NPS Vs OPS: न्यू पेंशन स्कीम पुरानी के मुकाबले बेहतर है, फिर क्यों पुरानी स्कीम लागू करने की हो रही मांग?
पंजाब सरकार ने हाल में कहा था कि वह एंप्लॉयीज के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) लागू करने के बारे में सोच रही है। अगर पंजाब सरकार की यह प्लान हकीकत में बदलता है तो वह ओल्ड पेंशन स्कीम को लागू करने वाला तीसरा राज्य होगा। इससे पहले राजस्थान और छत्तीसगढ़ यह ऐलान कर चुके हैं
MoneyControl News
अपडेटेड Sep 23, 2022 पर 6:02 PM
कुछ एंप्लॉयीज यूनियन भी न्यू पेंशन स्कीम (NPS) की जगह OPS लागू करने के पक्ष में हैं।
पंजाब सरकार ने हाल में कहा था कि वह एंप्लॉयीज के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) लागू करने के बारे में सोच रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसे वादों का मकसद लोगों को सिर्फ खुश करना है, क्योंकि इससे सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ेगा। आखिरकार सरकार लोगों के टैक्स का इस्तेमाल ही अपने खर्च के लिए करती है।
अगर पंजाब सरकार की यह प्लान हकीकत में बदलता है तो वह ओल्ड पेंशन स्कीम को लागू करने वाला तीसरा राज्य होगा। इससे पहले राजस्थान और छत्तीसगढ़ यह ऐलान कर चुके हैं। कुछ एंप्लॉयीज यूनियन भी न्यू पेंशन स्कीम (NPS) की जगह OPS लागू करने के पक्ष में हैं।
एक्सिस पेंशन फंड के एमडी और सीईओ सुमित शुक्ला ने कहा, "कई देशों में काफी पहले डिफाइंड बेनेफिट सिस्टम (OPS) बंद हो चुका है। पेंशन की बढ़ती लायबिलिटीज की वजह से दुनियाभर में सरकारों को भारी लॉस उठाना पड़ा है। एनपीएस रिटायमेंट का फ्यूचर है। 1 जनवरी, 2004 के बाद से नौकरी ज्वाइन करने वाले लोगों को रिटायर होने के बाद NPS के फायदे समझ में आएंगे।"
आइए हम NPS और OPS के बारे में डिटेल में जानने की कोशिश करते हैं। हम यह भी देखेंगे कि इसका सरकारी एंप्लॉयज और पेंशनर्स पर किस तरह असर पड़ता है।
गवर्नमेंट एंप्लॉयीज के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम क्या है?
1 जनवरी, 2004 से पहले सरकारी नौकरी ज्वाइन करने वाले लोगों के पेंशन का प्रंबधन ओल्ड पेंशन स्कीम के तहत होता है। इसका फार्मूला फिक्स्ड है। रिटायरमेंट पर एंप्लॉयी को अंतिम सैलरी (बेसिक + डीए) का 50 फीसदी या नौकरी के अंतिम 10 महीने में हासिल सैलरी का औसत अमाउंट पेंशन के मिलता है। दोनों में से जो एंप्लॉयी के लिए फायदेमंद होगा, उसे पेंशन के रूप में मिलेगा। शर्त यह है कि एंप्लॉयी ने कम से कम 10 साल तक नौकरी किया हो।
EPFO के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टी के पूर्व सदस्य विर्जेश उपाध्याय ने कहा, "डीए इनफ्लेशन से लिंक्ड होता है और इसलिए यह बढ़ सकता है। इसलिए सरकार की पेंशन लायबिलिटी भी बढ़ेगी।"
फिनिक्स रिसर्च के फाउंडर प्रबलीन वाजपेयी ने कहा कि पेंशनर के निधन के बाद फैमिली पेंशन उसके परिवार के सदस्य को मिलती है। दूसरा, OPS में एंप्लॉयी को पेंशन के लिए कंट्रिब्यूट नहीं करना पड़ता है। उपाध्य ने कहा कि यह ध्यान में रखना चाहिए कि अब भी सरकार पेंशन फंड में कंट्रिब्यूट करती है। पहले एंप्लॉयर का कंट्रिब्यूशन छुपा होता था।
रिटायरमेंट के बाद पेंशन के रूप में मिलने वाले फिक्स्ड अमाउंट, सैलरी से इसके लिए किसी तरह का डिडक्शन नहीं होने और पेंशनर के निधन के बाद परिवार को मिलने वाली फाइनेंशियल सिक्योरिटी को देखते हुए कई एंप्लॉयीज OPS को फिर से लागू करने की मांग कर रहे हैं।
सरकार के New Pension Scheme लागू करने की क्या वजह रही?
