Post Office vs Bank FD: अगर आप बिना किसी बाजार जोखिम के अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखना चाहते हैं और निश्चित रिटर्न पाना चाहते हैं, तो स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स और बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट सबसे पसंदीदा विकल्प माने जाते हैं।
Post Office vs Bank FD: अगर आप बिना किसी बाजार जोखिम के अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखना चाहते हैं और निश्चित रिटर्न पाना चाहते हैं, तो स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स और बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट सबसे पसंदीदा विकल्प माने जाते हैं।
हालांकि, ये दोनों विकल्प दिखने में भले ही एक जैसे लगें, लेकिन ब्याज दरों, सुरक्षा, मैच्योरिटी अवधि और टैक्स नियमों के मामले में इनमें काफी अंतर है। आइए समझते हैं कि आपके वित्तीय लक्ष्यों के हिसाब से कौन-सा विकल्प सबसे बेहतर रहेगा।
ब्याज दरें और विकल्प
पोस्ट ऑफिस और बैंक एफडी दोनों जगह ब्याज दरें और उनके मिलने वाले विकल्प अलग-अलग होते हैं:
पोस्ट ऑफिस स्कीम्स: पोस्ट ऑफिस में अलग-अलग जरूरतों के लिए विशेष योजनाएं हैं। उदाहरण के लिए:
बैंक एफडी (Bank FDs): बैंकों में ब्याज दरें बैंक, कार्यकाल और डिपॉजिटर की कैटेगरी पर निर्भर करती हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के तहत बैंक वरिष्ठ नागरिकों को सामान्य नागरिकों से 0.50% तक अधिक ब्याज प्रदान करते हैं। एफडी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप अपनी सुविधा के अनुसार 7 दिन से लेकर 10 साल तक की अवधि चुन सकते हैं।
सुरक्षा की गारंटी
सुरक्षा के मामले में दोनों ही विकल्प बेहद मजबूत हैं, लेकिन उनके नियम थोड़े अगर हैं:
पोस्ट ऑफिस: पोस्ट ऑफिस की छोटी बचत योजनाओं में लगाया गया पूरा पैसा केंद्र सरकार द्वारा समर्थित होता है, इसलिए इसमें शून्य जोखिम है।
बैंक एफडी: बैंकों में जमा धन DICGC के तहत बीमित होता है। इसके तहत प्रत्येक बैंक में एक जमाकर्ता की ₹5 लाख तक की रकम (मूलधन + ब्याज) पूरी तरह सुरक्षित रहती है। यदि आप एफडी में बड़ा अमाउंट निवेश कर रहे हैं, तो सुरक्षा के लिहाज से अलग-अलग बैंकों में ₹5-5 लाख तक की एफडी कराना ज्यादा समझदारी है।
लिक्विडिटी और समय से पहले निकासी
पैसों की इमरजेंसी में निकासी को लेकर दोनों में बड़ा फर्क है:
बैंक एफडी: बैंक आपको एफडी लैडरिंग करने और जरूरत पड़ने पर पेनल्टी देकर समय से पहले पैसे निकालने की लचीली सुविधा देते हैं। RBI के नियमानुसार बैंकों को निकासी पेनल्टी के नियम स्पष्ट बताने होते हैं।
पोस्ट ऑफिस स्कीम्स: पोस्ट ऑफिस की ज्यादातर योजनाओं में लॉक-इन पीरियड कड़ा होता है। PPF, SCSS और MIS में समय से पहले निकासी की शर्तें थोड़ी जटिल और सख्त होती हैं।
टैक्स और पोस्ट-टैक्स रिटर्न
निवेश चुनते समय सिर्फ विज्ञापनों में दिखने वाले ब्याज दर पर ध्यान न दें, बल्कि टैक्स के बाद मिलने वाले रिटर्न की तुलना करें:
टैक्स फ्री रिटर्न्स: PPF जैसी योजनाओं में मिला ब्याज पूरी तरह टैक्स फ्री होता है और यह EEE (Exempt-Exempt-Exempt) कैटेगरी में आता है।
टैक्स योग्य ब्याज: बैंक एफडी और पोस्ट ऑफिस की अधिकांश योजनाओं (जैसे SCSS, MIS) से होने वाली ब्याज आय आपकी कुल इनकम में जुड़ती है और आपके टैक्स स्लैब के अनुसार उस पर टैक्स लगता है।
आपके लिए कौन-सा विकल्प बेस्ट है?
पोस्ट ऑफिस चुनें अगर: आप सरकारी गारंटी चाहते हैं, लंबी अवधि के लिए एकमुश्त या मासिक आय का निश्चित गोल है, और बार-बार पैसे निकालने की जरूरत नहीं है।
बैंक एफडी चुनें अगर: आपको समय चुनने का लचीलापन चाहिए, इमरजेंसी में पैसे निकालने की सुविधा चाहिए और आप एफडी लैडरिंग के जरिए ज्यादा ब्याज पाना चाहते हैं।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
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