025-26 में शेयरों या इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश किया है और आपको डिविडेंड मिला है या बोनस शेयर मिले हैं, तो ITR भरते समय इनकी सही जानकारी देना जरूरी है। दोनों पर टैक्स के नियम अलग-अलग हैं। अगर जानकारी गलत भर दी गई या छूट गई, तो AIS और Form 26AS से आंकड़े मेल नहीं खा सकते। ऐसी स्थिति में टैक्स विभाग की ओर से सवाल पूछे जा सकते हैं।
डिविडेंड इनकम कहां दिखानी होती है?
डिविडेंड इनकम पर आपकी टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है। अगर किसी वित्त वर्ष में डिविडेंड की रकम 10,000 रुपये से ज्यादा है, तो कंपनी सेक्शन 194 के तहत 10% TDS काट सकती है। अगर PAN उपलब्ध नहीं कराया गया है, तो TDS की दर 20% तक हो सकती है।
ITR-1 और ITR-2 में डिविडेंड इनकम को 'इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज' के तहत Schedule OS में दिखाना होता है। यहां TDS कटने के बाद की नहीं, बल्कि पूरी ग्रॉस डिविडेंड रकम दर्ज करनी होती है। बाद में कटे हुए TDS का क्रेडिट लिया जा सकता है। अगर अंतिम टैक्स देनदारी कम निकलती है, तो रिफंड भी मिल सकता है।
बोनस शेयरों पर टैक्स कैसे लगता है?
बोनस शेयर मिलने पर तुरंत कोई टैक्स नहीं देना पड़ता। टैक्स तब लगता है, जब आप उन्हें बेचते हैं। अगर बोनस शेयर अलॉटमेंट के बाद 12 महीने या उससे ज्यादा समय तक रखे जाते हैं, तो बिक्री पर होने वाला मुनाफा लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) माना जाता है। इस पर 12.5% टैक्स लगता है। सेक्शन 112A के तहत कुल LTCG पर 1.25 लाख रुपये तक की सालाना छूट भी मिलती है।
अगर बोनस शेयर 12 महीने से पहले बेच दिए जाते हैं, तो मुनाफा शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) माना जाएगा और उस पर 20% टैक्स लगेगा। बोनस शेयर बेचने से होने वाले कैपिटल गेन की जानकारी ITR-2 के Schedule CG में देनी होती है।
अलग-अलग ITR फॉर्म में कहां भरें जानकारी?
एक्सपर्ट्स मुताबिक, ITR-1, ITR-2, ITR-3 और ITR-4 में डिविडेंड इनकम को 'इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज' के तहत दिखाना चाहिए। साथ ही अगर TDS कटा है, तो उसे टैक्स क्रेडिट वाले सेक्शन में मैच करना जरूरी है।
अगर विदेशी कंपनियों से डिविडेंड मिला है, तो उससे जुड़ी अतिरिक्त जानकारी भी संबंधित शेड्यूल में देनी पड़ सकती है।
कौन-कौन से दस्तावेज संभालकर रखें?
ITR भरने से पहले डिमैट स्टेटमेंट, ब्रोकर कॉन्ट्रैक्ट नोट, डिविडेंड स्टेटमेंट, AIS, Form 26AS और सालाना टैक्स स्टेटमेंट अपने पास रखें।
बोनस शेयरों के मामले में कॉरपोरेट एक्शन स्टेटमेंट या वह रिकॉर्ड भी संभालकर रखें, जिसमें बोनस शेयर अलॉट होने की तारीख दर्ज हो। ये दस्तावेज भविष्य में किसी भी स्पष्टीकरण के समय काम आ सकते हैं।
AIS और ITR में मिसमैच से कैसे बचें?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि ITR भरने से पहले ब्रोकर स्टेटमेंट, डिमैट स्टेटमेंट, AIS और Form 26AS का मिलान जरूर कर लेना चाहिए। शेयर बिक्री की तारीख, मात्रा, बिक्री मूल्य और होल्डिंग अवधि वही दर्ज करें, जो आपके रिकॉर्ड में मौजूद है।
अगर AIS में कोई आंकड़ा गलत दिख रहा है, तो उसे सीधे कॉपी करने के बजाय अपने वास्तविक रिकॉर्ड के आधार पर सही जानकारी भरें। जरूरत पड़ने पर AIS में फीडबैक भी दर्ज करना चाहिए।
किन गलतियों से आ सकती है नोटिस
डिविडेंड इनकम नहीं दिखाना, AIS और Form 26AS से अलग आंकड़े भरना, बोनस शेयर बेचने के बाद भी उसकी जानकारी नहीं देना या कैपिटल गेन की गलत गणना करना टैक्स विभाग के लिए रेड फ्लैग बन सकता है।
इसके अलावा बड़े शेयर लेनदेन, बार-बार होने वाले बड़े मुनाफे, विदेशी डिविडेंड की गलत रिपोर्टिंग या सिर्फ नेट रकम दिखाकर ग्रॉस डिविडेंड छिपाना भी जांच की वजह बन सकता है। इसलिए ITR भरते समय सभी आंकड़ों का सही मिलान करना बेहद जरूरी है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।