NPS और EPF में रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए कौन है बेहतर?

NPS एक डिफाइंड कंट्रिब्यूशन प्लान है। इसमें आपके पैसे का इनवेस्टमेंट शेयर और बॉन्ड में किया जाता है। इसमें आपका सिस्टमैटिक कंट्रिब्यूशन हर महीने मार्केट रेट्स से बढ़ता है। रिटायरमेंट के बाद इस अमाउंट से आपको अच्छी पेंशन मिलती है

अपडेटेड May 31, 2022 पर 2:21 PM
एनपीएस आपको कई तरह के ऑप्शन देता है। यह आपको यह तय करने का मौका देता है कि आप कितना पैसा शेयरों में लगाना चाहते हैं।

ज्यादातर सैलरीड लोगों के लिए रिटायरमेंट प्लानिंग (Retirement Planning) के दो मुख्य आप्शंस हैं-NPS और EPF। ज्यादातर प्राइवेट कंपनियां अपने एंप्लॉयीज को ईपीएफ की सुविधा देती हैं। दोनों में टैक्स में छूट मिलती है। दोनों ही लंबी अवधि के इनवेस्टमेंट हैं। धीरे-धीरे दोनों ऐसा फंड तैयार करने में आपकी मदद करते हैं, जिसका इस्तेमाल आप तब करते हैं जब आपकी रेगुलर इनकम बंद हो जाती है।

EPF के डिफाइंड बेनेफिट प्लान है। इसका मतलब यह है कि गवर्नमेंट इसके रिटर्न की गांरटी देती है। हर साल ईपीएफ अंकाउंट में जमा आपके पैसे पर इंटरेस्ट मिलता है। इसका ऐलान सरकार की तरफ से किया जाता है। फिर, जब आप रिटायरमेंट उम्र तक पहुंच जाते हैं तो आपको एकमुश्त अमाउंट मिल जाता है।

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NPS एक डिफाइंड कंट्रिब्यूशन प्लान है। इसमें आपके पैसे का इनवेस्टमेंट शेयर और बॉन्ड में किया जाता है। इसमें आपका सिस्टमैटिक कंट्रिब्यूशन हर महीने मार्केट रेट्स से बढ़ता है। रिटायरमेंट के बाद इस अमाउंट से आपको अच्छी पेंशन मिलती है। ईपीएफ दरअसल एक इंप्लॉयी बेनेफिट स्कीम है। इसका मतलब है कि प्राइवेट सेक्टर के इंप्लॉयीज इसका फायदा उठा सकते हैं। उधर, एनपीएस में कोई व्यक्ति अपनी रिटायरमेंट के लिए एनपीएस में इनवेस्ट कर सकता है।

एनपीएस आपको कई तरह के ऑप्शन देता है। यह आपको यह तय करने का मौका देता है कि आप कितना पैसा शेयरों में लगाना चाहते हैं। इसके लिए मंथली कंट्रिब्यूशन का अधिकतम 75 फीसदी सीमा तय है। ईपीएफ में आपके पास यह तय करने की सुविधा नहीं होती है कि आपका पैसा कहां इनवेस्ट किया जाएगा। EPFO अपने कुल फंड का 5 से 15 फीसदी ही शेयरों में इनवेस्ट कर सकता है।

प्लांटरिच कंसल्टेंसी की फाउंडर ख्याति मशरू वसानी ने कहा, "अगर संभव हो तो हम क्लाइंट्स को दोनों में इनवेस्ट करने सलाह देते हैं। दोनों के ऑब्जेक्टिव में फर्क है। ईपीएफ में रिटर्न की गारंटी होती है, जिससे यह रिटायरमेंट के बाद रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने में मददगार है।"

ईपीएफ और एनपीएस दोनों में ही टैक्स बेनेफिट मिलता है। दोनों में आपको टैक्स डिडक्शन मिलता है। इनकम टैक्स एक्ट के 80सी के तहत 1.5 लाख रुपये तक इनवेस्ट कर टैक्स छूट हासिल की जा सकती है। एनपीएस आपको सेक्शन 80सीसीडी (1बी) के तहत अतिरिक्त 50,000 रुपये तक का डिडक्शन हासिल करने की इजाजत देता है।

वसानी ने बताया कि क्लाइंट्स ज्यादातर एडिशनिल टैक्स बेनेफिट के लिए एनपीएस को सेलेक्ट करते हैं, क्योंकि कंट्रिब्यूशंस को लेकर कोई लिमिट नहीं है। आप अपने रिटायरमेंट प्लान के तहत ज्यादा अमाउंट इनवेस्ट कर सकते हैं। मैच्योरिटी पर आप एनपीएस फंड से 60 फीसदी अमाउंट टैक्स-फ्री निकाल सकते हैं। ईपीएफ में भी मैच्योरिटी पर मिलने वाला अमाउंट टैक्स-फ्री होता है, लेकिन एक साल में 2.5 लाख रुपये से ज्यादा के कंट्रिब्यूशन पर मिलने वाला ब्याज टैक्सेबल होता है।

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