आप डायरेक्ट प्लान में निवेश करते हैं या रेगुलर प्लान में? जानिए किसमें है आपको फायदा

म्यूचुअल फंड की करीब हर स्कीम में डायरेक्ट और रेगुलर प्लान होते हैं। दोनों प्लान एक ही स्कीम में निवेश करते हैं। सिर्फ निवेश का तरीके में फर्क होता है। निवेशक जब बगैर किसी म्यूचुअल फंड डिस्ट्रिब्यूटर खुद स्कीम में निवेश करता है तो वह डायरेक्ट प्लान का इस्तेमाल करता है

अपडेटेड Aug 25, 2026 पर 8:03 PM
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डायरेक्ट प्लान का एक्सपेंस रेशियो कम होता है। इसकी वजह यह है कि इसमें डिस्ट्रिब्यूटर कमीशन शामिल नहीं होता है।

आप म्यूचुअल फंड के डायरेक्ट प्लान में इनवेस्ट करते हैं या रेगुलर प्लान में? शुरुआत में निवेश के दोनों तरीके एक जैसे लगते हैं, लेकिन लंबी अवधि में दोनों के रिटर्न में फर्क आता है। डायरेक्ट प्लान का रिटर्न रेगुलर प्लान के रिटर्न से थोड़ा ज्यादा होता है। यही वजह है कि डायरेक्ट प्लान में निवेश में लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है। क्रिसिल इंटेलिजेंस ने एंफी के डेटा का विश्लेषण किया है। इससे पता चलता है कि डायरेक्ट प्लान में इनवेस्टर्स की दिलचस्पी बढ़ रही है।

डायरेक्ट प्लान में बढ़ रही निवेशकों की दिलचस्पी

क्रिसिल इंटेलिजेंस ने पाया है कि रिटेल इनवेस्टर्स के म्यूचुअल फंड्स एसेट्स में डायरेक्ट प्लान की हिस्सेदारी बढ़ी है। यह मार्च 2021 में 21.4 फीसदी थी, जो मार्च 2026 में बढ़कर 36.7 फीसदी हो गई। इसका मतलब है कि पांच साल पहले रिटेल म्यूचुअल फंड में होने वाले 5 रुपये के निवेश में से एक से थोड़े ज्यादा का निवेश डायरेक्ट प्लान के जरिए होता था। आज हर तीन में से एक निवेश डायरेक्ट प्लान के जरिए हो रहा है।


हर स्कीम में होता है डायरेक्ट और रेगुलर प्लान का विकल्प

म्यूचुअल फंड की करीब हर स्कीम में डायरेक्ट और रेगुलर प्लान होते हैं। दोनों प्लान एक ही स्कीम में निवेश करते हैं। सिर्फ निवेश का तरीके में फर्क होता है। निवेशक जब बगैर किसी म्यूचुअल फंड डिस्ट्रिब्यूटर खुद स्कीम में निवेश करता है तो वह डायरेक्ट प्लान का इस्तेमाल करता है। अगर वह किसी डिस्ट्रिब्यूटर के जरिए निवेश करता है तो वह रेगुलर प्लान के जरिए निवेश करता है।

डायरेक्ट प्लान का एक्सपेंस रेशियो अपेक्षाकृत कम होता है

दोनों प्लान के बीच सबसे बड़ा फर्क कॉस्ट का है। डायरेक्ट प्लान का एक्सपेंस रेशियो कम होता है। इसकी वजह यह है कि इसमें डिस्ट्रिब्यूटर कमीशन शामिल नहीं होता है। रेगुलर प्लान का एक्सपेंस रेशियो ज्यादा होता है, क्योंकि इसमें डिस्ट्रिब्यूटर का कमीशन शामिल होता है। इस वजह से एक ही स्कीम के डायरेक्ट और रेगुलर प्लान की नेट एसेट वैल्यू (NAV) में अंतर दिखता है।

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कुल एसेट्स में बढ़ रही डायरेक्ट प्लान की हिस्सेदारी 

मार्च 2026 में डायरेक्ट-प्लान का एयूएम 33.28 लाख करोड़ रुपये था। यह इंडस्ट्री के कुल एसेट का 45.1 फीसदी है। यह मार्च 2021 में 43.4 फीसदी था। उधर, कुल एसेट्स में रेगुलर प्लान की हिस्सेदारी घटी है। यह इस दौरान 56.6 फीसदी से घटकर 54.9 फीसदी पर आ गई है। हालांकि, अभी भी यह निवेश का ज्यादा इस्तेमाल होने वाला तरीका है। इस तरीके से होने वाले निवेश का एयूएम 40.46 लाख करोड़ रुपये है।

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