Budget 2026: क्या बजट 2026 में खत्म हो जाएगा पुराना टैक्स सिस्टम? जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट
Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026-27 नजदीक आते ही टैक्सपेयर्स के मन में कई सवाल उठने लगे हैं। एक तरफ लोग टैक्स में राहत और ज्यादा छूट की उम्मीद कर रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर यह चर्चा तेज है कि क्या सरकार इस बार पुराने इनकम टैक्स सिस्टम को पूरी तरह खत्म कर देगी
Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026-27 नजदीक आते ही टैक्सपेयर्स के मन में कई सवाल उठने लगे हैं।
Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026-27 नजदीक आते ही टैक्सपेयर्स के मन में कई सवाल उठने लगे हैं। एक तरफ लोग टैक्स में राहत और ज्यादा छूट की उम्मीद कर रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर यह चर्चा तेज है कि क्या सरकार इस बार पुराने इनकम टैक्स सिस्टम को पूरी तरह खत्म कर देगी। फिलहाल देश में पुराना टैक्स रिजीम और नया टैक्स रिजीमदोनों विकल्प मौजूद हैं, जिनमें से टैक्सपेयर्स अपनी जरूरत के हिसाब से किसी एक को चुन सकते हैं।
क्यों बढ़ी पुराना टैक्स रिजीम खत्म होने की चर्चा?
सरकार पिछले कुछ सालों से नए टैक्स रिजीम को बढ़ावा दे रही है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 से नया टैक्स रिजीम डिफॉल्ट विकल्प बना दिया गया है। यानी अगर कोई टैक्सपेयर खुद से विकल्प नहीं चुनता, तो अपने आप नया टैक्स रिजीम लागू हो जाएगा। इसी वजह से यह आशंका बढ़ी है कि आने वाले समय में सरकार पुराने टैक्स रिजीम को खत्म कर सकती है।
हालांकि टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि बजट 2026 में पुराना टैक्स रिजीम खत्म होने की संभावना कम है।
एक्सपर्ट क्या कहते हैं?
चार्टर्ड अकाउंटेंट हिता देसाई के अनुसार पुराना टैक्स रिजीम अभी भी बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स के लिए जरूरी है। खासतौर पर बड़े शहरों में रहने वाले लोग, जो ज्यादा किराया देते हैं। उनके लिए HRA यानी हाउस रेंट अलाउंस की छूट केवल पुराने टैक्स सिस्टम में ही मिलती है।
इसके अलावा पुराने टैक्स रिजीम में
होम लोन के ब्याज पर ₹2 लाख तक की छूट
सेक्शन 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की टैक्स बचत
हेल्थ इंश्योरेंस (80D)
एजुकेशन लोन ब्याज (80E)
LIC, PPF, ELSS जैसे निवेश पर टैक्स छूट
जैसी कई अहम सुविधाएं मिलती हैं। देसाई का कहना है कि जब तक नया टैक्स सिस्टम इन सभी राहतों की भरपाई नहीं करता, तब तक पुराने रिजीम को खत्म करना मिडिल क्लास पर अतिरिक्त टैक्स बोझ डाल सकता है।
नया टैक्स रिजीम: क्या है फायदा?
नए टैक्स रिजीम में टैक्स स्लैब सरल हैं और टैक्स दरें भी कम हैं।
₹12 लाख तक की सामान्य आय पर प्रभावी रूप से कोई टैक्स नहीं लगता
ज्यादा कटौतियों और कागजी झंझट से छुटकारा मिलता है।
फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए नया टैक्स रिजीम अपने आप लागू होता है। हालांकि सैलरीड लोग ITR फाइल करते समय पुराना टैक्स रिजीम चुन सकते हैं। लेकिन अगर कोई लेट ITR फाइल करता है, तो उसे सिर्फ नया टैक्स रिजीम ही अपनाना होगा।
नया टैक्स रिजीम: टैक्स स्लैब
₹0 से ₹4 लाख: शून्य
₹4 से ₹8 लाख: 5%
₹8 से ₹12 लाख: 10%
₹12 से ₹16 लाख: 15%
₹16 से ₹20 लाख: 20%
₹20 से ₹24 लाख: 25%
₹24 लाख से ऊपर: 30%
पुराना टैक्स रिजीम: क्यों आज भी पसंद?
पुराना टैक्स रिजीम उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो टैक्स सेविंग प्लानिंग करते हैं। इसमें:
सेक्शन 80C में ₹1.5 लाख तक निवेश
HRA और LTA
होम लोन ब्याज
हेल्थ और एजुकेशन खर्च पर छूट
जैसी सुविधाएं मिलती हैं। यही वजह है कि सीनियर सिटीजन्स और ज्यादा कटौतियां क्लेम करने वाले लोग आज भी पुराने टैक्स सिस्टम को पसंद करते हैं।
किसे कौन-सा टैक्स रिजीम चुनना चाहिए?
टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आपकी सालाना आय ₹12 लाख तक है और आप ज्यादा छूट क्लेम नहीं करते, तो नया टैक्स रिजीम फायदेमंद हो सकता है। अगर आप HRA, होम लोन, PPF, ELSS, मेडिकल इंश्योरेंस जैसी छूट लेते हैं, तो पुराना टैक्स रिजीम बेहतर रहेगा।
बजट 2026 से क्या उम्मीद?
फिलहाल संकेत यही हैं कि सरकार दोनों टैक्स रिजीम को जारी रख सकती है। संभव है कि नया टैक्स सिस्टम और आकर्षक बनाया जाए, लेकिन पुराने टैक्स रिजीम को तुरंत खत्म करना आसान नहीं होगा। बजट 2026 में टैक्सपेयर्स को राहत मिलती है या नहीं, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।