केंद्र सरकार ने 1 जनवरी, 2004 के बाद से नौकरी शुरू करने वाले अपने एंप्लॉयीज (सैन्य बलों को छोड़कर) के लिए न्यू पेंशन स्कीम लागू कर दी। उसके बाद तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल को छोड़ करीब सभी राज्यों ने भी नई व्यवस्था लागू कर दी।
लैडर7फाइनेंशियल एडवाइजर्स के फाउंडर सुरेश सदगोपन ने कहा, "सरकारों की बढ़ती लायबिलिटी को देखते हुए पेंशन की नई व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया गया। OPS सरकारी खजाने के लिहाज से फायदेमंद नहीं था। फिर से OPS को लागू करने के भारी नुकसान होंगे।"
इस साल मार्च में आई SBI की रिसर्च रिपोर्ट मुताबिक, OPS एक अनफंडेड पेंशन स्कीम है, जिसमें करेंट रेवेन्यू का इस्तेमाल पेंशन देने के लिए किया जाता है। लाइफ एक्सपेक्टेंसी बढ़ने से भी पेंशन पेमेंट पर आने वाला बोझ बढ़ा है।
NPS कैसे काम करता है?
इसमें सरकारी एंप्लॉयीज अपनी बैसिक सैलरी का 10 फीसदी रिटायरमेंट फंड में कंट्रिब्यूट करते हैं। एंप्लॉयर इसमें 14 फीसदी तक कंट्रिब्यूट करता है। NPS प्राइवेट सेक्टर के एंप्लॉयीज के लिए भी ओपन है। यह स्वैच्छि है, हालांकि कुछ नियमों में बदलाव किया गया है।
प्राइवेट एंप्लॉयीज के लिए कई तरह के एसेट क्लास के ऑप्शंस हैं। इनमें इक्विटी, कॉर्पोरेट डेट, गवर्नमेंट सिक्योरिटीज और अल्टरनेविट एसेट्स शामिल हैं। प्राइवेट एंप्लॉयीज के मुकाबले सरकारी एंप्लॉयीज का फ्रेमवर्क ज्यादा जटिल है। उदाहरण के लिए प्राइवेट एंप्लॉयीज को इक्विटी में 75 फीसदी तक निवेश करने की इजाजत है, जबकि सरकारी एंप्लॉयीज के मामले में यह 50 फीसदी है।
रिटायरमेंट पर एंप्लॉयी अपने फंड का 60 फीसदी एकमुश्त निकाल सकता है। बाकी 40 फीसदी से एन्युटी प्लान खरीदना जरूरी है। इसी एन्युटी प्लान से एंप्लॉयी को रिटायरमेंट के बाद पेंशन मिलती है। OPS में जहां फिक्स्ड पेमेंट की गारंटी होती है वही NPS में फंड के रिटर्न पर शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का असर पड़ता है।
एनपीएस के लॉन्ग टर्म नेचर को देखते हुए यह एंप्लॉयी के लिए भी ठीक है साथ ही इससे सरकार पर भी पेंशन पेंमेंट की लायबिलिटी नहीं रहती है।