Thematic Funds: क्या होते हैं थीमैटिक म्यूचुअल फंड्स और किसके लिए हैं सही? जानिए जोखिम, रिटर्न और सही स्ट्रैटेजी

Thematic Mutual Funds: म्यूचुअल फंड्स में ज्यादा रिटर्न के चक्कर में क्या आप भी थीमैटिक फंड्स में दांव लगाने की सोच रहे हैं? डिफेंस और कंजप्शन जैसी थीम्स में बंपर कमाई के बीच फाइनेंशियल प्लानर्स इसे नए निवेशकों के लिए जोखिम भरा भी मान रहे हैं! जानिए थीमैटिक फंड्स क्या होते हैं, इनमें कब एंट्री-एग्जिट करना सही रहता है

अपडेटेड Aug 17, 2026 पर 9:43 AM
थीमैटिक फंड्स उन कंपनियों में पैसा लगाते हैं, जो किसी खास लॉन्ग-टर्म ट्रेंड का फायदा उठाने की स्थिति में होती हैं

What Are Thematic Mutual Funds: म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो में ज्यादा रिटर्न हासिल करने के लिए निवेशक इन दिनों थीमैटिक फंड्स पर काफी दांव लगा रहे हैं। हाल के दिनों में डिफेंस और कैपिटल मार्केट्स जैसी थीम में मिले शानदार रिटर्न के बाद इन फंड्स की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। लेकिन क्या यह फंड हर निवेशक के लिए सही हैं? आइए आसान भाषा में समझते हैं थीमैटिक म्यूचुअल फंड्स का पूरा गणित।

क्या होते हैं थीमैटिक फंड्स?

थीमैटिक फंड्स वे म्यूचुअल फंड्स या ईटीएफ (ETFs) होते हैं, जो अपने कुल एसेट्स का कम से कम 80% हिस्सा किसी खास 'थीम' से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में निवेश करते हैं। यह उन कंपनियों में पैसा लगाते हैं, जो किसी खास लॉन्ग-टर्म ट्रेंड का फायदा उठाने की स्थिति में होती हैं। जैसे- एक इंफ्रास्ट्रक्चर फंड देश भर में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट से जुड़े अलग-अलग सेक्टर्स के शेयरों में निवेश करेगा। ये फंड्स एक्टिव या पैसिव दोनों तरह के हो सकते हैं।


देश में कुछ खास लोकप्रिय थीम्स ये है- डिफेंस, कैपिटल मार्केट्स, कंजप्शन, टूरिज्म, एनर्जी, डिजिटल, पीएसयू (PSUs) और मैन्युफैक्चरिंग।

थीमैटिक फंड्स में क्यों होता है ज्यादा जोखिम?

लार्ज-कैप, फ्लेक्सी-कैप या मल्टी-कैप फंड्स की तरह थीमैटिक फंड्स पूरी तरह से डाइवर्सिफाइड नहीं होते। ये चुनिंदा शेयरों में ही पैसा लगाते हैं, जिससे इनमें कंसंट्रेशन रिस्क ज्यादा होता है।

हालांकि, थीमैटिक फंड्स सीधे सेक्टोरल फंड्स (जैसे- केवल IT या Pharma फंड) के मुकाबले थोड़े अधिक डाइवर्सिफाइड होते हैं, इसलिए सेक्टोरल फंड्स से इनका जोखिम थोड़ा कम होता है।

अगर आप ऐसे समय में निवेश करते हैं जब आर्थिक स्थितियां उस थीम के अनुकूल हों, तो ये फंड्स आपको बहुत बेहतरीन रिटर्न दे सकते हैं।

किसे करना चाहिए इनमें निवेश?

फाइनेंशियल प्लानर्स के मुताबिक, थीमैटिक फंड्स से ज्यादा रिटर्न कमाने के लिए 'एंट्री और एग्जिट की टाइमिंग' बहुत अहम होती है। जो निवेशक बाजार में एंट्री और एग्जिट की टाइमिंग को अच्छी तरह समझते हैं, उन्हें ही इसमें निवेश करना चाहिए। नए निवेशकों को थीमैटिक फंड्स से बचना चाहिए और डाइवर्सिफाइड इक्विटी म्यूचुअल फंड्स से शुरुआत करनी चाहिए।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि, जब आपका कोर पोर्टफोलियो तैयार हो जाए, तब आप जोखिम समझकर 1 या 2 थीमैटिक फंड्स को अपने 'सैटेलाइट पोर्टफोलियो' का हिस्सा बना सकते हैं।

थीमैटिक फंड्स में निवेश करने का सही तरीका क्या है?

इन फंड्स में डाइवर्सिफाइड फंड्स की तरह केवल 'बाय एंड होल्ड' यानी खरीद कर भूल जाने की रणनीति काम नहीं करती। इसके लिए एक नपी-तुली रणनीति जरूरी है:

स्टैगर्ड एप्रोच (SIP/STP): अगर आपको लगता है कि अगले एक साल में कोई खास इवेंट उस थीम को फायदा पहुंचाएगा, तो आप धीरे-धीरे किश्तों में निवेश कर सकते हैं।

एकमुश्त निवेश: अगर आपको लगता है कि वह थीम किसी भी समय परफॉर्म कर सकती है, तो आप वन-टाइम निवेश का विकल्प चुन सकते हैं।

डिप्स पर खरीदारी: निवेशक छोटा लंपसम निवेश कर सकते हैं या 3 से 6 महीने की अवधि में बाजार की गिरावट पर किश्तों में निवेश बढ़ा सकते हैं।

कुल मिलाकर थीमैटिक फंड्स आपके पोर्टफोलियो का रिटर्न बढ़ाने का एक बेहतरीन जरिया हो सकते हैं, लेकिन इनमें जोखिम भी उतना ही बड़ा होता है। इसलिए अपने पोर्टफोलियो का केवल एक सीमित हिस्सा ही इन फंड्स में लगाएं और थीम के ट्रैक से भटकते ही समय पर निकलने की समझ रखें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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