PPF vs NPS: किसमें निवेश से रिटायरमेंट के लिए ज्यादा बड़ा फंड बनेगा? समझिए पूरा कैलकुलेशन

PPF vs NPS: PPF और NPS दोनों रिटायरमेंट के लिए काम आते हैं, लेकिन दोनों का तरीका अलग है। PPF में सुरक्षा मिलती है, जबकि NPS बाजार से जुड़ा है। 25 साल के निवेश में दोनों के अनुमानित कॉर्पस का अंतर कितना हो सकता है, कैलकुलेशन से समझिए।

अपडेटेड Aug 25, 2026 पर 3:08 PM
  • Follow Us On Google
  • Add as a Preferred Source on Google
NPS में आपका पैसा बाजार से जुड़े विकल्पों में लगाया जाता है।

PPF vs NPS: रिटायरमेंट के लिए पैसा जोड़ना शुरू करते हैं तो दो नाम अक्सर सामने आते हैं। पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS)। दोनों का मकसद एक ही है। बुढ़ापे में पैसे की दिक्कत न हो। लेकिन दोनों का तरीका बिल्कुल अलग है।

PPF में पैसा सुरक्षित तरीके से बढ़ता है। इसमें शेयर बाजार का उतार-चढ़ाव नहीं होता। NPS में आपका पैसा बाजार में लगाया जाता है। इसलिए यहां रिटर्न ज्यादा मिलने की गुंजाइश है। साथ में जोखिम भी है।

अब सवाल है कि PPF और NPS में से रिटायरमेंट के लिए कौन बेहतर है? इसका जवाब आपकी उम्र, कमाई, जोखिम लेने की क्षमता और रिटायरमेंट के लक्ष्य पर निर्भर करता है।


PPF में क्या खास है?

PPF को आसान भाषा में समझें तो यह लंबे समय के लिए बचत का एक सुरक्षित तरीका है। इसमें हर साल पैसा जमा कर सकते हैं। खाते की मूल अवधि 15 साल होती है। इसके बाद इसे 5-5 साल के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है।

मान लीजिए आप हर साल ₹1.5 लाख PPF में डालते हैं। अगर ब्याज दर औसतन 7.1% मान लें, तो 15 साल में आपकी जेब से कुल ₹22.5 लाख जाएंगे। चक्रवृद्धि ब्याज की वजह से रकम करीब ₹40.7 लाख हो सकती है।

यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है। PPF की ब्याज दर सरकार समय-समय पर तय करती है। इसलिए 15-25 साल बाद आपकी वास्तविक रकम अलग हो सकती है।

हर महीने निवेश 25 साल में कुल निवेश
25 साल बाद अनुमानित रकम*
₹2,000 ₹6 लाख ₹16.7 लाख
₹5,000 ₹15 लाख ₹41.8 लाख
₹10,000 ₹30 लाख ₹83.6 लाख
₹12,500 ₹37.50 लाख ₹1.04 करोड़

* यह अनुमान 7.1% सालाना ब्याज और मासिक निवेश मानकर है। PPF की वास्तविक ब्याज दर समय के साथ बदल सकती है। साथ ही, PPF में सालाना अधिकतम निवेश की सीमा ₹1.5 लाख है।

NPS में पैसा कैसे बढ़ता है?

NPS थोड़ा अलग है। इसमें आपका पैसा बाजार से जुड़े विकल्पों में लगाया जाता है। इसमें इक्विटी यानी शेयर बाजार का भी हिसाब होता है। यही वजह है कि लंबे समय में PPF से ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना रहती है। लेकिन यहां रिटर्न पहले से तय नहीं होता।

मान लीजिए आप हर महीने ₹10,000 NPS में डालते हैं। यानी साल में ₹1.20 लाख। अगर औसत रिटर्न 10% सालाना मान लें और आप 25 साल तक पैसा लगाते रहें, तो कुल निवेश ₹30 लाख होगा।

लेकिन चक्रवृद्धि के कारण आपका रिटायरमेंट फंड करीब ₹1.33 करोड़ तक पहुंच सकता है। यही लंबी अवधि के निवेश की ताकत है।

हर महीने निवेश 25 साल में कुल निवेश
25 साल बाद अनुमानित Corpus*
₹2,000 ₹6 लाख ₹26.5 लाख
₹5,000 ₹15 लाख ₹66.4 लाख
₹10,000 ₹30 लाख ₹1.33 करोड़
₹12,500 ₹37.50 लाख ₹1.66 करोड़

* 10% सालाना औसत रिटर्न मानकर अनुमान। NPS का रिटर्न फिक्स नहीं होता। वास्तविक फंड बाजार के प्रदर्शन और आपके एसेट अलोकेशन पर निर्भर करेगा।

