लिक्विड फंडों में मिल रहा 6% से ज्यादा रिटर्न, तो बैंक सेविंग्स अकाउंट में पूरा पैसा रखना क्या समझदारी है?

इंटरेस्ट रेट जब बढ़ रहा होता है तब लिक्विड फंडों में निवेश करना फायदेमंद हो जाता है। इसकी वजह यह है कि ऐसे फंडों का रिटर्न बढ़ जाता है। पिछले साल मई से RBI इंटरेस्ट रेट लगातार बढ़ा रहा है। इससे लिक्विड फंडों की यील्ड-टू-मैच्योरिटी 6 फीसदी से ज्यादा हो गई है

अपडेटेड Mar 06, 2023 पर 1:14 PM
मई 2022 से अब तक RBI रेपो रेट 2.5 फीसदी बढ़ा चुका है। यह 6.5 फीसदी पर पहुंच गया है। इसके साथ ही लिक्विड फंडों का YTM भी बढ़ा है।

मार्च का महीना लिक्विड फंडों (Liquid Funds) के लिए बहुत अहम है। अगर किसी इनवेस्टर के पास सरप्लस पैसे हैं, जिसे वह शॉर्ट टर्म यानी कुछ हफ्तों के लिए इनवेस्ट करना चाहता है तो लिक्विड फंड सही ऑप्शन है। मार्च की शुरुआत से फाइनेंशियल सिस्टम में लिक्विटी घटनी शुरू हो जाती है। इससे शार्ट टर्म रेट बढ़ने लगते हैं। यह लिक्विड फंडों में निवेश करने वाले लोगों के लिए फायदेमंद है। पिछले एक साल में लिक्विड स्कीमों की यील्ड-टू-मैच्योरिटी (YTM) बढ़ी है। ACE MF के मुताबिक, लिक्विड फंडों की एवरेज यील्ड टू मैच्योरिटी 31 जनवरी, 2023 को बढ़कर 6.82 फीसदी पर पहुंच गई थी। एक साल पहले यह 3.67 फीसदी थी।

लिक्विड फंड का मतलब क्या है?

इस यील्ड को एक्सपेंस रेशियो से एडजस्ट करने के बाद निवेशक के औसत रिटर्न का अंदाजा लगाया जा सकता है। सबसे पहले आपके लिए लिक्विड फंडों के बारे में ठीक से जान लेना जरूरी है। लिक्विड फंड अपने पैसे का निवेश मनी मार्केट की ऐसी सिक्योरिटीज में करते हैं जिनकी मैच्योरिटी 91 दिन से कम होती है। इसका फायदा यह होता है कि उनका पोर्टफोलियो लगातार मैच्योर होता रहता है। फंड मैनेजर अपने पैसे को दोबारा दूसरी इसी तरह की सिक्योरिटीज में निवेश कर देता है।


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लिक्विड फंडों में कितना मिलता है रिटर्न?

इंटरेस्ट रेट्स बढ़ने की स्थिति में लिक्विड फंडों का प्रदर्शन अच्छा रहता है। यही वजह है कि पिछले कुछ समय से ऐसे फंडों का रिटर्न लगातार बढ़ा है। मई 2022 से अब तक RBI रेपो रेट 2.5 फीसदी बढ़ा चुका है। यह 6.5 फीसदी पर पहुंच गया है। इसके साथ ही लिक्विड फंडों का YTM भी बढ़ा है। इसलिए इनवेस्टर्स के लिए छोटी अवधि में अपना पैसा ऐसे फंडों में रखना फायदेमंद रहता है।

क्या लिक्विड फंडों का अट्रैक्शन बना रहेगा?

इनवेस्टर को बैंक के सेविंग्स अकाउंट में रखे अपने पैसे पर करीब 3 फीसदी रिटर्न मिलता है। ऐसे में लिक्विड फंडों से सालाना 6 फीसदी से ज्यादा रिटर्न काफी अट्रैक्टिव लगता है। बैंकों ने अब तक बहुत कम अवधि के फिक्स्ड डिपॉजिट के इंटरेस्ट नहीं बढ़ाए हैं। Mirae Asset Investment Managers के चीफ इनवेस्टमेंट ऑफिसर (Fixed Income) महेंद्र कुमार जाजू ने कहा, "लिक्विड फंडों का रिटर्न कुछ समय तक अट्रैक्टिव बने रहने की उम्मीद है, क्योंकि RBI अब भी इंटरेस्ट रेट बढ़ने का संकेत दे रहा है। अगर पॉलिसी इंटरेस्ट रेट्स आगे नहीं बढ़ते हैं तो भी उनके नीचे आने में थोड़ा समय लगेगा। ऐसे में लिक्विड फंडों के इनवेस्टर्स को फायदा होना तय है।"

एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि इनवेस्टर्स को यह नहीं भूलना चाहिए कि फाइनेंशियल ईयर का अंत चल रहा है। आम तौर पर ऐसे वक्त लिक्विडीटी की कमी देखने को मिलती है। कॉर्पोरेट ट्रेनर (Debt) Joydeep Sen ने कहा, "फाइनेंशियल सिस्टम में सरप्लस लिक्विडिटी को देखते हुए पिछले साल मार्च तक शॉर्ट टर्म रेट्स ज्यादा बढ़ने की उम्मीद नहीं की जा रही थी। लेकिन इस साल हालांकि लिक्विडिटी सरप्लस है, लेकिन धीरे-धीरे इसमें कमी दिख रही है।"

क्या आपको इनवेस्ट करना चाहिए?

लिक्विड फंडों का रिटर्न अभी अट्रैक्टिव है। लेकिन, आपको अपना पूरा पैसा इन स्कीमों में नहीं रखना चाहिए। इसकी वजह यह है कि पिछले एक साल से दूसरी डेट स्कीमों का रिटर्न अपेक्षाकृत कम है। इंटरेस्ट रेट्स बढ़ने के दौरान लिक्विड फंड्स, ओवरनाइट फंड्स और अल्ट्रा-शॉर्ट ड्यूरेशन फंड्स बहुत अट्रैक्टिव दिखते हैं। लेकिन इंटरेस्ट रेट्स नीचे जाने पर इनकी यील्ड भी घटने लगती है। जाजू ने कहा, "अगर आप तीन से पांच साल तक पैसे निवेश कर सकते हैं और डेट मार्केट में उतार-चढ़ाव के दौरान धैर्य बनाए रख सकते हैं तो आप कुछ पैसा शॉर्ट टर्म ड्यूरेशन फंड्स में रख सकते हैं।"

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