RBI Policy Impact on Bond Market: भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने अपनी समीक्षा बैठक में रेपो रेट को 5.25% पर यथावत रखने का निर्णय लिया है। केंद्रीय बैंक के इस फैसले से फिक्स्ड इनकम और बॉन्ड निवेशकों के लिए स्थिति काफी साफ हो गई है।
RBI Policy Impact on Bond Market: भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने अपनी समीक्षा बैठक में रेपो रेट को 5.25% पर यथावत रखने का निर्णय लिया है। केंद्रीय बैंक के इस फैसले से फिक्स्ड इनकम और बॉन्ड निवेशकों के लिए स्थिति काफी साफ हो गई है।
एडलवाइस म्यूचुअल फंड की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, रिजर्व बैंक के इस तटस्थ रुख से निकट भविष्य में ब्याज दरें बढ़ने का जोखिम कम हो गया है, जबकि भारत की आर्थिक वृद्धि पर भरोसा मजबूत हुआ है। ऐसे माहौल में म्यूचुअल फंड मैनेजर्स निवेशकों को आक्रामक 'ड्यूरेशन बेट्स' लेने के बजाय हाई-क्वालिटी एक्रूअल स्ट्रेटेजी पर फोकस करने की सलाह दे रहे हैं।
रिजर्व बैंक का टोन बॉन्ड निवेशकों के लिए राहत भरा
एडलवाइस म्यूचुअल फंड के प्रेसिडेंट और फिक्स्ड इनकम सीआईओ धवल दलाल ने कहा, 'आरबीआई का टोन उम्मीद से ज्यादा राहत देने वाला रहा। मुख्य संदेश साफ है कि रिजर्व बैंक भले ही महंगाई पर नजर बनाए हुए है, लेकिन जब तक कीमतों का दबाव बहुत व्यापक नहीं होता, तब तक दरों में तुरंत बढ़ोतरी की कोई संभावना नहीं है।'
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई (CPI) का अनुमान 5.1% से घटाकर 5.0% कर दिया है। वहीं, जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.6% से बढ़ाकर 6.7% कर दिया है। बेहतर ग्रोथ और कम महंगाई के इस कॉम्बिनेशन से आरबीआई को दरों में जल्दबाजी न करने और स्थिति पर नजर बनाए रखने की सहूलियत मिली है।
शॉर्ट से मीडियम टर्म यील्ड कर्व को मिलेगा सहारा
रिपोर्ट के अनुसार, खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों में अस्थायी तेजी के बावजूद बुनियादी महंगाई नियंत्रण में है। रेपो रेट में बदलाव न होने से शॉर्ट-टू-मीडियम टर्म यील्ड कर्व को मजबूती मिलेगी। हालांकि, निवेशकों को अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताओं, कच्चे तेल की कीमतों, अल-नीनो के असर, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और करेंसी की उतार-चढ़ाव जैसे बाहरी जोखिमों से भी सावधान रहने की जरूरत है।
फिक्स्ड इनकम इन्वेस्टर्स को अब कहां पैसा लगाना चाहिए?
एडलवाइस म्यूचुअल फंड ने निवेशकों के लिए तीन मुख्य रणनीतियों का सुझाव दिया है:
2 से 3 साल वाले AAA-रेटेड बॉन्ड्स: इस कैटेगरी के हाई-क्वालिटी बॉन्ड्स में निवेशकों को अच्छा रिटर्न, मजबूत क्रेडिट क्वालिटी और कम ब्याज दर जोखिम का फायदा मिलता है।
शॉर्ट-टर्म एक्टिवली मैनेज्ड बॉन्ड फंड्स: जिन निवेशकों का नजरिया कम से कम 6 महीने का है, वे 3 साल तक की एवरेज मैच्योरिटी वाले एक्टिवली मैनेज्ड बॉन्ड फंड्स चुन सकते हैं।
टारगेट मैच्योरिटी फंड्स: लंबी अवधि के निवेशकों के लिए 5 साल में मैच्योर होने वाले पीएसयू और AAA-रेटेड सरकारी बॉन्ड्स में निवेश करने वाले टारगेट मैच्योरिटी फंड्स बेहतर विकल्प हो सकते हैं।
एक्सपर्ट की खास सलाह
फिक्स्ड इनकम निवेशकों के लिए आरबीआई का यह 'डोविश पॉज' निवेश के लिहाज से पॉजिटिव माहौल तैयार करता है। ग्रोथ मजबूत है और महंगाई काबू में है। इसलिए, ड्यूरेशन का रिस्क लेने के बजाय 2 से 3 साल के सेगमेंट में हाई-क्वालिटी एक्रूअल स्ट्रेटेजी अपनाकर स्थिर रिटर्न पाने का यह बेहतरीन समय है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
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