ITR Filing: रिटर्न में 'अन्य स्रोत से आय' की जानकारी देना नहीं भूलें, जानिए यह क्यों बहुत जरूरी है

ITR Filing 2024: एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने में सबसे ज्यादा गलती अन्य स्रोत से इनकम डेक्लेयर करने में होती है। इसकी वजह यह है कि कई टैक्सपेयर्स यह नहीं जानते कि कौन-कौन सी इनकम इसके तहत आती हैं

अपडेटेड Jul 30, 2024 पर 1:10 PM
इनकम के पांच हेड्स में-सैलरी, बिजनेस एंड प्रोफेशन, कैपिटल गेंस, हाउस प्रॉपर्टी और अन्य स्रोत शामिल हैं।

इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना ऐसा काम है, जिसे पूरे ध्यान से करना जरूरी है। आपको हर स्रोत से हुई इनकम की जानकारी इसमें देना होता है। चूंकि इनकम को पांच अलग-अलग हेड्स में बांटा गया है, जिससे यह काम थोड़ा मुश्किल हो जाता है। इनकम के पांच हेड्स में-सैलरी, बिजनेस एंड प्रोफेशन, कैपिटल गेंस, हाउस प्रॉपर्टी और अन्य स्रोत शामिल हैं। हर हेड के तहत इनकम के बारे में बताना जरूरी है।

अक्सर टैक्सपेयर्स इन इनकम के बारे में बताना भूल जाते हैं

मुंबई के चार्टर्ड अकाउंटेंट सुरेश सुराणा ने कहा कि टैक्सपेयर्स आम तौर पर सभी स्रोतों से इनकम की जानकारी देने में चूक जाते हैं। टैक्सपेयर्स को इंटरेस्ट, डिविडेंड, रॉयल्टी, रेंट, गैंबलिंग इनकम सहित सभी स्रोतों से हुई इनकम की जानकारी देना चाहिए। इसके अलावा रेजिडेंट और ऑर्डिनरी रेजिडेंट टैक्सपेयर्स के लिए अपने फॉरेन एसेट्स से हुई इनकम की जानकारी देना भी जरूरी है।


इनकम की पूरी जानकारी देने पर लग सकती है पेनाल्टी

एकेएम ग्लोबल में टैक्स मार्केट के हेड येशू सहगल ने कहा कि अक्सर टैक्सपेयर्स अन्य स्रोत से आय की जानकारी देना भूल जाते हैं। इसके अलावा वे दूसरे कुछ स्रोतों से आय की जानकारी भी नहीं देते हैं। इनमें इंटरेस्ट इनकम, रेंट इनकम आदि शामिल हैं। हर स्रोत से होने वाली इनकम की जानकारी नहीं देने पर पेनाल्टी लग सकती है। टैक्सपेयर्स का एसेसमेंट प्रोसेस भी लंबा चल सकता है।

अन्य स्रोतों से इनकम का मतलब क्या है?

अन्य स्रोतों से इनकम हेड में ऐसी सभी इनकम आती हैं जो इनकम के दूसरे प्रमुख चार हेड के तहत नहीं आती हैं। चार प्रमुख हेड्स में सैलरी, हाउस प्रॉपर्टी, बिजनेस एंड प्रोफेशन और कैपिटल गेंस शामिल है। अन्य स्रोत से इनकम हेड के तहत बैंक के सेविंग्स अकाउंट, फिक्स्ड डिपॉजिट, रेकरिंग डिपॉजिट और बॉन्ड्स से मिलने वाला इंटरेस्ट आता है। ज्यादातर टैक्सपेयर्स के बैंकों में सेविंग अकाउंट और एफडी होते हैं। इनके इंटरेस्ट का पैसा सीधे बैंक अकाउंट में क्रेडिट हो जाता है। लोग अक्सर इस इनकम को अपने इनकम टैक्स रिटर्न में डेक्लेयर करना भूल जाते हैं।

टैक्स छूट वाली इनकम को भी डेक्लेयर करना जरूरी है

यह ध्यान रखें कि इंटरेस्ट के जरिए हुई इनकम टैक्स के दायरे में आती हो या नहीं, उसे रिटर्न में डेक्लेयर करना जरूरी है। इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80TTA के तहत 60 साल के कम उम्र के टैक्सपेयर्स को सेविंग बैंक अकाउंट से बतौर इंटरेस्ट 10,000 रुपये तक की इनकम को टैक्स से छूट हासिल है। सीनियर सिटीजंस यानी 60 साल से ज्यादा उम्र के व्यक्ति को सेविंग अकाउंट और एफडी से बतौर इंटरेस्ट 50,000 रुपये तक की इनकम को टैक्स से छूट हासिल है।

ये इनकम भी अन्य स्रोतों से इनकम के तहत आती हैं

इंटरेस्ट इनकम के अलावा शेयरों और म्यूचुअल फंडों से डिविडेंड इनकम, एक वित्त वर्ष में गैर-रिश्तेदार से मिला 50,000 रुपये से ज्यादा मूल्य के गिफ्ट की जानकारी भी अन्य स्रोतों से इनकम के तहत देना जरूरी है। इसके अलावा लॉटरी, क्रॉसवर्ड और गेम शो से हुई इनकम इस हेड के तहत आती है। पेंशनर की मौत के बाद परिवार के सदस्यों को फैमिली पेंशन से होने वाली इनकम भी अन्य स्रोत से इनकम हेड के तहत आती है। आईटीआर फॉर्म में सभी इनकम की जानकारी नहीं देने पर पेनाल्टी लगती है और नहीं चुकाए गए टैक्स पर इंटरेस्ट भी चुकाना पड़ता है।

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