PFRDA ने पेश की एनपीएस स्वास्थ्य योजना, जानिए इस स्कीम की सबसे जरूरी बातें

इस स्कीम के तहत लोग पैसे सेव कर सकते हैं और बाद में उसका इस्तेमाल हॉस्टिपटल और डॉक्टर्स के बिल चुकाने के लिए कर सकते हैं। इस स्कीम का मकसद हेल्थकेयर सपोर्ट को आसान, सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है

अपडेटेड Jan 27, 2026 पर 9:54 PM
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पेंशन रेगुलेटर के सर्कुलर में कहा गया है कि यह स्कीम कंट्रिब्यूटरी पेंशन स्कीम होगी, जो पीएफआरडीए एक्ट के सेक्शन 20 और सेक्शन 12(1)(A) के तहत ऑपरेट करेगी।

एनीपीएस स्वास्थ्य पेंशन स्कीम पीएफआरडीए की पहल है। इस स्कीम के तहत व्यक्ति के मेडिकल एक्सपेंसेज उसकी पेंशन सेविंग्स से कवर होंगे। शुरुआत में इसे एक छोटे पायलट प्रोजेक्ट के जरिए इस स्कीम को टेस्ट किया जा रहा है। यह स्कीम हेल्थ एक्सपेंसेज को नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) से कनेक्ट करती है।

इस स्कीम के तहत लोग पैसे सेव कर सकते हैं और बाद में उसका इस्तेमाल हॉस्टिपटल और डॉक्टर्स के बिल चुकाने के लिए कर सकते हैं। इस स्कीम का मकसद हेल्थकेयर सपोर्ट को आसान, सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है।

पीएफआरडीए ने इस बारे में 27 जनवरी को एक सर्कुलर इश्यू किया। इसमें कहा गया है, "एनपीएस स्वास्थ्य स्कीम को एनपीएस के तहत एक विशिष्ट सेक्टर स्कीम के रूप में पेश किया जाएगा। इसका मकसद आउट-पेशेंट और इन-पेशेंट को मेडिकल एक्सपेंसेज में फाइनेंशियल सपोर्ट देना है। यह मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क (MSF) के तहत ऑपरेट करेगी।"


पेंशन रेगुलेटर के सर्कुलर में कहा गया है कि यह स्कीम कंट्रिब्यूटरी पेंशन स्कीम होगी, जो पीएफआरडीए एक्ट के सेक्शन 20 और सेक्शन 12(1)(A) के तहत ऑपरेट करेगी। इसे वॉलेंटरी बेसिस पर लोगों को ऑफर किया जाएगा। अथॉरिटी के एप्रूवल के बाद यह पेंशन फंड्स (पीएफ) की तरफ से लॉन्च की जाएगी।

पीएफआरडीए ने इस स्कीम के बारे में निम्नलिखित जानकारियां दी है:

1. एलिजिबिलिटी: भारत का कोई नागरिक एनपीएस स्वास्थ्य पेंशन स्कीम में शामिल हो सकता है। अगर पहले से अकाउंट नहीं है तो एनपीएस स्वास्थ्य पेंशन स्कीम के साथ एक कॉमन स्कीम अकाउंट खोलना होगा।

2. चार्जेज: इस स्कीम की फीस और चार्जेज एमएसएफ नियम के तहत आएंगे और उनके बारे में स्पष्ट रूप से बताना होगा। इन चार्जेज में एचबीए को चुकाए जाने वाले चार्ज शामिल होंगे।

3. कंट्रिब्यूशंस: सब्सक्राइबर्स एनपीएस स्वास्थ्य पेंशन स्कीम में कोई अमाउंट कंट्रिब्यूट कर सकेंगे। इसके लिए एनपीएस के तहत नॉन-गवर्नमेंट सेक्टर के लिए मौजूदा गाइडलाइंस लागू होंगे।

4. कॉमन स्कीम अकाउंट से कंट्रिब्यूशंस का ट्रांसफर: सब्सक्राइबर्स (गवर्नमेंट सेक्टर और सरकार की कंपनियों को छोड़कर) जिनकी उम्र 40 से ज्यादा है, उन्हें कॉमन स्कीम अकाउंट से एनपीएस स्वास्थ्य पेंशन स्कीम अकाउंट में अपना खुद का कंट्रिब्यूशन/या एंप्लॉयी का ट्रांसफर करने की इजाजत होगी।

6. मेडिकल एक्सपेंसेज के लिए आंशिक निकासी: सब्सक्राइबर्स को अपनी एनपीएस स्वास्थ्य पेंशन स्कीम अकाउंट से आंशिक निकासी करने की इजाजत होगी। इसका इस्तेमाल आउटपेंशेंट या इनपेंशेंट मेडिकल कॉस्ट को पूरा करने के लिए होगा। किसी वक्त स्कीम में सब्सक्राइबर के अपने कंट्रिब्यूशन का 25 फीसदी तक विड्रॉल किया जा सकता है।

7. क्रिटिकल मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए तय समय से पहले एग्जिट: ऐसे इनपेशेंट मेडिकल ट्रीटमेंट जहां एक सिंगल मामले में एक्सपेंसेज सब्सक्राइबर के एनपीएस स्वास्थ्य पेंशन स्कीम अकाउंट में उपलब्ध फंड का 70 फीसदी से ज्यादा है, सब्सक्राइबर को एकमुश्त 100 फीसदी पैसा तय समय से पहले निकालने की इजाजत होगी।

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8. क्लेम का सेटलमेंट: निकाले गए अमाउंट का पेमेंट सीधे संबंधित HBA/टीपीए को कर दिया जाएगा। यह पेमेंट वैलिड क्लेम और सपोर्टिंग इनवॉयसेज के आधार पर होगा। बाकी सरप्लस को मेडिकल एक्सपेंसेज सेटल करने के बाद सब्सक्राइबर के कॉमन स्कीम अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।

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