UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) के जरिए लेनदेन की संख्या चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही यानि कि अप्रैल-सितंबर 2026 में 27 प्रतिशत बढ़कर करीब 145 अरब हो गई। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में UPI के जरिए 114 अरब लेनदेन हुए थे। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-सितंबर 2026 के दौरान UPI के जरिए 177 लाख करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ। यह आंकड़ा एक साल पहले के 148 लाख करोड़ रुपये से 20 प्रतिशत ज्यादा है।
हालांकि सितंबर में UPI के जरिए लेनदेन मासिक आधार पर 1.8 प्रतिशत घटकर 2,407 करोड़ रहा। अगस्त में UPI के जरिए 2,450 करोड़ लेनदेन हुए थे। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में UPI के जरिए लेनदेन की कुल वैल्यू भी 1.50 प्रतिशत घटकर 29.37 लाख करोड़ रुपये रही, जो अगस्त में 29.82 लाख करोड़ रुपये थी। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि लेनदेन में गिरावट का कारण अगस्त में 31 दिन और सितंबर में 30 दिन होना है। सितंबर में प्रतिदिन औसत लेनदेन 80.2 करोड़ रहा, जबकि अगस्त में यह 79.1 करोड़ था।
15 अक्टूबर से 2000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर MDR
सरकार ने 15 अक्टूबर 2026 से मर्चेंट्स के लिए 2,000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू किया है। छोटे पेमेंट्स पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। दो व्यक्तियों के बीच (पर्सन टू पर्सन) लेनदेन फ्री रहेगा, फिर चाहे भेजी गई राशि कितनी भी हो। UPI QR कोड के जरिए महीने में 1 लाख रुपये तक पेमेंट लेने वाले छोटे मर्चेंट किसी भी नए चार्ज से पूरी तरह मुक्त रहेंगे।
75,000 रुपये और उससे अधिक के लेन-देन के लिए, MDR की मैक्सिमम लिमिट प्रति लेन-देन 300 रुपये तक ही रहेगी। रेलवे, टेलिकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट सहित आवश्यक और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के लेन-देन पर प्रति लेनदेन 5 रुपये का एकसमान MDR लागू होगा। म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज और शेयर ब्रोकर व डीलर के जरिए किए जाने वाले पेमेंट पर 0.02 प्रतिशत MDR लगेगा, जो अधिकतम 300 रुपये होगा।
MDR लगाने का मकसद डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम के लिए एक टिकाऊ रेवेन्यू सिस्टम बनाना है। MDR वह फीस है, जो मर्चेंट डिजिटल ट्रांजेक्शन को प्रोसेस करने के लिए पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को देते हैं। इकट्ठा की गई रकम को UPI इकोसिस्टम में बैंकों और दूसरी एंटिटीज के बीच बांटा जाएगा। इकट्ठा किए गए कुल MDR का 40% ग्राहकों के बैंकों को, 30% पेमेंट गेटवे को, 20% UPI ऐप को और बाकी 10% UPI ऐप के स्पॉन्सर बैंक को जाएगा।