2025 में रुपये-पैसे के मामले में नहीं करें ये 5 गलतियां, नहीं होगी आपको पैसे की कमी

साल 2025 की शुरुआत से पहले अपनी वित्तीय स्थिति पर पुनर्विचार करना जरूरी है। रुपये-पैसे के मामले में छोटी-छोटी गलतियां बड़े नुकसान का सबब बनती हैं। इन गलतियों को समझने और उनसे छुटकारा पाकर आप 2025 में समृद्धि की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं

अपडेटेड Dec 16, 2024 पर 3:08 PM
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कई लोग पर्सनल लोन या दूसरे माध्यम से कर्ज लेकर उसका निवेश स्टॉक मार्केट्स या दूसरे इंस्ट्रूमेंट्स में करते हैं। ऐसा करना ठीक नहीं है।

यह साल विदा हो रहा है। 2025 की शुरुआत होने जा रही है। यह रुपये-पैसे से जुड़ी अपनी आदतों, अपने इनवेस्टमेंट, खर्च और इनकम पर विचार करने का सही वक्त है। रुपये-पैसे के मामले में छोटी-छोटी गलतियां बड़े नुकसान का सबब बनती हैं। इन गलतियों को समझने और उनसे छुटकारा पाकर आप 2025 में समृद्धि की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं। फिर आपको कभी पैसे-रुपये की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

1.इनवेस्टमेंट प्लानिंग को फाइनेंशियल प्लानिंग नहीं समझें

कई लोग इनवेस्टमेंट प्लानिंग (Investment Planning) और फाइनेंशियल प्लानिंग (Financial Planning) को एक जैसा मान लेते हैं। यह गलत है। अगर आपने अपना इनवेस्टमेंट प्लान बनाया है तो इसका मतलब यह नहीं कि आपने फाइनेंशियल प्लानिंग बना लिया है। दरअसल, इनवेस्टमेंट प्लानिंग फाइनेंशियल प्लानिंग का सिर्फ एक हिस्सा है। फाइनेंशियल प्लानिंग में रुपये-पैसे से जुड़ी हर बात शामिल होती है। उदाहरण के लिए इमर्जेंसी फंड, इंश्योरेंस, कैश फ्लो, टैक्स एफिशियंसी और एस्टेट प्लानिंग फाइनेंशियल प्लानिंग के हिस्सा है। उधर, इनवेस्टेंट प्लानिंग में सिर्फ पैसे के निवेश से जुड़ी बातें आती हैं। इसलिए अगर आपने सिर्फ इनवेस्टमेंट प्लानिंग किया है तो आपको 2025 में फाइनेंशियल प्लानिंग पर भी फोकस करना होगा।

2. कर्ज लेकर नहीं करें इनवेस्टमेंट


कई लोग पर्सनल लोन या दूसरे माध्यम से कर्ज लेकर उसका निवेश स्टॉक मार्केट्स या दूसरे इंस्ट्रूमेंट्स में करते हैं। ऐसा करना ठीक नहीं है। इसकी वजह यह है कि पर्सनल लोन सहित हर तरह के लोन पर हमें इंटरेस्ट चुकाना पड़ता है। अगर इस पैसे के निवेश पर मिलने वाला रिटर्न कर्ज के इंटरेस्ट रेट से ज्यादा होगा तभी आपको फायदा होगा। लेकिन, हर इनवेस्टमेंट खासकर स्टॉक्स में निवेश के साथ काफी रिस्क जुड़ा होता है। अगर आपने कर्ज लेकर पैसा शेयरों में लगाया है और शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आई है तो आपको काफी नुकसान हो सकता है।

3. इंश्योरेंस पॉलिसी को इनवेस्टमेंट का माध्यम नहीं समझें

इंश्योरेंस का मकसद आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। लाइफ इंश्योरेंस परिवार को आर्थिक सुरक्षा देता है। अगर परिवार में कमाने वाले व्यक्ति के साथ कोई अनहोनी हो जाती है तो बीमा कंपनी से मिलने वाला पैसा परिवार को आर्थिक सहारा देता है। इसी तरह हेल्थ पॉलिसी इलाज पर आने वाले खर्च की भरपाई करती है। कई लोग लाइफ इंश्योरेंस को निवेश का जरिया समझ लेते हैं। वे कई पॉलिसी में लगातार इनवेस्ट करते रहते हैं। लेकिन, यह समझने की जरूरत है कि इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स का रिटर्न काफी कम होता है। इसलिए वेल्थ क्रिएशन के लिए इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स में निवेश नहीं करें।

4. सभी पैसे सिर्फ एक एसेट में निवेश नहीं करें

कई लोग अपना पूरा इनवेस्टमेंट सिर्फ एक एसेट में करते हैं। यह रिस्की है। एक्सपर्ट्स निवेश में डायवर्सिफिकेशन को बहुत जरूरी मानते हैं। इसका मतलब है कि आपको अपने पैसे का निवेश अलग-अलग एसेट्स में करना चाहिए। आपको कुछ पैसा स्टॉक्स, कुछ पैसा म्यूचुअल फंड्स की इक्विटी स्कीम, कुछ पैसा डेट और कुछ पैसा गोल्ड में लगाना चाहिए। इससे किसी एक एसेट्स में गिरावट आने पर आपके कुल पोर्टफोलियो पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। हर एसेट क्लास में अलग-अलग समय पर तेजी और गिरावट आती है।

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5. इमरजेंसी फंड की अनदेखी नहीं करें

कई लोग इमरजेंसी फंड बनाना जरूरी नहीं समझते। यह बड़ी गलती है। अगर आपने अब तक इमर्जेंसी फंड नहीं बनाया है तो 2025 में इसकी शुरुआत करें। अगर आप शुरुआत में बड़ा इमरजेंसी फंड नहीं बना सकते तो आप शुरुआत छोटे फंड से कर सकते हैं। फिर, इस फंड को धीरे-धीरे बढ़ा सकते हैं। इससे अचानक किसी तरह की प्रॉब्लम आने पर आपको पैसे के लिए दूसरों के आगे हाथ नहीं पसारना होगा या ज्यादा इंटरेस्ट रेट पर पर्सनल लोन लेने को मजबूर नहीं होना पड़ेगा।

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