रिटायरमेंट आराम करने और अपने जीवन भर के सपनों को पूरा करने का समय है। हालांकि, रिटायरमेंट के बाद ज्यादा मेडिकल बिल आपकी लाइफ को काफी परेशान कर सकता है। रिटायरमेंट के बाद कंपनी इंश्योरेंस नहीं मिलता। स्वयं मेडिकल इंश्योरेंस लेना होता है, जो 60 साल से अधिक उम्र के व्यक्ति के लिए लेना काफी महंगा होता है। साथ ही OPD, एक्सरे, ब्लड टेस्ट, मेडिकल टेस्ट आपके खर्चों को बढ़ा देता है, जिसके लिए आप क्लेम भी नहीं कर पाते। सबसे बड़ा फैक्टर होता है बढ़ती महंगाई, जो मेडिकल बिल पर सबसे ज्यादा असर डालती है। हमेशा ये याद रखें कि हेल्थ केयर सर्विस कुछ ही सालों में बहुत तेजी से बढ़ जाती है। सही तरीके से प्लान और बजट बनाकरअपने इस खर्च को कम कर सकते हैं। वरना आपकी गाढ़ी कमाई और सेविंग मेडिकल बिल्स में ही निकल जाएगी।
रिटायरमेंट के दौरान नियमित हेल्थ चेकअप या डॉक्टर विजिट काफी महंगे हो जाते हैं। साथ ही मेडिकल टेस्ट दवाईंयों की कीमतें दोनों पर महंगाई का असर सबसे पहले होता है। रेगुलर चेकअप जैसे एक्सरे, ब्लड टेस्, MRI आपके OPD के खर्चों को बढ़ा देती है। इसमें आपका काफी पैसा इसमें जाता है। इसके अलावा डेंटल केयर, विजन केयर जैसे कई खर्च आपके हेल्थ इंश्योरेंस में भी कवर नहीं होते। इसके लिए पहले से प्लान करना होगा। ताकि, बाद में परेशानी न हो।
रिटायरमेंट के बाद होने वाले OPD खर्चों के लिए पहले से बनाए प्लान
अपने रिटायरमेंट के बाद पैसों को लेकर एक ऐसा बजट बनाना है जिसमें ओपीडी खर्च शामिल हों। ये ध्यान रखें कि इन खर्चों के लिए पैसा आवंटित करें। रिटामेंट के बाद यही बजट आपके ओपीडी खर्चों को पूरा करने में मदद करेगा।
हेल्थ केयर खर्चों के लिए बजट नहीं बनाने से आपकी रिटायरमेंट सेविंग का बड़ा हिस्सा इसमें जा सकता है। हेल्थ पर महंगाई का जितना असर पड़ेगा आपका खर्च उतना ज्यादा होगा और आपकी सेविंग उतनी जल्दी ही खत्म होगी। आप अपने लिए हेल्थ सेविंग अकाउंट खोल सकते हैं। ये आपके लिए एक वैल्युअबल ऑप्शन होगा जिससे आप ओपीडी के खर्चों को पूरा कर पाएंगे। हेल्थ मेंटेनेंस ऑर्गनाइजेशन आपको ओपीडी कवरेज भी देती है।
ओपीडी खर्चों को कवर करने वाला लें हेल्थ प्लान
हेल्थ प्लान लेते हुए ऐसा प्लान लें जिसमें ओपीडी खर्च शामिल हों। इसमें डॉक्टर के पास जाना, डायग्नोस्टिक टेस्ट और दवाएं शामिल होनी चाहिए, क्योंकि ये रिटायरमेंट के बाद हेल्थ को बनाए रखने में अहम होती हैं। डेंटल और आंखों के लिए अलग कवरेज लें क्योंकि इसमें बाद में काफी पैसा जाता है। रिटायरमेंट के बाद हेल्थ और हेल्थ खर्चों को लेकर ठीक से प्लान करना जरूरी है।