बैंक पर्सनल लोन देने से पहले ग्राहक की जॉब प्रोफाइल के बारे में पूछते हैं। अगर आपने पर्सनल लोन के लिए अप्लाई किया होगा तो आपने इसे महसूस किया होगा। बैंक या एनबीएफसी लोन का अप्लिकेशन मिलने पर ग्राहक से उसकी नौकरी के बारे में सवाल करते हैं। बैंक यह भी पूछता है कि ग्राहक कंपनी में कितने साल से नौकरी कर रहा है। ग्राहक की सैलरी कितनी है। बैंक सैलरी स्लिप तक मांगता है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
कंपनी के बारे में कई वजहों से जानना चाहते हैं बैंक
बैंक या एनबीएफसी की दिलचस्पी यह जानने में होती है ग्राहक जिस कंपनी में नौकरी कर रहा है, उसकी प्रोफाइल क्या है। यह कंपनी कितनी प्रतिष्ठित है। यह कंपनी कितनी पुरानी और उसका ट्रैक रिकॉर्ड कैसा है। दरअसल, बैंक या एनबीएफसी इसलिए ये बातें जानना चाहते हैं कि ग्राहक की नौकरी कितनी स्टेबल है। आम तौर पर बड़ी कंपनियों में नौकरी सुरक्षित मानी जाती है। इसलिए बैंक और एनबीएफसी कंपनी के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी चाहते हैं।
कंपनी की वित्तीय स्थिति में भी बैंकों की दिलचस्पी
अगर ग्राहक किसी कंपनी में लंबे सालों से काम करता है तो उसकी नौकरी सुरक्षित मानी जाती है। अगर कंपनी की वित्तीय स्थिति ठीक है तो इस बात की ज्यादा संभावना होती है कि वह एंप्लॉयर को समय पर सैलरी देगी। कंपनी सैलरी में हर साल इजाफा भी करेगी। कंपनी यह भी जानना चाहती है कि कंपनी में कुल कितने एंप्लॉयीज हैं। इन जानकारियों के आधार पर कंपनी पर्सनल लोन के अप्लिकेशन पर विचार करती है।
बैंक कंपनियों की प्रोफाइल डेटाबेस में रखते हैं
बैंक और एनबीएफसी आजकल कंपनियों की प्रोफाइल का डेटाबेस भी रखते हैं। लोन का अप्लिकेशन मिलने पर वे अपने डेटाबेस से उस कंपनी के बारे में इंफॉर्मेशन हासिल करती हैं, जिनमें ग्राहक काम करता है। अगर एनबीएफसी या बैंक को ऐसा लगता है कि ग्राहक का सैलरी पैकेज बहुत अच्छा है और उसकी जॉब प्रोफाइल अच्छी है तो वह लोन अप्लिकेशन के बारे में जल्द फैसला लेता है। बैंक या एनबीएफसी ग्राहक को ज्यादा अमाउंट का लोन ऑफर करता है। वह ग्राहक को इंटरेस्ट रेट में भी रियायत देता है। बड़ी कंपनी में काम करने वाले लोगों का लोन इसीलिए जल्द एप्रूव हो जाता है।
यह भी पढ़ें: Post Office सेविंग्स अकाउंट पर मिलती है अतिरिक्त टैक्स छूट, ऐसे उठा सकते हैं फायदा
छोटी कंपनियों के एंप्लॉयीज को लोन मिलने में आती है दिक्कत
बैंक को अगर लगता है कि ग्राहक छोटी कंपनी या ऐसी कंपनी में नौकरी करता है जिसकी ज्यादा पहचान नहीं है तो वह लोन एप्रूव करने में दिलचस्पी नहीं दिखाता है। कई बार ऐसे ग्राहकों को बैंक कम अमाउंट के लोन ऑफर करते हैं। वे लोन पर इंटरेस्ट रेट भी ज्यादा तय करते हैं। इसकी वजह यह है कि उन्हें अपने लोन पर रिस्क दिखता है। इस रिस्क की भरपाई के लिए वे ज्यादा इंटरेस्ट वसूलने की कोशिश करते हैं। चूंकि ग्राहक कई जगह लोन के लिए कोशिश कर चुका होता है तो वह बैंक से ज्यादा इंटरेस्ट पर लोन ले लेता है।