लाइफ इंश्योरेंस का मकसद परिवार को लंबे समय तक आर्थिक सुरक्षा देना होता है। लेकिन अगर समय पर प्रीमियम नहीं भरा जाए, तो यह सुरक्षा अचानक खत्म हो सकती है।
लाइफ इंश्योरेंस का मकसद परिवार को लंबे समय तक आर्थिक सुरक्षा देना होता है। लेकिन अगर समय पर प्रीमियम नहीं भरा जाए, तो यह सुरक्षा अचानक खत्म हो सकती है।
अक्सर ऐसा व्यस्त दिनचर्या, पैसों की अस्थायी तंगी, मोबाइल या ईमेल अपडेट न होने, या यह सोच लेने की वजह से होता है कि पॉलिसी अपने आप रिन्यू हो जाएगी। प्रीमियम चूकने की ऐसी गलतियां परिवार को उस वक्त बिना सुरक्षा के छोड़ देती हैं, जब इसकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है।
लैप्स्ड पॉलिसी क्या होती है
जब तय समय के भीतर इंश्योरेंस कंपनी को प्रीमियम नहीं मिलता, तो पॉलिसी लैप्स मानी जाती है। ज्यादातर इंश्योरेंस कंपनियां मंथली प्रीमियम पर 15 दिन का ग्रेस पीरियड, क्वार्टरली, हाफ-ईयरली और सालाना प्रीमियम पर 30 दिन का ग्रेस पीरियड देती हैं। अगर इस अवधि के बाद भी भुगतान नहीं होता, तो पॉलिसी लैप्स हो जाती है और कवरेज पूरी तरह खत्म हो जाता है।
पॉलिसी लैप्स होने का सीधा असर
पॉलिसी लैप्स होते ही उस अवधि में किए गए किसी भी क्लेम को इंश्योरेंस कंपनी खारिज कर देती है। उस समय पॉलिसी के तहत मिलने वाली आर्थिक सुरक्षा मौजूद ही नहीं रहती। पॉलिसी लैप्स होने से उसका लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल फायदा भी कम हो जाता है, जिसकी उम्मीद पॉलिसी लेते वक्त की गई थी। पॉलिसी लैप्स होने का असर इस बात पर निर्भर करता है कि आपने कौन-सी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी ली है।
टर्म इंश्योरेंस में क्या होता है
टर्म इंश्योरेंस में आमतौर पर कोई सरेंडर वैल्यू नहीं होती। अगर यह पॉलिसी लैप्स हो गई, तो पूरा कवर खत्म हो जाता है। कुछ मामलों में, अगर पॉलिसीधारक लैप्स की स्थिति में पॉलिसी बंद करता है, तो बचा हुआ रिस्क प्रीमियम थोड़ा-बहुत वापस मिल सकता है।
ट्रेडिशनल सेविंग्स पॉलिसी में क्या होता है
एंडोमेंट या होल लाइफ पॉलिसी में लैप्स होने का मतलब हमेशा पूरा नुकसान नहीं होता। अगर जरूरी न्यूनतम प्रीमियम पहले ही भर दिए गए हों, तो पॉलिसी रिड्यूस्ड पेड-अप पॉलिसी बन सकती है। इसमें आगे प्रीमियम नहीं देना होता, लेकिन सम एश्योर्ड घट जाता है। बोनस मिलना बंद हो जाता है, फिर भी मौत या मैच्योरिटी पर सीमित रकम मिलती है।
ULIP में क्या होता है?
ULIP पॉलिसी लैप्स होने पर भी उसमें जमा फंड वैल्यू बनी रहती है। हालांकि फंड मैनेजमेंट चार्ज लगातार कटते रहते हैं। इस दौरान न तो नया निवेश किया जा सकता है और न ही टॉप-अप। पैसे निकालने की सुविधा पॉलिसी की शर्तों पर निर्भर करती है।
लैप्स पॉलिसी दोबारा चालू हो सकती है?
हां, ज्यादातर इंश्योरेंस कंपनियां लैप्स हुई पॉलिसी को दोबारा चालू करने का मौका देती हैं। ULIP पॉलिसी के लिए आमतौर पर 3 साल तक, ट्रेडिशनल पॉलिसी के लिए 5 साल तक यह समय पॉलिसी लैप्स होने की तारीख से गिना जाता है।
पॉलिसी रिवाइवल के लिए बकाया प्रीमियम ब्याज के साथ भरना होता है। कई मामलों में नया मेडिकल चेक-अप भी जरूरी हो सकता है। कई बार इंश्योरेंस कंपनियां स्पेशल रिवाइवल स्कीम चलाती हैं, जिसमें लेट फीस या ब्याज में छूट दी जाती है। इससे नई पॉलिसी लेने के मुकाबले पुरानी पॉलिसी को दोबारा चालू करना सस्ता और आसान पड़ता है।
पॉलिसी को एक्टिव रखना क्यों जरूरी है?
लैप्स हुई पॉलिसी आपकी पूरी फाइनेंशियल प्लानिंग बिगाड़ सकती है और परिवार को जोखिम में डाल सकती है। समय पर प्रीमियम भरना, मोबाइल-ईमेल अपडेट रखना और समय-समय पर पॉलिसी की समीक्षा करना बेहद जरूरी है। यही छोटी-छोटी सावधानियां परिवार को लगातार सुरक्षा और मानसिक शांति देती हैं।
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