मिस हो गई ITR की डेडलाइन? मत होइए परेशान, इस एक तरकीब से अब भी वापस मिल जाएगा आपका टीडीएस रिफंड!
Missed ITR Deadline TDS Refund Claim Process: आईटीआर की डेडलाइन मिस होने के बाद कई लोग अपडेटेड आईटीआर भरने की सोचते हैं, लेकिन नियम के मुताबिक टैक्स रिफंड क्लेम करने के लिए अपडेटेड आईटीआर दाखिल नहीं किया जा सकता। लेकिन एक नियम है जिससे आपका कटा हुआ TDS वापस मिल सकता है
जानिए क्या आईटीआर विंडो बंद होने के बाद भी टीडीएस रिफंड क्लेम किया जा सकता है?
ITR Deadline Missed: क्या आपने किसी वित्तीय वर्ष के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की डेडलाइन मिस कर दी है? अगर हां, तो सबसे पहला डर यही सताता है कि जो टैक्स एडवांस में कट चुका है (TDS), क्या वह पैसा अब हमेशा के लिए डूब गया? टैक्सपेयर्स के बीच अक्सर यह उलझन रहती है कि क्या आईटीआर विंडो बंद होने के बाद भी टीडीएस रिफंड क्लेम किया जा सकता है।
जवाब है- हां, आप अभी भी अपना रिफंड पा सकते हैं, लेकिन इसके लिए आपको सही कानूनी रास्ता चुनना होगा। बहुत से लोग सोचते हैं कि अपडेटेड आईटीआर भरकर रिफंड ले लेंगे, लेकिन टैक्स नियम इसके बिल्कुल उलट हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि डेडलाइन चूकने के बाद टीडीएस रिफंड वापस पाने का असली और कानूनी तरीका क्या है।
अक्सर टैक्सपेयर्स को सलाह मिलती है कि वे इनकम टैक्स एक्ट की धारा 139(8A) के तहत 'अपडेटेड आईटीआर' फाइल कर दें। नियम के मुताबिक, आप पिछले चार असेसमेंट ईयर के लिए यू-आईटीआर भर सकते हैं। लेकिन, इसमें एक बहुत बड़ी शर्त जुड़ी हुई है- आप अपडेटेड आईटीआर तब दाखिल नहीं कर सकते जब आपको कोई टैक्स रिफंड क्लेम करना हो या आपके ऊपर टैक्स की देनदारी शून्य से कम हो रही हो। चूंकि आप अपना टीडीएस रिफंड वापस मांग रहे हैं, इसलिए आप कानूनी रूप से अपडेटेड आईटीआरभरने के हकदार नहीं हैं।
इसके अलावा, आप किसी बीते हुए साल का टीडीएस रिफंड अगले नए फाइनेंशियल ईयर के आईटीआर में भी क्लेम नहीं कर सकते हैं। हर साल के टीडीएस का हिसाब उसी साल के रिटर्न में देना जरूरी होता है।
ये है डूबा हुआ टीडीएस वापस पाने का कानूनी तरीका
अगर रेगुलर आईटीआर की तारीख निकल चुकी है और अपडेटेड आईटीआर से रिफंड मिल नहीं सकता, तो फिर रास्ता क्या है? यहीं पर काम आती है इनकम टैक्स एक्ट की धारा 119(2)(b)।
यह धारा सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस को यह विशेष पॉवर देती है कि वह उन करदाताओं को राहत दे सके जो किसी वाजिब वजह से समय पर अपना रिटर्न नहीं भर पाए थे। इसके तहत, सीबीडीटी ने 1 अक्टूबर 2024 को एक नया सर्कुलर जारी किया है। इस सर्कुलर के मुताबिक, अगर कोई जेनयून मामला है, तो टैक्सपेयर 'कॉन्डोनशेन ऑफ डिले' यानी देरी के लिए माफी की अर्जी लगा सकता है।
माफी की अर्जी मंजूर होने की शर्तें:
अगर आप इस विशेष प्रावधान के तहत अपना छूटा हुआ टीडीएस रिफंड पाना चाहते हैं, तो आपकी अर्जी में इन बातों का होना जरूरी है:
ठोस और वाजिब कारण: आपको इनकम टैक्स विभाग को यह साबित करना होगा कि आप किसी अपरिहार्य परिस्थितियों या गंभीर कारण जैसे- बीमारी या कोई अन्य बड़ा संकट की वजह से समय पर आईटीआर नहीं भर सके।
वास्तविक कठिनाई: आपको यह दिखाना होगा कि अगर विभाग आपको रिफंड क्लेम करने की इजाजत नहीं देता है, तो आपको बड़ा वित्तीय नुकसान या वास्तविक कठिनाई का सामना करना पड़ेगा।
स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस: कैसे मिलेगा पैसा वापस?
अर्जी दाखिल करें: सबसे पहले आपको धारा 119(2)(b) के तहत संबंधित टैक्स अथॉरिटी या सीबीडीटी के पास देरी के लिए माफी की ऑनलाइन या ऑफलाइन एप्लीकेशन देनी होगी।
आदेश का इंतजार करें: टैक्स अधिकारी आपके कारणों की समीक्षा करेंगे। अगर वे संतुष्ट होते हैं, तो देरी को माफ करने का एक आधिकारिक आदेश जारी करेंगे।
आईटीआर फाइल करें: एक बार जब आपको माफी का आदेश मिल जाता है, तो आप इनकम टैक्स पोर्टल पर जाकर उस आदेश का रेफरेंस नंबर दर्ज करके अपना पेंडिंग आईटीआर ऑनलाइन दाखिल कर सकते हैं। इसके बाद आपका टीडीएस रिफंड प्रोसेस कर दिया जाएगा।
इसलिए, अगर आपका भी टीडीएस कटा हुआ है और आईटीआर की तारीख निकल चुकी है, तो घबराएं नहीं। अपडेटेड आईटीआर के चक्कर में पड़ने के बजाय किसी एक्सपर्ट की मदद से धारा 119(2)(b) के तहत माफी की अर्जी दाखिल करें और अपना पैसा वापस पाएं।
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