NPS Fund Manager: अगर आप नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में निवेश करते हैं, तो आपका पैसा किसी न किसी पेंशन फंड मैनेजर के पास जाता है। वही आपके पैसे को इक्विटी, डेट और सरकारी बॉन्ड में निवेश करता है।
NPS Fund Manager: अगर आप नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में निवेश करते हैं, तो आपका पैसा किसी न किसी पेंशन फंड मैनेजर के पास जाता है। वही आपके पैसे को इक्विटी, डेट और सरकारी बॉन्ड में निवेश करता है।
अगर उसका प्रदर्शन कमजोर लगे, तो आप फंड मैनेजर बदल सकते हैं। लेकिन सिर्फ कुछ महीनों की खराब परफॉर्मेंस देखकर फैसला लेना सही नहीं है। इससे आपके रिटायरमेंट फंड पर असर पड़ सकता है।
1. कब बदलना चाहिए फंड मैनेजर?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर कोई फंड मैनेजर लगातार 3 से 5 साल तक अपने बेंचमार्क और दूसरे फंड्स से कमजोर प्रदर्शन करे, तभी बदलाव पर विचार करें।
मान लीजिए दो फंड मैनेजर हैं। एक ने पिछले 4 साल में हर साल औसतन 11% रिटर्न दिया। दूसरे ने सिर्फ 8%। अगर दोनों का जोखिम लगभग बराबर है, तो फंड बदलने की वजह बन सकती है। लेकिन अगर सिर्फ एक साल किसी फंड का रिटर्न कम रहा है, तो घबराने की जरूरत नहीं है।
2. हर साल फंड बदलना क्यों गलत है?
शेयर बाजार हमेशा एक जैसा नहीं चलता। कभी तेजी आती है, कभी गिरावट। ऐसे में हर साल सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले फंड के पीछे भागना नुकसान करा सकता है।
मान लीजिए इस साल फंड A सबसे आगे है। अगले साल फंड B आगे निकल जाए। अगर आप हर साल फंड बदलते रहेंगे, तो हो सकता है कि आप हमेशा देर से एंट्री करें और असली फायदा न मिले। इससे कंपाउंडिंग भी कमजोर पड़ सकती है।
3. सिर्फ रिटर्न देखकर फैसला न लें
फंड चुनते समय सिर्फ रिटर्न पर गौर करना अधूरी तस्वीर दिखा सकता है। यह भी देखिए कि फंड ने जोखिम कितना लिया। बाजार गिरने पर उसने नुकसान कितना रोका। उसका पोर्टफोलियो कितना मजबूत है। फंड मैनेजर की निवेश रणनीति कितनी अनुशासित है।
किसी फंड ने 12% रिटर्न दिया, लेकिन उसके लिए बहुत ज्यादा जोखिम लिया। और दूसरे ने 11% रिटर्न कम जोखिम में दिया, तो दूसरा विकल्प रिटायरमेंट के लिहाज से ज्यादा बेहतर हो सकता है।
4. NPS में कौन-कौन से फंड मैनेजर हैं?
फिलहाल NPS में 10 पेंशन फंड मैनेजर हैं।
5. Active Choice और Auto Choice में फर्क
अगर आपने Active Choice चुना है, तो यह तय करना आपकी जिम्मेदारी है कि पैसा इक्विटी, कॉरपोरेट डेट और सरकारी बॉन्ड में कितना जाएगा। इसलिए समय-समय पर एसेट एलोकेशन और फंड मैनेजर, दोनों की समीक्षा करें।
अगर आपने Auto Choice चुना है, तो उम्र बढ़ने के साथ सिस्टम खुद एसेट एलोकेशन बदलता रहता है। ऐसे में आपको सिर्फ यह देखना है कि आपका फंड मैनेजर लंबे समय तक लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है या नहीं।
ये गलतियां बिल्कुल न करें
NPS कोई एक-दो साल का निवेश नहीं है। यह 20-30 साल की योजना होती है। इसलिए धैर्य रखना सबसे जरूरी है। फंड मैनेजर तभी बदलें, जब लंबे समय तक उसका प्रदर्शन लगातार कमजोर रहे। तभी आपका रिटायरमेंट फंड बेहतर तरीके से बढ़ पाएगा।
NPS में अकाउंट कैसे खोलें?
18 साल या उससे ज्यादा उम्र का कोई भी भारतीय नागरिक NPS में निवेश कर सकता है। इसमें नौकरीपेशा, स्वरोजगार करने वाले, कारोबारी और NRI भी निवेश कर सकते हैं।
आप NPS अकाउंट किसी भी बैंक, पोस्ट ऑफिस से जुड़े Point of Presence (PoP) या ऑनलाइन eNPS पोर्टल के जरिए खोल सकते हैं। अकाउंट खुलने के बाद आपको PRAN (Permanent Retirement Account Number) मिलता है। इसी नंबर के जरिए आप नियमित निवेश कर सकते हैं और अपना पेंशन फंड मैनेज कर सकते हैं।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।
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