सेंट्र्ल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (सीबीडीटी) ने इनकम टैक्स के नए नियम 20 मार्च को नोटिफाय कर दिए। इससे इनकम टैक्स रूल्स, 2026 के 1 अप्रैल से लागू होने का रास्ता साफ हो गया है। नए नियमों का असर करोड़ों टैक्सपेयर्स पर पड़ेगा। 1 अप्रैल, 2026 से नए फाइनेंशियल ईयर की भी शुरुआत होगी।
1 अप्रैल से इनकम टैक्स एक्ट, 2025 लागू होगा
सीबीडीटी ने नए टैक्स रूल्स नोटिफाय करने के साथ ही इनकम टैक्स एक्ट, 2025 को लागू करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा दिया है। 1 अप्रैल से इनकम टैक्स एक्ट, 2025 लागू हो जाएगा। इसके साथ ही पिछले कई दशकों से लागू इनकम टैक्स एक्ट, 1961 का वजूद खत्म हो जाएगा। नए एक्ट में टैक्स के नियमों और भाषा को आसान बनाया गया है।
नियमों की संख्या 511 से घटाकार 333 की गई
नए इनकम टैक्स रूल्स में नियमों की संख्या 511 से घटाकर 333 हो गई है। फॉर्म्स की संख्या 399 से घटकर 190 रह गई है। टैक्स प्रोसिजर को आसान बनाया गया है। मुश्किल शब्दों की जगह आसान शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। भाषा को भी आसान बनाने की कोशिश की गई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि पुराने नियमों की भाषा मुश्किल थी। इससे किसी आम टैक्सपेयर को समझने की लिए एक्सपर्ट की मदद लेनी पड़ती थी।
जल्द नोटिफिकेशन जारी होने से एंप्लॉयर्स को होगी आसानी
Deloitte India के पार्टनर सुरेशकुमार एस ने कहा, "टैक्स के नए नियमों से एंप्लॉयीज और एंप्लॉयर्स दोनों को आसानी होगी। इसमें एंप्लॉयी की कई तरह की परक्विजिट्स और एग्जेम्प्शंस की लिमिट में बदलाव किए गए हैं। हालांकि, इनमें से ज्यादातर का संबंध इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम से है, लेकिन नई रीजीम के टैक्सपेयर्स को भी फायदा होगा। सबसे खास बात यह है कि सही समय पर नोटिफिकेशन आ जाने से एंप्लॉयर्स को नए नियमों को लागू करने में आसानी होगी।"
एचआरए क्लेम करने से जुड़े नियमों में होंगे अहम बदलाव
नए नियम में हाउस रेंट अलाउन्स (एचआरए) के नियम भी बदलेंगे। नए नियम में ज्यादा एचआरए बेनेफिट्स के लिए शेयरों की संख्या बढ़ाई गई है। इस लिस्ट में चार मेट्रो के अलावा हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद और बेंगलुरु को शामिल किया गया है। अब इन शहरों में रहने वाले लोग भी सैलरी के 50 फीसदी एग्जेम्प्शन लिमिट का फायदा उठा सकेंगे। बाकी शहरों के लिए यह लिमिट 40 फीसदी बनी रहेगी।
किराएदार को मकानमालिक के साथ रिश्ता बताना होगा
इनकम टैक्स के नए नियमों में अगर टैक्सपेयर एचआरए पर डिडक्शन क्लेम करना चाहता है तो उसे मकानमालिक और किराएदार के बीच के संबंध को बताना होगा। इससे टैक्सपेयर्स के लिए कंप्लायंस बढ़ जाएगा। नए नियमों में इनकम टैक्स के सेक्शंस की संख्या 819 से घटाकर 536 की गई है। चैप्टर्स की संख्या 47 से घटाकर 23 की गई है।