प्राइवेट और सरकारी सेक्टर में नौकरी करने वाले नौकरीपेशा लोगों को जल्द ही अपने नौकरी के घंटे, ग्रेच्युटी, पीएफ और वेतन आदि में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। कर्मचारियों की ग्रेच्युटी (Gratuity ) और पीएफ (PF) में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। वहीं, घर आने वाली सैलेरी कम हो सकती है। सरकार के लेबर कोड के नये नियमों से कंपिनयों की बैलेंस शीट भी प्रभावित होगी। इसकी वजह है पिछले साल संसद में पास किए गए तीन मजदूरी संहिता विधेयक के नियम। सरकार नए लेबर कोड में नियमों को इस साल 1 अप्रैल से लागू करना चाहती थी लेकिन राज्यों की तैयारी न होने और कंपनियों को एचआर पॉलिसी बदलने के लिए अधिक समय देने के लिए इन्हें फिलहाल टाल दिया गया। हालांकि, इसके जल्द लागू होने की उम्मीद है।
12 घंटे की हो सकती है नौकरी
नए ड्राफ्ट कानून में नौकरी के अधिकतम घंटों को बढ़ाकर 12 करने का प्रस्ताव पेश किया है। ड्राफ्ट नियमों में 15 से 30 मिनट के बीच के अतिरिक्त कामकाज को भी 30 मिनट गिनकर ओवरटाइम में शामिल करने का प्रावधान है। मौजूदा नियम में 30 मिनट से कम समय को ओवरटाइम नहीं माना जाता है। ड्राफ्ट नियमों में किसी भी कर्मचारी से 5 घंटे से ज्यादा लगातार काम कराने को मनाही है। कर्मचारियों को हर पांच घंटे के बाद आधा घंटे का आराम देने का निर्देश भी नियमों में दिया गया है।
वेतन घटेगा और पीएफ बढ़ेगा
बढ़ जाएगा रिटायरमेंट पर मिलने वाला पैसा
ग्रेच्युटी और पीएफ में योगदान बढ़ने से रिटायरमेंट के बाद मिलने वाला पैसा बढ़ जाएगा। राशि में इजाफा होगा। इससे कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद बेहतर जीवन जीने में आसानी होगी। पीएफ और ग्रेच्युटी बढ़ने से कंपनियों की लागत में भी बढ़ोतरी होगी क्योंकि उन्हें भी कर्मचारियों के लिए पीएफ में ज्यादा योगदान देना होगा। इसका सीधा असर उनकी बैलेंस शीट पर पड़ेगा।
वेज (मजदूरी) की नई परिभाषा के तहत भत्ते कुल सैलेरी के अधिकतम 50 फीसदी होंगे। गौरतलब है कि देश के 73 साल के इतिहास में पहली बार इस प्रकार से श्रम कानून में बदलाव किए जा रहे हैं। सरकार का दावा है कि नियोक्ता और श्रमिक दोनों के लिए फायदेमंद साबित होंगे।