गिग वर्कर्स और फ्रीलांसरों के लिए सरकार की नई योजना, NPS e-shramik के जरिए मिलेगी पेंशन, यहां करना होगा अप्लाई

जैसे Zomato, Swiggy, Blinkit, Ola, Uber, Urban Company आदि पर लाखों गिग वर्कर्स काम करते हैं। अब इन्हें पेंशन योजना से जोड़ा जाएगा। नई योजना का नाम NPS e-shramik प्लेटफॉर्म सर्विस पार्टनर रखा गया है। जानिये कैसे जुड़ सकते हैं

अपडेटेड Nov 08, 2025 पर 12:13 PM
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पहले लोग एक ही कंपनी या दफ्तर में नौकरी करते थे, लेकिन अब बहुत से लोग फ्रीलांसर या गिग वर्कर बनकर काम करना पसंद कर रहे हैं।

आजकल काम करने का तरीका तेजी से बदल रहा है। पहले लोग एक ही कंपनी या दफ्तर में नौकरी करते थे, लेकिन अब बहुत से लोग फ्रीलांसर या गिग वर्कर बनकर काम करना पसंद कर रहे हैं। ये लोग किसी एक कंपनी से बंधे नहीं होते, बल्कि अलग-अलग प्रोजेक्ट या काम के लिए अपनी सर्विस देते हैं और बदले में इन्हें पैसा मिलता है। लेकिन इन्हें कोई पेंशन या पीएफ नहीं मिलता। ऐसे में सरकार इनके लिए एक योजना पर काम कर रही है। NPS e-shramik के जरिये गिग वर्कर्स को  पीएफ और पेंशन जैसे बेनेफिट मिलेंगे।

क्या है यह नई योजना NPS e-shramik प्लेटफॉर्म सर्विस पार्टनर?

जैसे Zomato, Swiggy, Blinkit, Ola, Uber, Urban Company आदि पर लाखों गिग वर्कर्स काम करते हैं, उनके जरिए इन वर्कर्स को NPS पेंशन स्कीम से जोड़ा जाएगा। मतलब अब जो भी व्यक्ति इन कंपनियों के लिए काम करता है, वह NPS में रजिस्टर होकर भविष्य के लिए पेंशन जमा कर सकता है। नई योजना का नाम NPS e-shramik प्लेटफॉर्म सर्विस पार्टनर रखा गया है।


जैसे सरकारी या प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों को NPS यानी नेशनल पेंशन सिस्टम या PF जैसी सुविधाएं मिलती हैं, वैसे ही गिग वर्कर्स को अब तक ऐसी कोई स्थायी सुरक्षा नहीं मिल पाती थी। इसी समस्या को देखते हुए PFRDA यानी पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण ने अब एक नई पहल की है।

भारत में गिग वर्कर्स की संख्या लगातार बढ़ रही है। नीति आयोग (NITI Aayog) की रिपोर्ट के मुताबिक 2020 में जहां गिग वर्कर्स की संख्या 7.7 मिलियन यानी 77 लाख थी, वहीं 2030 तक यह बढ़कर 23.5 मिलियन(2.35 करोड़ तक पहुंच सकती है। यह बदलाव भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत है, लेकिन इसके साथ एक बड़ी चुनौती भी है कि इन वर्कर्स के लिए सोशल और रिटायरमेंट सिक्योरिटी की कमी।

रजिस्ट्रेशन कैसे होगा?

पहला स्टेप – Quick PRAN Generation

वर्कर की KYC जानकारी नाम, पता, PAN, मोबाइल नंबर, बैंक डिटेल्स वेरिफाई की जाएगी।

अगर प्लेटफॉर्म जैसे Swiggy या Ola के पास पहले से जानकारी है, तो वही इस्तेमाल की जाएगी।

वर्कर की सहमति के बाद उसे एक PRAN (Permanent Retirement Account Number) मिलेगा।

वर्कर या कंपनी दोनों मिलकर पेंशन फंड और इन्वेस्टमेंट स्कीम चुन सकते हैं।

दूसरा स्टेप – अतिरिक्त जानकारी

वर्कर को अपने माता-पिता का नाम, ईमेल आईडी और नामिनी की जानकारी देनी होगी।

नामिनी की जानकारी 60 दिनों के भीतर देना जरूरी है।

कितना योगदान देना होगा?

योगदान तीन तरीकों से किया जा सकता है।

ज्वाइंट रूप से – प्लेटफॉर्म और वर्कर दोनों योगदान करें।

वर्कर-ओनली – केवल वर्कर योगदान करे।

प्लेटफॉर्म-ओनली – केवल कंपनी योगदान करे।

कंपनी या वर्कर हर महीने न्यूनतम 99 रुपये का योगदान तय कर सकते हैं। हालांकि, सामान्य NPS में न्यूनतम 500 रुपये होता है। इसके अलावा, रजिस्ट्रेशन पर कोई चार्ज नहीं लगेगा और सालाना शुल्क भी 100 रुपये से घटाकर 15 रुपये कर दिया गया है।

क्यों जरूरी है यह योजना?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर गिग वर्कर्स नियमित रूप से NPS में योगदान करेंगे, तो उन्हें कंपाउंडिंग का लाभ मिलेगा और रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा भी तय होगी। यह योजना गिग वर्कर्स और फ्रीलांसरों के लिए बड़ा कदम है क्योंकि अब वे भी उसी तरह पेंशन का लाभ पा सकेंगे जैसे किसी कंपनी के स्थायी कर्मचारी को मिलता है।

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