DDA Redevelopment News: दिल्ली में 50 साल पुराने डीडीए मकानों का होगा रीडेवलपमेंट, जानिए क्या है पूरी तैयारी

DDA Redevelopment News: दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने मास्टर प्लान दिल्ली-1962 (MPD-1962) के तहत बनाए गए 50 साल से अधिक पुराने दो-मंजिला मकानों के पुनर्निर्माण और रीडेवलपमेंट के लिए यूनिफॉर्म पॉलिसी को मंजूरी दे दी है। अब मकान मालिकों के लिए घर तोड़कर दोबारा बनाने का रास्ता साफ हो गया है

अपडेटेड Aug 13, 2026 पर 10:37 AM
DDA Redevelopment News: दिल्ली में 50 साल पुराने DDA के दो मंजिला मकानों के पुनर्विकास को मंजूरी मिल गई है

DDA Redevelopment News: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दशकों पुराने DDA के दो मंजिला मकानों में रहने वाले लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने ऐसे पुराने मकानों के पुनर्विकास यानी रीडेवलपमेंट के लिए एक समान नीति को मंजूरी दे दी है। इसके बाद मकान मालिक अपने पुराने और जर्जर हो चुके घर को तोड़कर मौजूदा नियमों के तहत दोबारा निर्माण करा सकेंगे। यह फैसला खास तौर पर उन DDA आवासीय योजनाओं के लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां मकान 50 साल या उससे भी अधिक पुराने हो चुके हैं।

नरैना विहार इसका प्रमुख उदाहरण है, जहां कई मकान पांच दशक से ज्यादा पुराने बताए गए हैं। अब तक खाली आवासीय प्लॉटों के पुनर्विकास के लिए स्पष्ट नियम मौजूद थे। लेकिन उन्हीं प्लॉटों पर बने पुराने DDA के दो मंजिला मकानों को दोबारा बनाने के लिए पूरे दिल्ली में एक समान व्यवस्था नहीं थी। DDA की नई नीति इसी अंतर को खत्म करने की कोशिश है।

पुराने DDA मकानों को मिलेगा पुनर्विकास का अधिकार


DDA के बुधवार को लिए गए फैसले के तहत पात्र निर्मित दो मंजिला आवासीय इकाइयों को खाली आवासीय प्लॉटों के समान रीडेवलपमेंट अधिकार दिए जाएंगे। इसका सीधा मतलब यह है कि जिन पुराने DDA मकानों की संरचना अब कमजोर हो चुकी है, उनके मालिक नियमानुसार पुराने निर्माण को हटाकर नया निर्माण करा सकेंगे। DDA ने माना है कि 1962 के मास्टर प्लान के तहत विकसित की गई कई आवासीय योजनाओं में बने मकान अब पांच दशक से अधिक पुराने हो चुके हैं। इनमें से कई की संरचनात्मक स्थिति भी खराब हो गई है। हालांकि, यह फैसला मालिकों को मनमाने ढंग से निर्माण करने की अनुमति नहीं देता।

इन नियमों का पालन जरूरी

नई नीति के तहत पुनर्निर्माण की अनुमति होगी। लेकिन निर्माण दिल्ली में लागू मौजूदा भवन और प्लानिंग नियमों के मुताबिक ही करना होगा। यानी DDA की मंजूरी के बाद पुराने मकान को गिराकर नया घर बनाने का रास्ता आसान जरूर होगा, लेकिन प्लॉट पर कितने क्षेत्र में और कितनी ऊंचाई तक निर्माण किया जा सकेगा। यह संबंधित प्लॉट के आकार और उस पर लागू मास्टर प्लान के प्रावधानों पर निर्भर करेगा।

दिल्ली की दूसरी कॉलोनियों को भी फायदा

DDA की यह नीति केवल नरैना विहार तक सीमित नहीं रहेगी। दिल्ली में ऐसी दूसरी DDA आवासीय योजनाएं भी इसके दायरे में आएंगी, जहां आवासीय प्लॉटों पर पुराने दो मंजिला DDA मकान बने हुए हैं। वे नीति में निर्धारित कैटेगरी में आते हैं।

यहां यह समझना जरूरी है कि नई नीति को दिल्ली के हर DDA फ्लैट या हर हाउसिंग सोसाइटी पर लागू होने वाली सामान्य पुनर्विकास अनुमति नहीं माना जा सकता। इसका दायरा विशेष रूप से पुराने DDA द्वारा निर्मित दो मंजिला मकानों और व्यक्तिगत आवासीय प्लॉटों की उस कैटेगरी तक है, जिसे नई नीति में शामिल किया गया है।

लंबे समय से उठ रही थी मांग

DDA ने कहा है कि यह फैसला पुराने मकानों में रहने वाले लोगों और जनप्रतिनिधियों की लंबे समय से चली आ रही मांग को संबोधित करता है। समस्या यह थी कि खाली आवासीय प्लॉट के लिए मौजूदा प्लानिंग नियमों के तहत पुनर्विकास संभव था। लेकिन उसी तरह के प्लॉट पर पहले से बने पुराने दो मंजिला DDA मकानों के पुनर्निर्माण के लिए कोई समान नीति नहीं थी। नई व्यवस्था से इस असमानता को दूर करने की कोशिश की गई है।

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DDA का कहना है कि इससे बिल्डिंग प्लान की मंजूरी की प्रक्रिया तेज होगी और अनुपालन का बोझ कम होगा। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि किसी परियोजना पर लागू दूसरे वैधानिक दायित्व खत्म हो जाएंगे। संबंधित परियोजना के लिए जरूरी अन्य कानूनी और सुरक्षा मंजूरियां लागू नियमों के अनुसार लेनी होंगी।

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