ETF के जरिए रिकॉर्ड निवेश! Nippon India का गोल्ड-सिल्वर ETF ₹1 लाख करोड़ के पार; जानिए डिटेल

ETF के जरिए सोना-चांदी में निवेश ने नया रिकॉर्ड बनाया है। Nippon India Mutual Fund का गोल्ड और सिल्वर ETF ₹1 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है। यह दिखाता है कि प्रेशियस मेटल्स अब निवेशकों के पोर्टफोलियो का मेनस्ट्रीम हिस्सा बन चुके हैं। जानिए कौन सा फंड हाउस कितना ETF मैनेज कर रहा है।

अपडेटेड Jan 28, 2026 पर 3:56 PM
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गोल्ड ETF को लंबे समय से पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन और महंगाई से बचाव के तौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है।

अगर आप म्यूचुअल फंड के जरिए सोना या चांदी में निवेश करते हैं, तो बहुत मुमकिन है कि आपके पोर्टफोलियो में पहले से ही ETF मौजूद हों। भले ही आप यह रोजाना न देखते हों कि उन्हें कौन सा फंड हाउस मैनेज कर रहा है। हाल के सालों में प्रेशियस मेटल्स में निवेश का तरीका तेजी से बदला है और ETF इसका सबसे बड़ा उदाहरण बन चुके हैं।

₹1 लाख करोड़ का बड़ा मुकाम

Nippon India Mutual Fund ने इस हफ्ते एक अहम पड़ाव पार किया। कंपनी के गोल्ड और सिल्वर ETF का कुल AUM ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा हो गया है। इससे यह भारत में प्रेशियस मेटल्स ETF का सबसे बड़ा मैनेजर बन गया है।


28 जनवरी 2026 तक Nippon India के Gold ETF का AUM ₹55,124 करोड़ और Silver ETF का AUM ₹47,392 करोड़ रहा। इस तरह दोनों को मिलाकर कुल AUM ₹1.02 लाख करोड़ पहुंच गया। ये आंकड़े National Stock Exchange (NSE) के डेटा पर आधारित हैं।

यह आंकड़ा सिर्फ साइज नहीं दिखाता, बल्कि यह बताता है कि सोना और चांदी अब निवेशकों के पोर्टफोलियो में पूरी तरह मेनस्ट्रीम हो चुके हैं।

ETF

गोल्ड-सिल्वर ETF की लीडरशिप

गोल्ड और सिल्वर ETF मैनेज करने वाली टॉप 10 AMCs में Nippon India Mutual Fund का कंबाइंड AUM सबसे ज्यादा है। इसके बाद ICICI Prudential Mutual Fund, HDFC Mutual Fund और SBI Mutual Fund का नंबर आता है।

कुल मिलाकर टॉप 10 AMCs मिलकर ₹2.76 लाख करोड़ के गोल्ड और सिल्वर ETF मैनेज कर रही हैं। यह इस सेगमेंट में निवेशकों के भरोसे को साफ दिखाता है।

गोल्ड और सिल्वर ETF में तेजी क्यों

गोल्ड और सिल्वर ETF में बढ़ता AUM यह बताता है कि निवेशक अब पारदर्शी, लिक्विड और रेगुलेटेड निवेश विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं। गोल्ड ETF को लंबे समय से पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन और महंगाई से बचाव के तौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है।

वहीं, सिल्वर ETF में हाल के वर्षों में तेजी इसलिए आई है क्योंकि चांदी एक साथ प्रेशियस मेटल और इंडस्ट्रियल मेटल दोनों की भूमिका निभाती है।

फिजिकल गोल्ड से ETF की ओर शिफ्ट क्यों

एक वक्त था जब भारत में सोना रखने का मतलब ज्वेलरी या फिजिकल बार होता था। अब तस्वीर बदल रही है। रिटेल निवेशक, HNI और बड़े संस्थागत निवेशक तेजी से ETF को चुन रहे हैं।

इसकी बड़ी वजह है कि इसमें स्टोरेज और प्योरिटी की चिंता नहीं रहती। कीमत भी सीधे बाजार से जुड़ी होती है, स्टॉक एक्सचेंज के जरिए खरीद-बिक्री आसान होती है। साथ ही, पूरा स्ट्रक्चर रेगुलेटेड होता है।

गोल्ड-सिल्वर पर निवेशकों का नजरिया

₹1 लाख करोड़ के आंकड़े के भीतर का बंटवारा भी काफी कुछ कहता है। गोल्ड अब भी उन निवेशकों की पसंद बना हुआ है जो लंबी अवधि में स्थिरता चाहते हैं, खासकर करेंसी में उतार-चढ़ाव, जियोपॉलिटिकल तनाव या शेयर बाजार में गिरावट के समय।

वहीं सिल्वर में पिछले दो सालों में निवेश तेजी से बढ़ा है। क्योंकि रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और EV सेक्टर में इसकी मांग बढ़ रही है। इसकी कीमत में ज्यादा उतार-चढ़ाव होता है, जो टैक्टिकल निवेशकों को आकर्षित करता है, और गोल्ड के मुकाबले इसका टिकट साइज भी छोटा होता है।

आज कई निवेशक दोनों मेटल्स को साथ में रख रहे हैं। गोल्ड को स्थिरता के लिए और सिल्वर को बेहतर अपसाइड की उम्मीद में।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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