बैंक खाते से गायब हो जाएं पैसे तो क्या करें? जानिए RBI के नियम और रिफंड क्लेम करने का पूरा प्रोसेस
Money Stolen From Bank Account: ग्रेटर नोएडा में PNB शाखा से ग्राहकों के एफडी और खातों से करोड़ों गायब होने की खबर ने सभी को चौंका दिया है। अगर आपके अकाउंट से भी धोखाधड़ी होती है, तो घबराएं नहीं। RBI के नियमों के अनुसार 3 दिनों के भीतर सूचना देने पर ग्राहक की 'जीरो लायबिलिटी' होती है। जानिए रिफंड क्लेम करने का सही तरीका। आपका पैसा कब तक और कैसे मिलता है
अगर आपके अकाउंट से भी धोखाधड़ी होती है, तो घबराएं नहीं
Banking Fraud Alert & RBI Guidelines: डिजिटल बैंकिंग के दौर में बैंक खातों से अनधिकृत निकासी या फ्रॉड के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। हाल ही में ग्रेटर नोएडा में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की एक शाखा से ग्राहकों के खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से बिना किसी जानकारी या मैसेज अलर्ट के करोड़ों रुपये गायब होने का बड़ा मामला सामने आया है।
अगर आपके बैंक अकाउंट से भी आपकी सहमति के बिना पैसे कट जाते हैं या धोखाधड़ी होती है, तो घबराने की जगह तुरंत सही कदम उठाना बेहद जरूरी है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशानिर्देशों के तहत ग्राहकों को ऐसे मामलों में सुरक्षा और रिफंड की पूरी गारंटी मिलती है। जानिए आपको तुरंत क्या करना चाहिए।
खाते से पैसे चोरी होने पर सबसे पहले क्या करें?
1. तुरंत बैंक को सूचित करें: अपने बैंक के आधिकारिक कस्टमर केयर नंबर, मोबाइल ऐप या वेबसाइट के जरिए तुरंत फ्रॉड की शिकायत दर्ज कराएं। बैंक से खाता तुरंत फ्रीज या डेबिट ब्लॉक करने को कहें ताकि और पैसे न कटें।
2. शिकायत Reference Number संभाल कर रखें: बैंक में शिकायत दर्ज करने के बाद शिकायत नंबर, ट्रांजेक्शन का SMS/ईमेल अलर्ट, बैंक स्टेटमेंट और स्क्रीनशॉट का रिकॉर्ड अपने पास सबूत के तौर पर सुरक्षित रखें।
3. 1930 साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें: वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की रिपोर्ट तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दें या cybercrime.gov.in पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। अगर 1930 पर कॉल कनेक्ट न हो, तो बिना समय गंवाए पहले बैंक को सूचित करें।
नुकसान कौन उठाएगा? जानिए RBI का रिफंड नियम
RBI के नियमों के अनुसार, धोखाधड़ी में ग्राहक की जिम्मेदारी इस बात पर निर्भर करती है कि शिकायत कितनी जल्दी दर्ज कराई गई है:
शून्य जिम्मेदारी: अगर फ्रॉड बैंक की लापरवाही या सिस्टम की कमी (जैसे- PNB के हालिया मामले में बैंक की आंतरिक विफलता/गड़बड़ी) के कारण हुआ है, तो ग्राहक की कोई गलती नहीं मानी जाएगी, चाहे शिकायत कभी भी दर्ज हो।
अगर किसी थर्ड-पार्टी ब्रीच के कारण फ्रॉड हुआ है (जिसमें न बैंक की गलती है न ग्राहक की) और ग्राहक अलर्ट मिलने के 3 कार्य दिवसों के भीतर बैंक को सूचित कर देता है, तो ग्राहक पर 0% की देनदारी होगी। पूरा पैसा बैंक को लौटाना होगा।
सीमित जिम्मेदारी: अगर ग्राहक 4 से 7 कार्य दिवसों के भीतर शिकायत करता है, तो ग्राहक की अधिकतम देनदारी केवल ₹5,000 से ₹25,000 (खाते के प्रकार के आधार पर) या फ्रॉड की रकम (जो भी कम हो) तक सीमित होगी।
OTP या PIN शेयर करने पर: अगर नुकसान ग्राहक की लापरवाही (जैसे- OTP, PIN या पासवर्ड किसी से शेयर करने) की वजह से हुआ है, तो शिकायत दर्ज कराने तक का पूरा नुकसान ग्राहक को ही उठाना होगा। वैसे शिकायत दर्ज कराने के बाद होने वाले किसी भी अतिरिक्त नुकसान की भरपाई बैंक करेगा।
7 कार्य दिवसों के बाद रिपोर्टिंग: ऐसी स्थिति में ग्राहक की देनदारी बैंक की बोर्ड-अनुमोदित पॉलिसी के अनुसार तय की जाती है।
बैंक को कितने दिनों में रिफंड करना होगा?
10 दिनों में प्रोविजनल क्रेडिट: RBI के नियमों के अनुसार, जीरो या लिमिटेड लायबिलिटी वाले मामलों में बैंक को शिकायत मिलने के 10 कार्य दिवसों के भीतर ग्राहक के खाते में प्रोविजनल क्रेडिट देना अनिवार्य है। यह क्रेडिट उसी तारीख से लागू माना जाएगा जिस दिन पैसे कटे थे।
90 दिनों में अंतिम निपटारा: बैंक को अपनी जांच पूरी करके शिकायत का अंतिम निपटारा अधिकतम 90 दिनों के भीतर करना होता है। अगर बैंक 90 दिनों के भीतर मामला हल नहीं कर पाता, तो उसे पूरा मुआवजा देना होगा।
ब्याज का नुकसान नहीं होगा: सेविंग्स या डेबिट कार्ड खातों में फ्रॉड होने पर बैंक को यह सुनिश्चित करना होगा कि ग्राहक को ब्याज का कोई नुकसान न हो।