सरकार ने सोने-चांदी की हॉलमार्किंग के बढ़ाए चार्ज, अब ये होंगे नए चार्ज

अब अपनी सोने और चांदी की ज्वैलरी पर हालमार्क लगवाना महंगा होने वाला है। मोदी सरकार ने सोने और चांदी की ज्वैलरी पर हॉलमार्किंग लगवाना महंगा कर दिया है

अपडेटेड Sep 23, 2022 पर 3:28 PM
मोदी सरकार ने सोने और चांदी की ज्वैलरी पर हॉलमार्किंग लगवाना महंगा कर दिया है।

अब अपनी सोने और चांदी की ज्वैलरी पर हालमार्क लगवाना महंगा होने वाला है। मोदी सरकार ने सोने और चांदी की ज्वैलरी पर हॉलमार्किंग लगवाना महंगा कर दिया है। अब हॉलमार्किंग के लिए प्रति पीस 10 रुपये देने होंगे। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने 4 मार्च 2022 को जारी एक अधिसूचना में सोने की ज्वैलरी और कलाकृतियों के लिए हॉलमार्किंग शुल्क पहले के 35 रुपये से बढ़ाकर 45 रुपये प्रति आइटम कर दिया गया है। इसी तरह, चांदी के आभूषणों और कलाकृतियों के लिए हॉलमार्किंग शुल्क 25 रुपये प्रति आइटम से बढ़ाकर 35 रुपये प्रति आइटम कर दिया गया है।

हॉलमार्किंग के नियम

हालांकि, सोने और चांदी के आभूषणों और कलाकृतियों की हॉलमार्किंग के लिए न्यूनतम कन्साइनमेंट फीस में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। सोने की ज्वैलरी के वजन क आधार पर हॉलमार्किंग की कीमत नहीं बढ़ती है। हॉलमार्किंग की कीमत फ्लैट रहती है। उपभोक्ता मामलों के विभाग के तहत भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने 2018 में हॉलमार्किंग नियमों की शुरुआत की थी। तब से लेकर अब तक पहली बार सोने और चांदी की वस्तुओं के लिए हॉलमार्किंग शुल्क में रिविजन किया गया है। ऐसा रिविजन यानी हालमार्किंग चार्ज की शुरुआत 4 साल के बाद की गई है।


कुंदन पोल्की गोल्ड ज्वैलरी भी होगी हॉलमार्क

सोने के आभूषण खरीदने वाले इस बात का ध्यान रखें कि सोने के आभूषण और आर्टिफैक्ट की हॉलमार्किंग 1 जून 2022 से अनिवार्य कर दी है। सरकार हॉलमार्किंग के दायरे को बढ़ा सकती है। सीएनबीसी-आवाज को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सरकार कुंदन, पोलकी और जड़ाऊ के गहनों की हॉलमार्किंग कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक अगले 1 साल में सरकार कुंदन, पोलकी औऱ जड़ाऊ के गहनों की हॉलमार्किंग को जरुरी कर सकती है।

सरकार जल्द बदलेगी नियम

सरकार HUID (Hallmark Unique Identification) बनाने वाले, होलसेलर, रिटेलर के लिए जरूरी होगी। बता दें कि कुंदन के गहने अभी तक हॉलमार्किंग के दायरे से बाहर हैं। बता दें कि कुंदन, पोलकी, जड़ाऊ के गहने स्पेशल कैटेगरी में आते हैं। पोलकी, जड़ाऊ के गहनों पर भी हॉलमार्किंग जरूरी नहीं होती है लेकिन अब सरकार इन गहनों को हॉलमार्किंग के दायरे में लाने पर विचार कर रही है।

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