सबसे सस्ता लोन कैसे बन जाता है सबसे महंगा सौदा? PPF लोन की 36 महीने वाली शर्त भूले तो पछताएंगे!
PPF खाते पर लोन 8.1% सालाना ब्याज पर मिलता है, जो 14% तक जाने वाले पर्सनल लोन से सस्ता है। लेकिन इसे 36 महीने के अंदर चुकाना जरूरी है। तय वक्त में लोन पूरा नहीं चुका, तो बची रकम पर ब्याज दर बढ़ाई जा सकती है और सस्ता लोन बहुत महंगा पड़ सकता है।
PPF लोन कम ब्याज की वजह से इमरजेंसी में सबसे सस्ता रास्ता लगता है, लेकिन 36 महीने की एक शर्त पूरा हिसाब पलट सकती है।
PPF खाते पर मिलने वाला लोन कम ब्याज की वजह से अक्सर सबसे सस्ता विकल्प माना जाता है, लेकिन इसके साथ जुड़ी एक शर्त इसे बहुत महंगा भी बना सकती है। यह लोन 36 महीने के अंदर चुकाना होता है। अगर इस मियाद के बाद भी लोन पूरी तरह नहीं चुका, तो बची हुई रकम पर ब्याज दर बढ़ाई जा सकती है। अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में PPF पर 7.1% ब्याज मिल रहा है और इस पर लोन की दर इससे 1% ज्यादा यानी 8.1% सालाना है।
कम ब्याज देखकर लिया फैसला कब उल्टा पड़ता है
कभी अस्पताल का बिल अचानक सामने आ जाता है, तो कभी नौकरी छूटने से घर का बजट डगमगा जाता है। ऐसे वक्त में सबसे पहले नजर उस रास्ते पर जाती है जहां ब्याज सबसे कम हो। PPF लोन इस पैमाने पर खरा उतरता दिखता है।
इसकी ब्याज दर तय है। यह उस ब्याज से सालाना 1% ज्यादा होती है जो आपको अपने PPF खाते पर मिल रहा है। अभी PPF पर 7.1% ब्याज है, तो लोन 8.1% पर पड़ेगा। दूसरी ओर पर्सनल लोन की ब्याज दर आम तौर पर 8-9% से लेकर 14% तक जा सकती है, जो हर बैंक और वित्तीय संस्थान में अलग-अलग हो सकती है।
फर्क को आंकड़ों में देखें। अगर 1 लाख रुपये पर पूरे एक साल ब्याज लगे, तो 8.1% की दर से यह 8,100 रुपये बनता है और 14% की दर से 14,000 रुपये। यानी पहली नजर में 5,900 रुपये की बचत। लेकिन यह बचत तभी हाथ में रहती है, जब लोन वक्त पर लौट जाए।
36 महीने की घड़ी और उसके बाद का खतरा
PPF लोन लेते ही एक उलटी गिनती शुरू हो जाती है। लोन लौटाने के लिए आपके पास 36 महीने होते हैं, यानी तीन साल, या कहें तो तीन दिवाली का वक्त।
असली खतरा इस मियाद के खत्म होने पर शुरू होता है। अगर 36 महीने बीत गए और लोन पूरा नहीं चुका, तो बकाया रकम पर ब्याज दर बढ़ाई जा सकती है। जिस लोन को आपने सिर्फ इसलिए चुना था कि वह सस्ता है, वही देरी की वजह से बहुत महंगा पड़ सकता है।
इसे ऐसे देखिए जैसे किसी सेल में सस्ता सामान खरीदा हो, लेकिन शर्त यह हो कि तय तारीख तक पूरा भुगतान न किया तो दाम बढ़ जाएगा। सस्ते का फायदा तभी है, जब शर्त निभाई जाए। इसलिए PPF लोन में कम ब्याज जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है 36 महीने के अंदर पूरी रकम लौटाने का इंतजाम।
लोन मिलेगा भी या नहीं, और कितना
