PFRDA: पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत एक नई पहल की शुरुआत की है। इसका नाम NPS स्वास्थ पेंशन स्कीम रखा गया है। फिलहाल इसे प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट (PoC) के तौर पर रेगुलेटरी सैंडबॉक्स फ्रेमवर्क के तहत लॉन्च किया गया है। इस योजना का मकसद पेंशन के साथ-साथ स्वास्थ्य खर्चों के लिए भी आर्थिक सहारा देना है।
यह स्कीम सीमित समय और नियंत्रित दायरे में लागू की गई है। इसके जरिए आउट-पेशेंट और इन-पेशेंट इलाज से जुड़े खर्चों में मदद मिलेगी। यह योजना मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क (MSF) के तहत चलेगी और इसमें भाग लेना पूरी तरह ऑप्शनल होगा। कोई भी भारतीय नागरिक इसमें योगदान कर सकता है।
इस योजना को पेंशन फंड्स (PFs) PFRDA की मंजूरी के बाद लागू करेंगे। इसके लिए सेंट्रल रिकॉर्डकीपिंग एजेंसियों (CRA), हेल्थ बेनिफिट एडमिनिस्ट्रेटर (HBA) या थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (TPA) के साथ मिलकर काम किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर फिनटेक कंपनियां भी इस पायलट प्रोजेक्ट में शामिल हो सकती हैं। परीक्षण के लिए NPS के एग्जिट और विड्रॉल से जुड़े कुछ नियमों में ढील दी गई है।
इस स्कीम में सब्सक्राइबर अपनी इच्छा से कोई भी अमाउंट जमा कर सकता है। यह पैसा MSF के नियमों के अनुसार निवेश किया जाएगा। 40 साल से अधिक उम्र के लोग अपने NPS कॉमन अकाउंट से अधिकतम 30% अमाउंट इस स्वास्थ पेंशन स्कीम में ट्रांसफर कर सकते हैं।
इलाज के लिए आंशिक निकासी की सुविधा भी दी गई है। सब्सक्राइबर अपनी जमा अमाउंट का 25% तक मेडिकल खर्च के लिए निकाल सकता है। हालांकि पहली निकासी तभी संभव होगी, जब खाते में कम से कम 50,000 रुपये का कॉर्पस बन जाए।
अगर किसी एक इलाज का खर्च कुल जमा अमाउंट के 70% से ज्यादा हो जाता है, तो पूरी अमाउंट एकसाथ निकालने की अनुमति होगी। पेमेंट सीधे अस्पताल या HBA/TPA को किया जाएगा। बची हुई अमाउंट वापस NPS कॉमन अकाउंट में चली जाएगी।
PFRDA ने यह भी साफ किया है कि शिकायत निवारण की मजबूत व्यवस्था बनाई जाएगी। साथ ही सब्सक्राइबर का डेटा डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 के तहत सुरक्षित रहेगा और डेटा शेयरिंग के लिए डिजिटल सहमति जरूरी होगी। इस पायलट प्रोजेक्ट से यह परखा जाएगा कि पेंशन और हेल्थ बेनिफिट को एक साथ जोड़ना कितना व्यावहारिक है। सफल रहने पर भविष्य में इसे बड़े स्तर पर लागू किया जा सकता है।