NPS: रिटायरमेंट बाद की आपकी लाइफ और हैपी हो जाएगी, PFRDA ने बनाया यह प्लान

पीएफआरडीए ने इस प्रस्ताव पर फीडबैक मांगा है। 19 अक्टूबर तक इस प्रपोजल पर NPS को अपनी राय बताई जा सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे रिटारयमेंट बाद हर महीने ज्यादा पैसे पाने का रास्ता खुल जाएगा

अपडेटेड Oct 04, 2022 पर 1:32 PM
NPS की शुरुआत 1 जनवरी, 2004 को हुई थी। शुरू में इसे सिर्फ सरकारी एंप्सलॉयीज के लिए लागू किया गया था। 2009 से इस स्कीम के दरवाजे दूसरे लोगों के लिए भी खोल दिए गए।

NPS सब्सक्राइबर्स के लिए अच्छी खबर है। पेंशन फंड रेगुलेटर PFRDA ने एक प्लान पेश किया है। अगर यह प्लान मंजूर हो जाता है तो एनपीएस में निवेश करने वाले लोगों की रिटायरमेंट बाद की लाइफ बहुत हैपी हो जाएगी। यह प्रपोजल क्या है, इसके क्या फायदे होंगे, इससे क्या बदलाव आएगा? आइए इन सवालों के जवाब विस्तार से जानते हैं।

अभी उम्र 60 साल हो जाने या रिटारयमेंट के बाद सब्सक्राइबर को एनपीएस फंड में जमा कुल अमाउंट का 60 फीसदी एकमुश्त निकालने की इजाजत है। बाकी 40 साल फीसदी का इस्तेमाल वह एन्युटी में निवेश के लिए करता है। इसी से उसे हर महीने पेंशन मिलती है।

अगर 60 साल की उम्र से पहले एनपीएस से पैसे निकाले जाते हैं तो यह नियम बदल जाता है। मैच्योरिटी से पहले एनपीएस से सिर्फ 20 फीसदी पैसा निकालने की इजाजत है। बाकी 80 फीसदी का इस्तेमाल एन्युटी खरीदने के लिए करना पड़ता है। सब्सक्राइबर चाहे तो वह एकमुश्त रकम की निकासी (Withdrawal) और Annuity को 75 साल की उम्र तक के लिए टाल सकता है।


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PFRDA ने एक प्लान तैयार किया है। इसमें एकमुश्त रकम वाले हिस्से को एकबार में निकालने की बजाय हर महीने या हर तिमाही या या हर छमाही या सालाना निकालने का प्रस्ताव है। इस पैसे से सब्सक्राइबर 75 साल की उम्र तक हर महीने, हर तिमाही, हर छमाही या हर साल एक फिक्स्ड अमाउंट निकाल सकता है।

पीएफआरडीए ने इस प्रस्ताव पर फीडबैक मांगा है। 19 अक्टूबर तक इस प्रपोजल पर NPS को अपनी राय बताई जा सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे रिटारयमेंट बाद हर महीने ज्यादा पैसे पाने का रास्ता खुल जाएगा। अभी सिर्फ एन्युटी में किए गए निवेश की रकम से पेंशन मिलती है। चूंकि एन्युटी में निवेश (40 फीसदी) एकमुश्त निकासी (60 फीसदी) के मुकाबले कम होता है, जिससे पेंशन के रूप में भी ज्यादा अमाउंट नहीं मिलता है।

अगर पीएफआरडीए का प्रपोजल लागू होता है तो सब्सक्राइबर को यह बताना होगा कि वह सिस्टमैटिक लंपसम विड्रॉल (SLW) के तहत हर महीने, तिमाही या छमाही पैसे का पेमेंट चाहता है। यह फैसिलिटी एनपीएस के टियर 1 और टियर 2 दोनों अकाउंट में मिलेगी। साथ ही उसे Annuity पोर्शन से मिलने वाली पेंशन भी मिलती रहेगी। इस तरह उसे रेगुलर इनकम के दो स्रोत हो जाएंगे।

NPS की शुरुआत 1 जनवरी, 2004 को हुई थी। शुरू में इसे सिर्फ सरकारी एंप्सलॉयीज के लिए लागू किया गया था। 2009 से इस स्कीम के दरवाजे दूसरे लोगों के लिए भी खोल दिए गए।

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