जब अचानक मेडिकल खर्च, घर की मरम्मत या नौकरी की मार से पैसे की तंगी हो, तो जेब से निकालने का मन न करे। बैंक के दो लोकप्रिय विकल्प ओवरड्राफ्ट (OD) और पर्सनल लोन (PL) तुरंत राहत देते हैं, लेकिन दोनों की अपनी दुनिया है। OD लचीलापन देता है जैसे जेब में हमेशा तैयार रिजर्व, जबकि PL तय प्लानिंग वालों का साथी। गलत चुनाव से ब्याज का बोझ दोगुना हो सकता है, इसलिए अपनी जरूरत समझें।
OD आपके बैंक अकाउंट से जुड़ी क्रेडिट लाइन है 2 लाख की लिमिट हो तो जरूरत भर निकालें, बाकी पर जीरो ब्याज। सिर्फ इस्तेमाल की रकम पर ही दैनिक ब्याज लगता है, कोई फिक्स्ड EMI नहीं। मिसाल के तौर पर, 30 हजार निकाले तो सिर्फ उतने पर ब्याज, बाकी समय जमा कर लें। यह कैश फ्लो मैनेजमेंट या बार-बार छोटे खर्चों के लिए बेस्ट है। कमी? ज्यादा इस्तेमाल से ओवरस्पेंडिंग का खतरा, और ब्याज दरें कभी 15-20% तक।
PL एकमुश्त रकम देता है 3 लाख लिए तो पूरी मिलेगी, EMI में 1-5 साल चुकाएं। ब्याज पूरे अमाउंट पर शुरू से लगता है, लेकिन दरें क्रेडिट स्कोर पर निर्भर (10-18%)। शादी, कार या डेब्ट कंसॉलिडेशन जैसे निश्चित खर्चों के लिए आइडियल, क्योंकि बजटिंग आसान। प्लस पॉइंट: समय पर चुकाने से CIBIL स्कोर चमकता है। नुकसान? EMI का दबाव, चूकने पर पेनल्टी।
- OD चुनें: अगर खर्च अनिश्चित, बार-बार जरूरत या छोटी रकम जैसे बिजनेस कैश क्रंच।
- PL लें: तय राशि, लंबी अवधि घर सुधार या फैमिली इवेंट।
दोनों अनसिक्योर्ड हैं, लेकिन OD सिक्योर्ड वैरिएंट भी मिलते हैं। क्रेडिट स्कोर 750+ रखें, आय प्रमाण दें। बजट बनाएं EMI/OD 50% मासिक आय से ज्यादा न हो। HDFC, SBI जैसे बैंक तुलना करें, प्रोसेसिंग फीस चेक करें। स्मार्ट चॉइस से इमरजेंसी पार्टनर बनेगा, बोझ नहीं।