हर्षद मेहता या राकेश झुनझुनवाला नहीं, ये भारतीय है देश का पहला बिग बुल, किसी ऑफिस नहीं बरगद के पेड़ के नीचे शुरू की ट्रेडिंग

जब भी हम बाजार और शेयरों के बारे में बात करते हैं, तो हर्षद मेहता और राकेश झुनझुनवाला का नाम हमारे दिमाग में सबसे पहले आता है। ये दो व्यक्ति जो अब हमारे बीच नहीं हैं, बिग बुल के नाम से जाने जाते थे। हालांकि, इन दोनों के समय से भी पहले एक और प्रभावशाली व्यक्ति थे जिन्हें वास्तव में भारतीय शेयर बाजार का "पहला बिग बुल" कहा जा सकता है

अपडेटेड Jul 12, 2023 पर 6:41 PM
प्रेमचंद रॉयचंद जैन, भारत की फाइनेंशियल राजधानी मुंबई के शुरुआती कारोबारी दिग्गजों में से एक रहे हैं।

जब भी हम बाजार और शेयरों के बारे में बात करते हैं, तो हर्षद मेहता और राकेश झुनझुनवाला का नाम हमारे दिमाग में सबसे पहले आता है। ये दो व्यक्ति जो अब हमारे बीच नहीं हैं, बिग बुल के नाम से जाने जाते थे। हालांकि, इन दोनों के समय से भी पहले एक और प्रभावशाली व्यक्ति थे जिन्हें वास्तव में भारतीय शेयर बाजार का "पहला बिग बुल" कहा जा सकता है। यह व्यक्ति लगभग 150 साल पहले बॉम्बे यानी अब मुंबई में शेयर बाजार की शुरुआत करने के लिए जिम्मेदार हैं, ये थे प्रेमचंद रॉयचंद जैन।

कौन थे प्रेमचंद रायचंद जैन?

प्रेमचंद रॉयचंद जैन, भारत की फाइनेंशियल राजधानी मुंबई के शुरुआती कारोबारी दिग्गजों में से एक रहे हैं। प्रेमचंद राय जैन को बिग बुल, बुलियन किंग और कॉटन किंग जैसे कई नामों से जाना जाता था। जमशेदजी टाटा, डेविड सैसून और जमशेदजी जेजीभॉय के साथ, उन्हें बॉम्बे के चार प्रमुख कारोबारियों में से एक माना जाता था।


सूरत में जन्में थे देश के पहले बिग बुल

1832 में सूरत में जन्मे और लकड़ी व्यापारियों के परिवार से आने वाले रॉयचंद की सबसे अहम उपलब्धि नेटिव शेयर और स्टॉक ब्रोकर्स एसोसिएशन की स्थापना करना था। यही बाद में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के तौर पर डेवलप हुआ। जी हां, प्रेमचंद रॉयचंद जैन बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के फाउंडर रहे हैं। बीएसई की स्थापना 148 साल पहले 9 जुलाई 1875 को हुई थी। बीएसई एशिया का पहला स्टॉक एक्सचेंज था। जुलाई 2023 तक बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैपिटल 300 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।

बरगद के पेड़ के नीचे शुरू की ट्रेडिंग

जब स्टॉक ब्रोकर्स एसोसिएशन (बाद में जो बना बीएसई) की स्थापना हुई, तो लगभग 22 स्टॉक ब्रोकरों ने दक्षिण बॉम्बे में रॉयचंद के ऑफिस जो कि एक बरगद के पेड़ के नीचे अपनी ट्रेडिंग एक्टिविटी की शुरुआत की। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वह किसी भी खाते या अकाउंट्स के बगैर हर स्टॉक के सौदे को अपने दिमाग में रकते थे। उन्हें कभी भी पेन या पेपर की जरूरत नहीं पड़ी।

जोड़ ली थी इतनी संपत्ति

कुछ ही सालों में उन्होंने शेयर बाजार में जबरदस्त सफलता हासिल की। 1858 तक रॉयचंद ने लगभग 1 लाख रुपये की संपत्ति जोड़ ली थी। 1861 में अमेरिकी गृहयुद्ध के बाद कपास के कारोबा में बूम आया। इसका फायदा प्रेमचंद और उनके सहयोगियों को हुआ।

बचपन में आ गए थे मुंबई

बचपन में रॉयचंद सूरत से अपने परिवार के साथ बंबई चले आए और एलफिंस्टन कॉलेज में अपनी पढ़ाई की। 1852 में रॉयचंद ने एक स्टॉकब्रोकर के रूप में अपना करियर शुरू किया। वह मुंबई के बायकुला में एक बंगले में रहते थे, जिसे बाद में एक अनाथालय और स्कूल में बदल दिया गया। रॉयचंद का 1906 में निधन हो गया। आज उनके परिवार की चौथी पीढ़ी प्रेमचंद रॉयचंद एंड संस (PRS) की देखरेख करती है। ये कारोबार के मामले में एक छोटा कारोबार है लेकिन इनका इतिहास काफी समृद्ध है।

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