मार्केट में जब उतारचढ़ाव हो तो एकमुश्त निवेश करने से नुकसान हो सकता है। इसकी जगह आप सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह निवेश का ऐसा तरीका है, जो मार्केट में आपको धीरे-धीरे पैसे डालने की सुविधा देता है। इसके रिस्क घट जाता है और रिटर्न बढ़ जाता है। ऐक्सपर्ट्स यही वजह है कि मार्केट में वोलैटिलिटी बढ़ने पर एकमुश्त निवेश की सलाह नहीं देते हैं। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
क्या है सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान?
सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) ऐसी स्ट्रेटेजी है, जिसमें रेगुलर इंटरवल पर एक फिक्सड अमाउंट एक म्यूचुअल फंड से दूसरे म्यूचुअल फंड में ट्रांसफर किया जाता है। सबसे पहले कम रिस्क वाले किसी म्यूचुअल फंड में एकमुश्त पैसा डाल दिया जाता है। आम तौर पर यह लिक्विड या डेट फंड होता है। उसके बाद इस फंड से पैसा सिस्टमैटिक तरीके से इक्विटी या हाइब्रिड फंड में ट्रांसफर किया जाता है। इसलिए इस स्ट्रेटेजी को सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान कहा जाता है।
एसटीपी का पहला फायदा यह है कि इसमें निवेश अलग-अलग समय पर होता है, जिससे रिस्क घट जाता है। औसत पर्चेज प्राइस कम रहता है। दूसरा, इस्तेमाल नहीं किया गया पैसा डेट या लिक्विड फंड में पड़ा रहता है, जिस पर रिटर्न मिलता है। इससे कुल रिटर्न बढ़ जाता है। तीसरा फायदा यह है कि इनवेस्टमेंट में अनुशासन बना रहता है।
क्या है एसटीपी का प्रोसेस?
एसटीपी का इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले आपको सही सोर्स फंड का चुनाव करना होगा। यह एक लिक्विड या डेट फंड हो सकता है। इस फंड में एकमुश्त पैसा डालना होगा। इस फंड में रखे पैसे पर स्टेबल रिटर्न मिलता है। इसमें रिस्क भी नहीं के बराबर होता है। दूसरा, आपको लंबी अवधि में निवेश के लिए किसी इक्विटी या हाइब्रिड फंड का चुनाव करना होगा। इसे टारगेट फंड कहा जाता है। टारगेट फंड का चुनाव करने में आपको अपने फाइनेंशियल गोल का ध्यान रखना होगा। यह फंड आपके रिस्क लेने की क्षमता के मुताबिक होना चाहिए।
इनवेस्टमेंट की फ्रीक्वेंसी क्या होगी?
आप सोर्स फंड से टारगेट फंड में पैसे का ट्रांसफर वीकली, हफ्ते में दो बार या महीने में एक बार कर सकते हैं। ज्यादातर इनवेस्टर्स मंथली ट्रांसफर विकल्प का इस्तेमाल करते हैं। इसके बाद यह तय करना होगा कि आप कितना पैसा वीकली या मंथली ट्रांसफर करना चाहते हैं। अगर आपको 1.20 लाख रुपये ट्रांसफर करना है तो आप हर महीने 10,000 रुपये ट्रांसफर कर सकते हैं।
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उतारचढ़ाव वाले बाजार में क्यों फायदेमंद?
ये बातें तय हो जाने पर आपको अपने म्यूचुअल फंड हाउस को एसटीपी अप्लिकेशमन सब्मिट करना होगा। इसमें आपको सोर्स फंड, टारगेट फंड, ट्रांसफर अमाउंट और फ्रीक्वेंसी के बारे में बताना होगा। इसके बाद आपको अपने एसटीपी के प्रदर्शन और टारगेट फंड के रिटर्न को ट्रैक करते रहना होगा। एसटीपी का तरीका मार्केट में उतारचढ़ाव के दौरान काफी फायदेमंद साबित होता है।