Happy Workplace: ऑफिस वर्कप्लेस को हैप्पी बनाने के लिए सैलेरी, काम और ऑफिस का माहौल महत्व रखता है। दरअसल, ग्लोबल मैचिंग और हायरिंग प्लेटफॉर्म ने हाल ही में 2023 में भारतीय कर्मचारियों के बीच वर्कप्लेस हैप्पीनेस को लेकर खुलासा किया है। सर्वे इस बात पर प्रकाश डालता है कि कर्मचारियों को काम पर क्या खुशी मिलती है और अलग-अलग कारण इसको कैसे प्रभावित करते हैं।
वर्कप्लेस हैप्पी बनाने में निभाता है अहम भूमिका
सर्वे में 58% कर्मचारियों ने माना कि उनका काम उनकी खुशी में महत्वपूर्ण योगदान देता है। इसके अलावा 95% लोगों का मानना है कि कर्मचारियों की खुशी तय करने की प्राथमिक जिम्मेदारी मैनेजरों की है। ताकि, काम का माहौल पॉजिटिव बना रहे। सर्वे में 70% कर्मचारियों ने काम पर खुश और संतुष्ट महसूस किया, जबकि 30% ने कुछ हद तक असंतोष व्यक्त किया। काम की प्रकृति और कुछ कारक वर्कप्लेस को हैप्पी बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। इनडीड इंडिया के सलाहकार रोहन सिल्वेस्टर ने कहा कि डेटा दिखाता है कि कर्मचारियों की खुशी को प्राथमिकता देने वाले 88% संगठनों ने अपनी टीमों के बीच संतुष्टि में बढ़ोतरी देखी है।
इस सेक्टर के लोगा हैं ज्यादा खुश
सर्वे के मुताबिक 15 साल से अधिक अनुभव वाले कर्मचारी (74%) और 0-2 वर्ष के अनुभव वाले कर्मचारी (54%) ने वर्कप्लेस को लेकर नाखुशी जताई है। नए लोगों को ऑफिस वर्कप्लेस में फिट होने में टाइम लगा। एफएमसीजी (81%), आईटी/आईटीईएस (81%), कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (80%), और रिटेल (78%) जैसे सेक्टर के लोग ज्यादा खुश नजर आए। वहीं, ऑटोमोबाइल (59%), लॉजिस्टिक्स (58%) जैसे सेक्टर के कर्मचारी कम खुश नजर आए।
सैलरी से ज्यादा खुश रहने के लिए ये कारण हैं जरूरी
कर्मचारी अपनी खुशी में योगदान देने के लिए कंपनी की विचारधारा और रणनीतियों (16%) को महत्व देते हैं। सैलरी से ज्यादा वर्कप्लेस में खुश रहने के लिए अन्य कारक भी जरूरी है। वर्क फ्लेक्सिबिलिटी भी जरूरी है, ऐसा 11 फीसदी कर्मचारियों ने माना।