अगर आप हर महीने 50,000 रुपये से ज्यादा किराया देते हैं, तो आपके लिए इनकम टैक्स से जुड़ा एक जरूरी नियम जानना बेहद जरूरी है। इनकम टैक्स कानून की धारा 194-IB के तहत ऐसे मामलों में किरायेदार को मकान मालिक को किराया देते समय TDS यानी टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स काटना पड़ता है। यह नियम उन लोगों पर लागू होता है जो किसी मकान मालिक को ज्यादा किराया देते हैं।
किस पर लागू होता है यह नियम
यह नियम उन व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) पर लागू होता है जो हर महीने 50,000 रुपये से ज्यादा किराया देते हैं। भले ही यह लिमिट साल में सिर्फ एक महीने के लिए ही पार हो, तब भी TDS काटना जरूरी हो सकता है। हालांकि यह प्रावधान उन लोगों के लिए है जो टैक्स ऑडिट के दायरे में नहीं आते। सरकार ने 2017 में यह नियम इसलिए लागू किया था।
सरकार ने यह नियम क्यों बनाया
सरकार को यह पता चला था कि कई लोग हाउस रेंट अलाउंस (HRA) का फायदा तो लेते हैं, लेकिन कई मकान मालिक अपनी इनकम टैक्स रिटर्न में उस किराये की इनकम नहीं दिखाते। इसी समस्या को रोकने के लिए यह नियम बनाया गया, ताकि किराये से होने वाली इनकम सही तरीके से दर्ज हो सके।
पहले इस नियम के तहत किरायेदार को 5% TDS काटना पड़ता था, अगर मकान मालिक ने अपना PAN नंबर दिया हो। लेकिन बजट 2024 में सरकार ने इस दर को घटाकर 2% कर दिया है। यह नई दर 1 अक्टूबर 2024 से लागू हो चुकी है। अगर मकान मालिक PAN नहीं देता है, तो TDS की दर 20% तक हो सकती है।
कब काटना और जमा करना होगा TDS
TDS आमतौर पर वित्त वर्ष के आखिरी महीने मार्च या किराये के अंतिम महीने में काटा जाता है। अगर कोई किरायेदार मार्च 2026 में TDS काटता है, तो उसे 30 अप्रैल 2026 तक सरकार के पास जमा करना जरूरी है।
किरायेदार को यह टैक्स Form 26QC के जरिए इनकम टैक्स विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर जमा करना होता है। इसके लिए TAN नंबर लेना जरूरी नहीं होता। टैक्स जमा करने के बाद किरायेदार को मकान मालिक को Form 16C देना होता है, जो इस बात का प्रमाण होता है कि TDS काटा जा चुका है।
नियम न मानने पर क्या होगा
अगर किरायेदार TDS नहीं काटता या समय पर जमा नहीं करता, तो उस पर जुर्माना लग सकता है। ऐसे मामलों में हर महीने 1% से 1.5% तक ब्याज देना पड़ सकता है। इसके अलावा 200 रुपये प्रतिदिन की लेट फीस और अधिकतम 1 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। अगर आपका किराया 50,000 रुपये से ज्यादा है, तो इन नियमों को समझकर समय पर TDS जमा करना जरूरी है, ताकि बाद में किसी तरह की परेशानी न हो।