Noida Authority की सीईओ ने कहा, ट्विन टावर गिराना यह मैसेज है कि आप गलत करेंगे तो आपको अंजाम भुगतना पड़ेगा

नोएडा अथॉरिटी के सीईओ ने कहा कि हमने नई गाइडलाइंस बनाई है। इसके तहत अगर अलॉट किए गए लैंड पर पांच साल में कोई डेवलपमेंट नहीं होता है तो फिर जमीन वापस करनी होगी

अपडेटेड Sep 16, 2022 पर 1:27 PM
ऋतु माहेश्वरी ने बताया कि डेटा सेंटर के लिए भी लैंड की डिमांड है। अब तक तीन डेटा सेंटर को मंजूरी मिल चुकी है। इनमें दो अडानी ग्रुप के हैं। एक WebWerks का है।

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के आदेश पर पिछले महीने नोएडा में ट्विन टावर (Twin Tower) गिरा दिए गए। यह रियल एस्टेट डेवलपर्स के लिए कड़ा मैसेज था कि नियमों का पालन नहीं करने पर उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। यह कहना है नोएडा अथॉरिटी की सीईओ ऋतु माहेश्वरी (Ritu Maheshwari) का। उन्होंने रियल एस्टेट से जुड़े कई मसलों पर मनीकंट्रोल की वंदना रमानी से चर्चा की। उन्होंने यह भी बताया कि अथॉरिटी किस तरह रियल एस्टेट सेक्टर की खामियां दूर करने की कोशिश कर रही है।

माहेश्वरी ने बताया कि रियल एस्टेट सेक्टर की स्थितियां बेहतर बनाने के लिए कोशिश हो रही है। इसके लिए कई तरह के कदम उठाए गए हैं। मैप, कंपलिशन, म्यूटेशन, ट्रांसफर सहित कई तरह के एप्रूवल अब पूरी तरह ऑनलाइन कर दिए गए हैं। सभी अलॉटमेंट अब ऑक्शन के जरिए हो रहे हैं। पहले इसके लिए ड्रॉ होता था। पेमेंट के नियमों को भी सख्त बनाया गया है। उसी व्यक्ति को जमीन का आवंटन किया जा रहा है, जिसे इसकी जरूरत है।

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उन्होंने कहा कि हम प्रोजेक्ट पूरा होने से पहले सब-डिविजन की इजाजत नहीं दे रहे हैं। बिल्डर्स या मुख्य कंसोर्शियम मेंबर्स तब तक प्रोजेक्ट से एग्जिट नहीं कर सकते जब तक वह पूरा नहीं हो जाता। इंडस्ट्रियल, इंस्टीट्यूशनल और रेजिडेंशियल लैंड्स के लिए पेमेंट पीरियड को घटाकर एक या दो साल कर दिया गया है। पहले यह पांच से छह साल था। हमने मॉर्टगेज के नियमों को भी आसान किया है। अगर कोई बिल्डर लोन के लिए अप्लाई करता है तो उसे आसानी से मिलेगा।

नोएडा अथॉरिटी के सीईओ ने कहा कि हमने नई गाइडलाइंस बनाई है। इसके तहत अगर अलॉट किए गए लैंड पर पांच साल में कोई डेवलपमेंट नहीं होता है तो फिर जमीन वापस करनी होगी। हम स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि अगर किसी मकसद खासकर आईटी/आईटीईएस के लिए जमीन अलॉट की जाती है तो उसे वैंकेट नहीं रखा जा सकता। हम पब्लिक एसेट्स का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करना चाहते हैं। सटोरियाई गतिविधियों के खिलाफ कदम उठाए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि नियमों का पालन नहीं करने पर 100 से ज्यादा आवंटन कैंसिल किए जा चुके हैं। इनमें रेजिडेंशियल, इंडस्ट्रियल, इंस्टीट्यूशनल और कमर्शियल प्रोजेक्ट शामिल हैं। इस कैंसिलेशन के बाद हमने 300 से 400 एकड़ लैंड पार्सल बनाया है। अब हमारे पास सभी सेगमेंट में कुल लैंड बैंक करीब 900 एकड़ हो गया है। इनमें से 250 एकड़ को हम कमर्शियल, रेजिडेंशियल और इंडस्ट्रियल स्कीम के जरिए ऑफर कर रहे हैं।

माहेश्वरी ने बताया कि डेटा सेंटर के लिए भी लैंड की डिमांड है। अब तक तीन डेटा सेंटर को मंजूरी मिल चुकी है। इनमें दो अडानी ग्रुप के हैं। एक WebWerks का है। कई बड़ी कंपनियां नोएडा में इनवेस्ट करना चाहती हैं। आइकिया यहां आ चुकी है। लुलु ग्रुप भी इनवेस्ट करना चाहता है। लेकिन उसने अभी जमीन नहीं खरीदी है। अडानी ग्रुप दो लैंड पार्सल खरीद चुका है। वह और खरीद रहा है। माइक्रोसॉफ्ट ने भी खरीदा है। आदित्य बिड़ला ग्रुप भी यहां आना चाहता है। गोदरेज और टाटा ग्रुप पहले ही आ चुके हैं।

ट्विन टावर के डेमोलिशन के बारे में उन्होंने कहा कि यह राज्य सरकार का बड़ा फैसला था। इसे लेकर हमारी सोच स्पष्ट थी। ऐसा नहीं होता तो हमने अपील की होती या रिव्यू किया होता या कुछ दूसरे कानूनी रास्ते अपनाए होते। सरकार ने नियमों के उल्लंघन पर तेजी से कार्रवाई की। दोषी अफसरों के खिलाई एफआई दर्ज कराई गई। एक उच्च स्तरीय समिति बनाई गई। आखिर में यह फैसला लिया गया कि इमारतें गिरा दी जाएंगी। यह डेमोलिशन यह मैसेज देता है कि अगर आप गलती करते हैं तो आपको इसका खामियाजा भुगतना होगा।

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