RBI Polymer Currency Notes Launch: भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने देश में नए तरह के करेंसी नोटों की एंट्री को लेकर बेहद महत्वपूर्ण जानकारी दी है। केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए गवर्नर ने बताया कि रिजर्व बैंक अगले वित्त वर्ष (FY28) की शुरुआत में देश में लंबे समय तक चलने वाले पॉलीमर करेंसी नोट पेश करने की योजना पर काम कर रहा है।
कब तक आ जाएंगे जेब में पॉलीमर वाले प्लास्टिक नोट?
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान करेंसी नोटों की लाइफ बढ़ाने को लेकर चल रही आरबीआई की योजनाओं पर बात की। गवर्नर ने कहा कि अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो अगले वित्त वर्ष (FY28) की शुरुआत यानी अप्रैल 2027 तक पॉलीमर नोट चलन में आ जाएंगे।
इस तरह के प्लास्टिक/पॉलीमर नोटों का इस्तेमाल विशेष रूप से कम मूल्य वाले नोटों के लिए किया जाएगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि छोटे नोटों का लेन-देन और रोटेशन बहुत तेजी से होता है, जिससे कागज के नोट जल्द फट या गल जाते हैं।
क्यों खास होते हैं प्लास्टिक नोट?
कागज के नोटों के मुकाबले पॉलीमर यानी प्लास्टिक से बने नोटों की लाइफ और मजबूती काफी ज्यादा होती है:
30 साल से अधिक टिकाऊ: गवर्नर ने बताया कि दुनिया के कई अन्य देशों में पॉलीमर करेंसी नोट पिछले 30 से भी अधिक सालों से सफलतापूर्वक इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
पानी और गंदगी से बचाव: पॉलीमर नोट पानी में भीगने से खराब नहीं होते, आसानी से फटते नहीं हैं और गंदगी या पसीने से जल्दी गंदे नहीं होते। इससे नोट बदलने का आरबीआई का सालाना खर्च भी कम होगा।
ब्याज दरों और महंगाई पर गवर्नर का बड़ा बयान
करेंसी के अलावा गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आरबीआई के आगामी फैसलों और अर्थव्यवस्था के अन्य अहम पहलुओं पर भी बात की। गवर्नर ने साफ किया कि ब्याज दरों और नीतिगत रुख में आगे कोई भी बदलाव पूरी तरह से आर्थिक आंकड़ों पर आधारित होगा। केंद्रीय बैंक की सबसे प्राथमिकता मध्यम अवधि में हेडलाइन महंगाई को अपने 4 प्रतिशत के लक्षित स्तर पर लाना है।
रुपे की स्थिति और FCNR(B) स्कीम पर क्या बोले गवर्नर?
विदेशी फंड्स का प्रवाह बढ़ने के बावजूद रुपये की गति पर पूछे गए सवाल पर गवर्नर ने कहा कि यदि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होते हैं, तो रुपये में और मजबूती देखी जा सकती है। आरबीआई का प्रयास रुपये की चाल को संतुलित बनाए रखना है।
विदेशी मुद्रा गैर-निवासी (बैंक) यानी FCNR(B) योजना में विदेशी फंड्स का आना काफी मजबूत बना हुआ है। गवर्नर ने स्पष्ट किया कि समय से पहले इस योजना को बंद करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है।