36 महीने की शर्त निभाने का सवाल तब आता है, जब लोन मिल जाए। PPF पर लोन हर खाते को नहीं मिलता। इसके लिए खाता 3 से 6 साल पुराना होना जरूरी है।
रकम का नियम भी अलग है। लोन की रकम आज के बैलेंस से नहीं, बल्कि आवेदन करने से 2 वित्त वर्ष पहले के बैलेंस से तय होती है। उस बैलेंस का ज्यादा से ज्यादा 25% ही लोन के रूप में मिल सकता है।
मान लीजिए राहुल अक्टूबर 2026 में PPF लोन लेना चाहते हैं। इस वक्त वित्त वर्ष 2026-27 चल रहा है। इससे पिछला वित्त वर्ष 2025-26 था और उससे पिछला यानी दूसरा वित्त वर्ष 2024-25 था। ऐसे में बैंक देखेगा कि 31 मार्च 2025 को राहुल के PPF खाते में कितने रुपये थे। अगर उस दिन खाते में 4,00,000 रुपये थे, तो उन्हें ज्यादा से ज्यादा 1,00,000 रुपये का लोन मिल सकता है।
यानी लोन की रकम पहले से एक दायरे में बंधी है, और उसे लौटाने का वक्त भी। दोनों को साथ रखकर ही तय करना चाहिए कि यह रास्ता आपके लिए सही है या नहीं।
जब 36 महीने में चुकाना मुश्किल लगे
अगर आपको बड़ी रकम चाहिए, या आपका PPF खाता लोन के लिए पात्र नहीं है, तो पर्सनल लोन एक विकल्प हो सकता है। इसका इस्तेमाल मेडिकल खर्च, घर की मरम्मत, शादी या दूसरे जरूरी खर्चों के लिए किया जा सकता है।
पर्सनल लोन में आम तौर पर हर महीने EMI भरनी होती है। बैंक के नियमों और आपकी पात्रता के मुताबिक इसकी अवधि 1 से 7 साल तक हो सकती है। यानी जिस व्यक्ति को लगता है कि 3 साल में पूरी रकम लौटाना भारी पड़ेगा, उसके लिए चुकाने का वक्त यहां ज्यादा लंबा हो सकता है।
लेकिन इसकी कीमत भी है। ब्याज के अलावा प्रोसेसिंग फीस और उस पर लगने वाला टैक्स भी देना पड़ सकता है।
दोनों लोन में कहां छिपा है महंगा पड़ने का खतरा?
महंगा पड़ने का खतरा सिर्फ PPF लोन तक सीमित नहीं है। पर्सनल लोन में ज्यादा रकम मिलने की संभावना हो सकती है, लेकिन ब्याज और दूसरी फीस का खर्च बढ़ सकता है। अगर इसकी EMI वक्त पर नहीं भरी गई, तो अतिरिक्त चार्ज लग सकते हैं और क्रेडिट स्कोर पर भी असर पड़ सकता है।
PPF लोन की सबसे बड़ी ताकत कम ब्याज दर है। इसकी कमजोरी यह है कि रकम और पात्रता दोनों खाते की उम्र और बैलेंस पर टिकी हैं, और ऊपर से 36 महीने की मियाद। यानी दोनों ही लोन में देरी की सजा जेब को भुगतनी पड़ सकती है, फर्क बस इतना है कि किसकी शर्त कहां जाकर चुभती है।
सस्ता या महंगा, फैसला चुकाने की ताकत करेगी
अगर आपको कम रकम चाहिए, आपका PPF खाता लोन के लिए पात्र है और आप 36 महीने में लोन चुका सकते हैं, तो PPF लोन कम खर्च वाला विकल्प हो सकता है। लेकिन ज्यादा रकम की जरूरत हो, तो पर्सनल लोन पर विचार किया जा सकता है।
लोन लेने से पहले ब्याज दर, कुल भुगतान, प्रोसेसिंग फीस और चुकाने की अवधि की तुलना जरूर करें। सिर्फ कम ब्याज देखकर फैसला न लें। यह भी देखें कि आप वक्त पर भुगतान कर पाएंगे या नहीं, क्योंकि कागज पर सबसे सस्ता दिखने वाला लोन भी देरी होते ही सबसे महंगा सौदा बन सकता है।