बाजार में गिरावट से एसेट एलोकेशन नहीं करने वाले इनवेस्टर्स को तगड़ी चोट, जानिए पूरा मामला

बाजार की गिरावट ने उन लोगों को बड़ी चोट पहुंचाई है, जो अपना ज्यादातर पैसा शेयरों या म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में निवेश कर रहे थे। अब उन्हें एसेट एसेट ऐलोकेशन का मतलब समझ में आ रहा है। इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स हमेशा निवेशकों को एसेट ऐलोकशन का खास ख्याल रखने की सलाह देते हैं

अपडेटेड Sep 29, 2026 पर 5:39 PM
  • Follow Us On Google
  • Add as a Preferred Source on Google
इनवेस्टर रिस्क लेने की अपनी क्षमता के हिसाब से निवेश में संतुलन बना सकता है।

शेयर बाजारों में गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही। 29 सितंबर को भी बाजार के प्रमुख सूचकांक गिरकर बंद हुए। इससे लंबी अवधि के लिए शेयरों में निवेश करने वाले लोग चिंतित हैं। खासकर ऐसे लोग ज्यादा चिंतित हैं, जिन्हें अभी पैसे की जरूरत है। अगर अभी वे शेयर या म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम से पैसे निकालते हैं तो उन्हें बड़ा नुकसान उठाना होगा।

पूरा पैसा शेयरों में निवेश करना ठीक नहीं

एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाजार की गिरावट ने उन लोगों को बड़ी चोट पहुंचाई है, जो अपना ज्यादातर पैसा शेयरों या म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में निवेश कर रहे थे। अब उन्हें एसेट एसेट ऐलोकेशन का मतलब समझ में आ रहा है। इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स हमेशा निवेशकों को एसेट ऐलोकशन का खास ख्याल रखने की सलाह देते हैं। यह बाजार में ज्यादा गिरावट की स्थिति में इनवेस्टर के पोर्टफोलियो को सुरक्षा देता है।


पोर्टफोलियो में डेट और गोल्ड भी होने चाहिए

प्रूडेंट इनवेस्टमेंट मैनेजर्स के सीईओ प्रशांत सेठ ने कहा, "इनवेस्टर्स को करीब 65-75 फीसदी पैसा शेयरों में रखना चाहिए। 15-25 फीसदी पैसा डेट में रखा जा सकता है। 5-10 फीसदी गोल्ड में रखा जा सकता है।" उन्होंने कहा कि हालांकि यह इनवेस्टर के रिस्क लेने की कपैसिटी और इनवेस्टमेंट के गोल पर निर्भर करता है। इसका मतलब है कि अगर किसी को एक लाख रुपये का निवेश करना है तो वह 65-75 हजार शेयरों में लगा सकता है। 15-25 फीसदी डेट में लगा सकता है। बाकी गोल्ड में।

शेयरों में ज्यादा निवेश करने में खराबी नहीं 

शेयर बाजार की स्थिति बीते दो साल से डांवाडोल बनी हुई है। इस दौरान बाजार ने निवेशकों को निराश किया है। लेकिन, यह सिर्फ दो साल की बात है। लंबी अवधि में मार्केट का रिटर्न दूसरे एसेट क्लास से ज्यादा रहता है। इसलिए पोर्टफोलियो का बड़ा हिस्सा शेयरों में निवेश करने में कोई खराबी नहीं है। लेकिन, शेयरों में 100 फीसदी निवेश ठीक नहीं है। इसका मतलब है कि आपको अपना पूरा पैसा सिर्फ शेयरों या म्चूअल फंड की इक्विटी स्कीम में नहीं लगाना चाहिए।

लार्जकैप शेयरों में ज्यादा निवेश सुरक्षित

सेठ ने कहा कि इनवेस्टर 60-70 फीसदी लार्जकैप शेयरों में निवेश कर सकता है। बाकी मिडकैप और स्मॉलकैप में निवेश किया जाल सकता है। लार्जकैप शेयरों में ज्यादा निवेश से पोर्टफोलियो को सुरक्षा मिलती है। स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों के मुकाबले लार्जकैप शेयरों पर गिरावट का असर कम पड़ता है। इनवेस्टर रिस्क लेने की अपनी क्षमता के हिसाब से निवेश में संतुलन बना सकता है।

यह भी पढ़ें: Share Buyback: लॉजिस्टिक्स कंपनी ₹150 करोड़ का शेयर बायबैक करेगी, ₹960 का भाव तय किया

आगे पैसे की जरूरत पड़ने वाली है तो डेट में करें निवेश

सेठ ने कहा कि अगर किसी इनवेस्टर को अगले अगले कुछ सालों के बाद पैसे की जरूरत पड़ने वाली है तो उसे ज्यादा पैसा मार्केट से जुड़े ऑप्शंस में निवेश नहीं करना चाहिए। वह डेट में अपना निवेश बढ़ा सकता है। इससे पैसे की जरूरत पड़ने पर उसे कम भाव पर अपने शेयर बेचने को मजबूर नहीं होना पड़ेगा। जहां तक गोल्ड की बात है तो यह पोर्टफोलियो के डायवर्सिफिकेशन के लिए जरूरी है। गोल्ड को दुनिया में निवेश का सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।

हिंदी में शेयर बाजार,  स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।