म्यूचुअल फंड्स की इक्विटी स्कीमों में इनवेस्टर्स की दिलचस्पी बढ़ रही है। यह स्कीम शेयर बाजारों में लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में पैसा लगाती हैं। कई लोग सीधे शेयरों में निवेश करने से बचते हैं। वे म्यूचुअल फंड्स की इक्विटी स्कीम में निवेश करना सुरक्षित मानते हैं। अगर आप म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम या सीधे शेयरों में पैसे लगाते हैं तो प्रॉफिट बुक करने से पहले आपको टैक्स के नियमों को जरूर जान लेना चाहिए।
टैक्स की वजह से एसेट से रिटर्न घट जाता है
एक्सपर्ट्स का कहना है कि टैक्स की वजह से किसी एसेट से रियल रिटर्न घट जाता है। यह बात म्यूचुअल फंड्स की यूनिट और शेयरों पर भी लागू होती है। इसलिए इनवेस्टर्स को म्यूचुअल फंड्स की यूनिट्स या शेयर बेचने से पहले मुनाफे पर लगने वाले टैक्स के नियमों को ठीक तरह से समझ लेना चाहिए। कई बार इनवेस्टर्स टैक्स के नियमों को जाने बगैर शेयर और म्यूचुअल फंड्स बेच देते हैं, जिससे उनका रियल रिटर्न घट जाता है।
सिक्योरिटी रखने के समय से तय होता है टैक्स
शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों के शेयर या म्यूचुअल फंड्स की इक्विटी स्कीम की यूनिट्स बेचने पर मुनाफे के अमाउंट पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस (STCG) टैक्स लगता है या लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (LTCG) टैक्स लगता है। अगर कोई इनवेस्टर्स किसी कंपनी के शेयर को खरीदने के 12 महीने के अंदर बेच देता है तो प्रॉफिट पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस टैक्स लगता है। अगर वह इन्हें 12 महीने के बाद बेचता है तो मुनाफे पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस लगता है। यह नियम म्यूचुअल फंड्स की इक्विटी स्कीम पर भी लागू होती है।
12 महीने से पहले बेचने पर 20 फीसदी टैक्स
शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस टैक्स का रेट 20 फीसदी है। इसे एक उदाहरण से आसानी से समझ सकते हैं। मान लीजिए आप किसी कंपनी के शेयर को 12 महीने से पहले बेच देते हैं, जिससे आपको 1000 रुपये प्रॉफिट होता है। इस पर आपको 20 फीसदी के रेट से शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस टैक्स चुकाना होगा। इस तरह आपको 1000 रुपये के प्रॉपिट पर 200 रुपये टैक्स देना होगा। इससे आपका रियल प्रॉफिट घटकर 800 रुपये रह जाएगा।
12 महीनों के बाद बेचने पर 12.5 फीसदी टैक्स
लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स का रेट 12.5 फीसदी है। मान लीजिए आपको किसी कंपनी का शेयर बेचने पर 1000 रुपये प्रॉफिट होता है। आपने इन शेयरों को खरीदने के 2 साल बाद बेचा है। आपको 1000 रुपये के प्रॉफिट पर 12.5 फीसदी टैक्स चुकाना होगा। इसका मतलब है कि आपको 1000 रुपये के प्रॉफिट पर 125 रुपये टैक्स चुकाना होगा। इससे आपका रियल रिटर्न घटकर 875 रुपये रह जाएगा। म्यूचुअल फंड्स की इक्विटी स्कीम की यूनिट्स को बेचने पर भी यही नियम लाग होता है।
1.25 लाख तक का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स-फ्री
एक खास बात यह समझ लेना जरूरी है कि एक वित्त वर्ष में 1.25 लाख रुपये के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस को टैक्स से छूट मिलती है। इसका मतलब है कि अगर एक वित्त वर्ष में शेयर या इक्विटी म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम की यूनिट्स बेचने पर आपको 1.25 लाख रुपये तक प्रॉफिट होता है तो आपको कोई लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स नहीं चुकाना होगा।