Income Tax Return: आईटीआर फाइल करने के बाद भूलकर भी न छोड़ें ये आखिरी काम, वरना अटक सकता है रिफंड

ITR Filing 2026: देशभर में असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR फाइल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। लाखों टैक्सपेयर्स समय रहते अपना रिटर्न भरने की तैयारी कर रहे हैं

अपडेटेड May 25, 2026 पर 2:00 PM
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ITR Filing 2026: देशभर में असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR फाइल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

ITR Filing 2026: देशभर में असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR फाइल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। लाखों टैक्सपेयर्स समय रहते अपना रिटर्न भरने की तैयारी कर रहे हैं। लेकिन कई लोग एक बड़ी गलती कर बैठते हैं। वह ITR फाइल तो कर देते हैं, लेकिन उसे e-verify करना भूल जाते हैं। यही छोटी सी चूक बाद में बड़ा सिरदर्द बन सकती है।

दरअसल, सिर्फ ITR जमा करना काफी नहीं होता। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के नियमों के मुताबिक रिटर्न फाइल करने के बाद उसका वेरिफिकेशन करना जरूरी है। अगर ऐसा नहीं किया गया, तो रिटर्न अधूरा माना जा सकता है। इससे टैक्स रिफंड अटक सकता है और आगे चलकर नोटिस या दूसरी परेशानियां भी हो सकती हैं।

31 जुलाई है अहम तारीख


सैलरी पाने वाले ज्यादातर टैक्सपेयर्स के लिए फाइनेंशियल ईयर 2025-26 का ITR फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 मानी जा रही है। हालांकि कुछ मामलों में यह तारीख अलग भी हो सकती है।

Aadhaar OTP से मिनटों में होगा काम

ITR e-verify करने का सबसे आसान तरीका Aadhaar OTP माना जाता है। इसके लिए आपका आधार PAN से लिंक होना चाहिए और मोबाइल नंबर भी आधार से जुड़ा होना जरूरी है। इनकम टैक्स पोर्टल पर Aadhaar OTP विकल्प चुनते ही मोबाइल पर एक OTP आता है। इसे डालते ही कुछ मिनटों में वेरिफिकेशन पूरा हो जाता है।

बैंक अकाउंट और डीमैट से भी कर सकते हैं वेरिफा

टैक्सपेयर्स चाहें तो बैंक अकाउंट या डीमैट अकाउंट के जरिए भी ITR verify कर सकते हैं। इसके लिए पहले अकाउंट को इनकम टैक्स पोर्टल पर प्री वैलिडेट करना होता है। इसके बाद रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर या ईमेल पर OTP आता है, जिससे वेरिफिकेशन आसानी से पूरा हो जाता है।

नेट बैंकिंग बना सकता है काम आसान

कई बैंक अपने ग्राहकों को नेट बैंकिंग के जरिए सीधे ITR e-verify करने की सुविधा देते हैं।

यूजर को सिर्फ अपने नेट बैंकिंग अकाउंट में लॉगिन करना होता है और वहां मौजूद टैक्स या e-verification सेक्शन में जाकर प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। इससे बार-बार अलग पोर्टल पर जाने की जरूरत नहीं पड़ती।

कुछ लोगों के लिए जरूरी है डिजिटल सिग्नेचर

जिन टैक्सपेयर्स के अकाउंट्स का ऑडिट जरूरी होता है, जैसे कुछ बिजनेस या कंपनियां, उन्हें डिजिटल सिग्नेचर Certificate यानी DSC का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। यह तरीका ज्यादा सेफ माना जाता है और कई मामलों में अनिवार्य भी होता है।

ऑफलाइन तरीका 

अगर कोई व्यक्ति ऑनलाइन वेरिफिकेशन नहीं कर पा रहा, तो वह ITR-V फॉर्म डाउनलोड करके साइन कर सकता है और उसे बेंगलुरु स्थित CPC ऑफिस भेज सकता है। हालांकि यह प्रक्रिया रिटर्न फाइल करने के 30 दिनों के भीतर पूरी करनी होती है।

ये बातें जरूर रखें ध्यान में

टैक्सपेयर्स को अपना मोबाइल नंबर और ईमेल इनकम टैक्स पोर्टल पर अपडेट रखना चाहिए, क्योंकि ज्यादातर वेरिफिकेशन OTP के जरिए होते हैं। साथ ही, रिफंड तभी प्रोसेस होता है जब ITR verify हो जाए। टैक्स से जुड़ा काम केवल आधिकारिक पोर्टल या बैंकिंग चैनल के जरिए ही करें और किसी संदिग्ध लिंक या मैसेज पर क्लिक करने से बचें।

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