नोएडा की रामलीला बनी रोजगार और कारोबार का बड़ा जरिया, जानिए 10 दिनों में कैसे होता है करोड़ों का कारोबार

नोएडा की रामलीला सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हजारों लोगों को रोजगार देने और करोड़ों का कारोबार करने का बड़ा जरिया है।

अपडेटेड Oct 09, 2026 पर 9:02 AM
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नोएडा: नोएडा के मेले को सिर्फ धार्मिक मंच समझने की गलती न करें, इसकी पूरी तस्वीर जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे। नोएडा स्टेडियम में होने वाली ये 10 दिन की रामलीला असल में करोड़ों रुपये की इकोनॉमी है, जो हजारों हाथों को रोजगार देती है। आस्था के साथ-साथ ये नोएडा का सबसे बड़ा लोकल बिजनेस सीजन बन चुका है। आइए समझते हैं 40 लाख के मंच से करोड़ों के बाजार तक का पूरा गणित।

40 लाख का मंच, 1000 लोगों को काम

सनातन धर्म रामलीला समिति के महासचिव संजय बाली के मुताबिक, मुख्य रामलीला मंच के आयोजन पर ही 35 से 40 लाख रुपये खर्च होते हैं। लेकिन ये पैसा सीधे मार्केट में जाता है। मंच बनाने में 20-30 कारीगर, टेंट लगाने में 30-40 मजदूर, इसके अलावा साउंड-लाइट वाले, CCTV ऑपरेटर, सिक्योरिटी गार्ड, चाय-पानी वाले - मिलाकर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 1000 से ज्यादा लोगों को 10 दिन का पक्का रोजगार मिलता है।


कलाकार और राम बारात का बजट

इस बार समिति ने टीवी कलाकारों को बुलाया है, जिन पर ही 5 से 7 लाख रुपये का बजट है। राम बारात भी इकोनॉमी का बड़ा हिस्सा है। एक बारात में 10 से 12 बैंड बुक होते हैं। यानी एक ही रात में बैंड वालों की भी बंपर कमाई।

मेले की रौनक: 20 झूले और 300 दुकानें

रामलीला के साथ लगने वाला मेला इसकी इकोनॉमी को 3 गुना कर देता है। मेले के ठेकेदार शुभम के मुताबिक, मेले को बसाने में ही 35-40 लाख रुपये लगते हैं।

ऐसा बनाया गया बिजनेस मॉडल

1. झूला इकोनॉमी: करीब 20 बड़े-छोटे झूले लगते हैं। इन्हें चलाने के लिए 300 लोगों का स्टाफ लगता है। एक झूले का टिकट 50-100 रुपये है और रोजाना हजारों लोग झूला झूलते हैं।

2. फूड और फुटकर इकोनॉमी: मेले में 250-300 फूड और सामान के स्टॉल लगते हैं। स्टॉल का किराया 200 रुपये से लेकर 20,000 रुपये तक है। 10 दिन में हर स्टॉल वाला लाखों की बिक्री करता है।

3. स्टेडियम के बाहर की इकोनॉमी: स्टेडियम के बाहर सैकड़ों अस्थायी चाट, चाय, गुब्बारे, खिलौने वाले भी अपनी दुकान लगा लेते हैं, जिनका कोई हिसाब ही नहीं।

रोज 7000 दर्शक मतलब लोकल दुकानदारों की चांदी

आयोजकों के मुताबिक रोजाना 5 से 7 हजार लोग रामलीला देखने और 5-7 हजार लोग मेला घूमने आते हैं। यानी रोज 10-14 हजार की भीड़। इस भीड़ से नोएडा स्टेडियम के आसपास के ऑटो वाले, ई-रिक्शा वाले, चाय वाले, रेस्टोरेंट और छोटी दुकानों की बिक्री 3 गुना बढ़ जाती है। अंदाजा लगाया जा रहा है कि 10 दिन के इस आयोजन में मेले, झूले और फूड स्टॉल से ही 2 से 3 करोड़ रुपये का टर्नओवर होता है। 40 लाख लगाकर 3 करोड़ घुमाने वाली इकोनॉमी ही नोएडा की रामलीला की असली ताकत है। नोएडा से सुमित राजपूत की रिपोर्ट।

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