ईरान और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच कई भारतीय नागरिक दुविधा में हैं कि वे वहीं रहें या भारत लौट आएं। जो लोग भारत वापस आ रहे हैं, उनके लिए सिर्फ नौकरी या सुरक्षा ही नहीं, बल्कि टैक्स से जुड़ा एक बड़ा बदलाव भी सामने आ सकता है। दरअसल, भारत में ज्यादा दिन रुकने से उनका टैक्स स्टेटस बदल सकता है, जिससे टैक्स का बोझ बढ़ सकता है।
क्यों जरूरी है टैक्स स्टेटस
भारत में टैक्स इस बात पर निर्भर करता है कि आप NRI हैं या रेजिडेंट।
NRI को सिर्फ भारत में कमाई गई आय पर टैक्स देना होता है।
जबकि रेजिडेंट को पूरी दुनिया की आय (global income) पर टैक्स देना पड़ता है
कैसे तय होता है रेजिडेंसी
रेजिडेंसी इस बात से तय होती है कि आप साल में भारत में कितने दिन रहे।
182 दिन या उससे ज्यादा रहने पर आप रेजिडेंट बन सकते हैं।
या 60 दिन (कुछ मामलों में) + पिछले 4 साल में 365 दिन रहने पर भी रेजिडेंसी बदल सकती है।
ध्यान रखें, एक दिन का हिस्सा भी पूरा दिन माना जाता है।
भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के लोगों के लिए नियम थोड़े आसान हैं।
वे 182 दिन तक भारत में रहकर भी NRI स्टेटस बनाए रख सकते हैं।
ज्यादा कमाई वालों के लिए सख्त नियम
अगर किसी NRI की भारत में आय 15 लाख रुपये से ज्यादा है, तो नियम बदल जाते हैं।
ऐसे में 182 दिन की जगह 120 दिन की सीमा लागू हो जाती है।
सीमा पार करने पर क्या होगा
अगर आप तय सीमा से ज्यादा दिन भारत में रहते हैं, तो आपका स्टेटस बदलकर RNOR (Resident but Not Ordinarily Resident) हो सकता है। इसमें आपको भारत की आय पर पूरा टैक्स लगेगा। विदेशी आय पर आमतौर पर टैक्स नहीं लगता, लेकिन कुछ मामलों में लग सकता है।
मौजूदा हालात में यात्रा प्लान बदल सकते हैं और लोग अनजाने में ज्यादा दिन भारत में रुक सकते हैं। इससे टैक्स स्टेटस बदल सकता है। टैक्स का दायरा बढ़ सकता है।