NPS: 1 फरवरी 2024 से नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) से पैसा निकालने के नियम बदल जाएंगे। पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने सर्कुलर में राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) से पैसा निकालने के नए नियम जारी किये हैं। नोटिफिकेशन के मुताबिक एनपीएस फंड से आंशिक निकासी की अनुमति इन कारणों पर दी जाएगी। अब NPS निवेशक अपने कॉन्ट्रीब्यूशन का 25 फीसदी से अधिक नहीं निकाल सकते। ये नए नियम 1 फरवरी से लागू होंगे।
इन कारणों के लिए निकाल सकते हैं पैसा
बच्चों की उच्च शिक्षा और विवाह, जिसमें कानूनी रूप से गोद लिया गया बच्चा भी शामिल है।
एनपीएस सदस्य या ग्राहक के कानूनी रूप से विवाहित जीवनसाथी के साथ ज्वाइंट रूप से एक आवासीय घर खरीदें या उसका निर्माण करें। हालांकि, यह पैतृक संपत्ति के अलावा ग्राहक का पहला घर होना चाहिए। जिनके पास पहले से ही घर हैं वे पात्र नहीं हैं।
कैंसर, किडनी, हाई बीपी, स्केलेरोसिस, कोरोनरी बाइपास सर्जरी, स्ट्रोक, प्रमुख अंग प्रत्यारोपण, ग्राफ्ट सर्जरी, हार्ट वाल्व सर्जरी, मायोकार्डियल सर्जरी, पूर्ण अंधापन, पैरालिसिस, कोमा, जीवन-घातक दुर्घटनाएं आदि का उपचार।
ग्राहक की अक्षमता या विकलांगता के कारण चिकित्सा और अन्य खर्च।
री-स्किलिंग, अप-स्किलिंग या किसी अन्य सेल्फ डेवलपमेंट काम के लिए किया गया खर्च।
किसी कारोबारी या स्टार्ट-अप को स्थापित करने के लिए ग्राहक का किया गया खर्च।
आंशिक निकासी के लिए मानदंड?
आंशिक निकासी के समय ग्राहक को कम से कम तीन साल के लिए एनपीएस सदस्य होना चाहिए और ये पैसा ग्राहक के कुल योगदान का 25 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता है। नियोक्ता के योगदान को निकाले गए कैलुकलेशन से बाहर रखा गया है। साथ ही आंशिक निकासी के लिए केवल योगदान की गई राशि की अनुमति है, न कि उस पर मिले रिटर्न की। सदस्यता पीरियड के दौरान अधिकतम तीन आंशिक निकासी की अनुमति है। पहली निकासी के बाद पिछली निकासी से लेकर दूसरी बार निकालने पर नियमित योगदान जरूरी है।
आंशिक पैसा निकालने का तरीका
आंशिक निकासी के लिए ग्राहकों को प्वाइंट ऑफ प्रेजेंस (POP) या सरकारी नोडल ऑफिस में और एक सेल्फ डिकलेरेशन फॉर्म भरना होगा। इसमें पैसा निकालने का कारण होगा। इसे आगे केंद्रीय रिकॉर्डकीपिंग एजेंसी (CRA) के जरिये प्रोसेस किया जाएगा।
यदि व्यक्ति बताई गई किसी भी बीमारी से पीड़ित है, तो परिवार का कोई सदस्य ग्राहक की ओर से रिक्वेस्ट कर सकता है। पीओपी लाभार्थी की पहचान करेगा और सीआरए पेनी ड्रॉप प्रोसेस या अन्य तकनीक का उपयोग करके 'इंस्टेंड बैंक अकाउंट वैरिफिकेशन' प्रोसेस के माध्यम से बैंक खाते सहित ग्राहक की जानकारी को वैरिफाई करेगा।