अब दोनों को एक ही उदाहरण से समझिए

मान लीजिए आपकी उम्र 35 साल है। आप अगले 25 साल तक सालाना ₹1.5 लाख यानी ₹12,500 प्रति महीना। निवेश करते हैं। अब सिर्फ उदाहरण के लिए PPF का औसत रिटर्न 7.1% और NPS का 10% मान लेते हैं। तस्वीर कुछ ऐसी होगी:

पैमाना PPF NPS
हर साल निवेश ₹1.5 लाख ₹1.5 लाख
निवेश की अवधि 25 साल 25 साल
कुल पैसा लगाया ₹37.5 लाख ₹37.5 लाख
अनुमानित रिटर्न 7.10% 10%
अनुमानित फंड करीब ₹1.01 करोड़ करीब ₹1.48 करोड़
बाजार का जोखिम नहीं हां
रिटर्न ब्याज दर पर निर्भर बाजार पर निर्भर
मुख्य फायदा सुरक्षा बड़ा रिटायरंड फंड बनाने की संभावना

नोट : यह सिर्फ उदाहरण है। असली रिटर्न इससे कम या ज्यादा हो सकता है।

NPS में पेंशन प्लान समझना जरूरी

NPS में सिर्फ यह देखना सही नहीं है कि रिटायरमेंट पर कितना पैसा जमा हो गया। क्योंकि NPS की रकम निकालने के नियम PPF से अलग हैं। पात्रता और लागू नियमों के मुताबिक रिटायरमेंट पर कॉर्पस का एक हिस्सा एकमुश्त लिया जा सकता है। एक हिस्सा एन्युटी (Annuity) यानी पेंशन प्लान खरीदने में लगाया जाता है।

इसी रकम से आपको हर महीने पेंशन जैसी नियमित आय मिलती है। नियमों के मुताबिक कम से कम 40% हिस्से से एन्युटी खरीदना अनिवार्य है। यानी ₹1.48 करोड़ में से करीब ₹59 लाख से आपको मासिक पेंशन लेनी होगी और बाकी का करीब 89 लाख रुपये ही एकमुश्त हाथ लगेगा।

PPF में मामला थोड़ा आसान है

PPF में ऐसी जटिलता कम है। आप पैसा जमा करते हैं। उस पर ब्याज मिलता है। 15 साल की मूल अवधि पूरी होने के बाद नियमों के मुताबिक पैसा निकाल सकते हैं या खाते को आगे बढ़ा सकते हैं।

इसलिए जिसे बाजार का जोखिम पसंद नहीं है, उसके लिए PPF समझने में भी आसान है और चलाने में भी।

टैक्स बेनिफिट किसमें ज्यादा है?

PPF की सबसे बड़ी खासियतों में से एक टैक्स छूट भी है। इसमें निवेश, ब्याज और नियमों के तहत मिलने वाली रकम पर EEE का फायदा मिलता है।

NPS में भी कुछ टैक्स बेनिफिट्स हैं। खासकर नौकरी करने वालों के लिए एंप्लॉयर कंट्रीब्यूशन काफी काम का हो सकता है। इसके अलावा पात्र निवेशकों को सेक्शन 80CCD(1B) के तहत NPS में ₹50,000 तक अतिरिक्त टैक्स डिडक्शन का लाभ मिल सकता है। यह लागू नियमों और टैक्स रिजीम पर निर्भर करता है।

तो PPF लें या NPS?

अगर आपको ज्यादा जोखिम लेना नहीं पसंद, तो PPF आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है। लेकिन, अगर आप कहते हैं, 'मेरी रिटायरमेंट अभी 20-30 साल दूर है। मैं बाजार का थोड़ा जोखिम ले सकता हूं।' तब NPS पर विचार किया जा सकता है।

लेकिन असली समझदारी दोनों को आमने-सामने खड़ा करने में नहीं है। आप दोनों में पैसा लगा सकते हैं। मान लीजिए कोई व्यक्ति हर साल ₹1.5 लाख PPF में डालता है। साथ में हर महीने ₹10,000 NPS में लगाता है। अब उसके पास दो तरह की तैयारी हो रही है। PPF से सुरक्षित बचत बन रही है। NPS से बड़ा रिटायरमेंट कॉर्पस बनाने की कोशिश हो रही है।

Sukanya Samriddhi Calculator: सुकन्या समृद्धि स्कीम पर सबसे ज्यादा इंट्रेस्ट, इससे बेटी के लिए मैक्सिमम कितना फंड बनाया जा सकता है, देखें पूरा कैलकुलेशन

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।