सोने ने 2026 में निवेशकों को 63 फीसदी रिटर्न दिया था। लेकिन, इस साल सोने की चाल सुस्त पड़ गई है। इस साल अगस्त तक सोने का रिटर्न सिर्फ 2 फीसदी है। इससे इनवेस्टर्स निराश हैं। लेकिन, कोटक महिंद्रा म्यूचुअल फंड का कहना है कि इसके बावजूद पोर्टफोलियो में गोल्ड को शामिल करना जरूरी है। उसने सितंबर 2026 एसेट ऐलोकेशन आउटलुक में इस बारे में बताया है।
कोटक का इक्विटी पर न्यूट्रल रुख
कोटक ने शेयरों पर अपना रुख न्यूट्रल रखा है। म्यूचुअल फंड हाउस का यह भी मानना है कि आगे सोने में 2026 जैसी तेजी लौटने को लेकर संशय है। जहां तक निवेशकों की बात है तो कोटक की रिपोर्ट का मतलब यह नहीं है कि सोना शेयर की जगह ले लेगा। इसका मतलब सिर्फ यह है कि एसेट ऐलोकेशन में इक्विटी और डेट के साथ सोने की भी जगह है।
मल्टी एसेट पोर्टफोलियो का फायदा
कोटक ने एक ऐसे पोर्टफोलियो के बारे में बताया है, जिसमें निफ्टी टीआरआई 55 फीसदी, निफ्टी शॉर्ट ड्यूरेशन डेट इंडेक्स 30 फीसदी और डोमेस्टिक गोल्ड 15 फीसदी है। इस पोर्टफोलियो ने पांच सालों के दौरान 12.23 फीसदी रिटर्न दिया है। इस दौरान निफ्टी 50 टीआरआई का रिटर्न 10.93 फीसदी रहा है।
डायवर्सिफिकेशन के लिए सोने में निवेश
अगर तीन सालों की बात की जाए तो इस पोर्टफोलियो ने 11.20 फीसदी रिटर्न दिया है, जबकि निफ्टी 50 टीआरआई का रिटर्न 7.33 फीसदी रहा है। 7 साल में दोनों का रिटर्न 13.50 फीसदी रहा है। 10 साल में पोर्टफोलियो का रिटर्न 11.96 रहा है, जबकि निफ्टी 50 टीआरआई का रिटर्न 11.95 फीसदी रहा है।
सिर्फ इक्विटी में निवेश में ज्यादा रिस्क
इससे डायवर्सिफायड पोर्टफोलियो और सिर्फ इक्विटी वाले पोर्टफोलियो के रिटर्न के बीच फर्क का पता चलता है। मंथली 10,000 रुपये SIP की हिस्सेदारी 55 फीसदी, शॉर्ट ड्यूरेशन डेट की हिस्सेदारी 30 फीसदी और सोने की हिस्सेदारी 15 फीसदी वाले पोर्टफोलियो ने एक साल में 3.98 फीसदी रिटर्न दिया है, जबकि निफ्टी 50 टीआरआई का रिटर्न इस दौरान मानइस 3.01 फीसदी है।
बैलेंस्ड पोर्टफोलियो में सोने की भी जगह
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं निकाला जाना चाहिए कि सिर्फ गोल्ड का प्रदर्शन शेयरों से अच्छा रहा है। पोर्टफोलियो में 30 फीसदी हिस्सेदारी शॉर्ट ड्यूरेशन डेट की भी है। पोर्टफोलियो तीनों एसेट क्लास का प्रदर्शन दिखाता है। कोटक के आउटलुक में सोने से जुड़ी कुछ खास बातों के बारे में बताया गया है।
सोने में इन वजहों से जारी रहेगी तेजी
पहला, कई देशों के केंद्रीय बैंकों ने सोने की खरीदारी बढ़ाई है। दूसरा, चीन भी गोल्ड में काफी निवेश कर रहा है। लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि इनवेस्टर्स को शेयरों की जगह सोने में निवेश शुरू कर देना चाहिए। सोने का रिटर्न 2025 में 63 फीसदी रहने का मतलब यह नहीं है कि आगे भी उसका रिटर्न इतना रहेगा। इसका मतलब सिर्फ यह है कि पोर्टफोलियो में शेयर और डेट के साथ गोल्ड को भी शामिल करना जरूरी है।