नॉर्थ इंडिया में समय से पहले रिटायरमेंट का क्रेज, पर 74% लोगों को इस बात का सता रहा डर!

Axis Max Life IRIS 6.0 Survey: उत्तर भारत में 74% लोग 50 साल से पहले जल्दी रिटायर होना चाहते हैं। लेकिन एक्सिस मैक्स लाइफ के IRIS 6.0 सर्वे के मुताबिक केवल 26% को ही ये भरोसा है कि उनकी बचत 10 साल टिक पाएगी। 81% लोगों को अकेलेपन का डर सता रहा है, वहीं फंड और सेहत को लेकर चिंताएं भी गहरी हो रही हैं

अपडेटेड Nov 02, 2026 पर 5:41 PM
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वैसे लोग जल्दी रिटायर होना चाहते हैं, लेकिन उनका फंड कितने दिन चलेगा इसे लेकर डर बढ़ गया है

Axis Max Life IRIS 6.0 Survey: उत्तर भारत के लोगों में कम उम्र में ही रिटायर होकर वित्तीय रूप से आजाद होने की इच्छा तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसके साथ ही भविष्य की वित्तीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं भी गहरी होती जा रही हैं। एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस द्वारा कांतार के साथ मिलकर जारी 'इंडिया रिटायरमेंट इंडेक्स स्टडी' (IRIS 6.0) के नॉर्थ जोन के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर भारत में रिटायरमेंट की चाहत तो परवान चढ़ रही है, लेकिन पुख्ता तैयारियों और फंड के लंबे समय तक टिकने को लेकर लोगों का भरोसा लगातार कम हो रहा है।

क्या कहते हैं आंकड़े? जल्दी रिटायरमेंट की चाहत बनाम फंड का संकट


50 से पहले आजादी की चाह: सर्वे के अनुसार, उत्तर भारत के 74% लोग पारंपरिक उम्र से पहले ही रिटायर होना चाहते हैं। इनमें से 49% लोग तो ऐसे हैं जो 50 साल की उम्र से पहले ही वित्तीय रूप से आजाद होकर रिटायर होना चाहते हैं।

भरोसे में भारी गिरावट: वैसे लोग जल्दी रिटायर होना चाहते हैं, लेकिन उनका फंड कितने दिन चलेगा इसे लेकर डर बढ़ गया है। केवल 26% लोगों को ही यह उम्मीद है कि उनकी बचत रिटायरमेंट के बाद 10 साल या उससे अधिक समय तक चल पाएगी। पिछले साल यह आंकड़ा 38% था।

स्कोर में पिछड़ रहा उत्तर भारत: उत्तर भारत का कुल आइरिस स्कोर गिरकर 47 पर आ गया है, जो देश के सभी जोन में सबसे कम है और राष्ट्रीय औसत (49) से भी नीचे है। हालांकि, क्षेत्र का फाइनेंशियल प्रिपेयर्डनेस स्कोर 48 से बढ़कर 50 जरूर हुआ है।

एक्सपर्ट का क्या है कहना?

इस रिपोर्ट पर बात करते हुए एक्सिस मैक्स लाइफ के चीफ बिजनेस ऑफिसर एवं हेड ऑफ रिटायरमेंट अनुराग गुप्ता ने कहा, 'भरोसा टॉक्स आइरिस 6.0 के नतीजे उत्तर भारत के रिटायरमेंट आउटलुक की एक महत्वपूर्ण तस्वीर पेश करते हैं। यह क्षेत्र वित्तीय, स्वास्थ्य और भावनात्मक तैयारियों के मामले में अब भी चुनौतियों का सामना कर रहा है। रिटायरमेंट फंड के लंबे समय तक चलने को लेकर भरोसे में आई कमी इस बात को और भी जरूरी बनाती है कि लोग समय रहते निवेश शुरू करें और दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा के लिए नियमित रूप से निवेश करते रहें।'

उन्होंने आगे कहा, 'रिटायरमेंट की तैयारी केवल फाइनेंस तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसमें शारीरिक स्वास्थ्य और मजबूत सोशल सपोर्ट सिस्टम भी शामिल होना चाहिए। रिटायरमेंट की योजना बनाने के लिए समग्र दृष्टिकोण को बढ़ावा देना जरूरी होगा, ताकि लोग अपने जीवन के बाद के वर्षों में अधिक स्वतंत्रता, सुरक्षा और मानसिक शांति हासिल कर सकें।'

सेहत और अकेलेपन का डर सबसे बड़ी चुनौती

सिर्फ पैसों की कमी ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और मानसिक शांति को लेकर भी उत्तर भारत के लोग भारी तनाव में हैं:

अकेलेपन का डर: उत्तर भारत के 81% लोगों को बुढ़ापे में अकेलेपन का डर सता रहा है। यह आंकड़ा देश के बाकी सभी जोन की तुलना में सबसे ज्यादा है।

हेल्थ और फिटनेस: केवल 70% लोगों को उम्मीद है कि वे रिटायरमेंट के बाद स्वस्थ रहेंगे, जो कि पिछले साल 74% था। नियमित हेल्थ चेकअप कराने वाले लोग भी घटकर 61% पर आ गए हैं।

बढ़ती चिंताएं: पर्यावरण में बदलाव (85%) और भू-राजनीतिक तनाव (83%) जैसे बाहरी कारण भी लोगों की शांतिपूर्ण रिटायरमेंट के सपनों पर पानी फेरते नजर आ रहे हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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