₹10 and ₹20 Polymer Banknotes Trial: केंद्र सरकार ने 27 जुलाई 2026 को संसद में जानकारी दी कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के ₹10 और ₹20 मूल्यवर्ग के पॉलीमर बैंक नोटों के फील्ड ट्रायल के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। वित्त मंत्रालय ने संसद में पूछे गए एक सवाल के जवाब में बताया कि आरबीआई का उद्देश्य कागज के नोटों के मुकाबले ज्यादा टिकाऊ पॉलीमर नोटों की उपयोगिता और जीवनकाल को परखना है।
100-100 करोड़ पीस पॉलीमर नोटों का होगा परीक्षण
वित्त मंत्रालय के अनुसार, आरबीआई ने अपने केंद्रीय बोर्ड की सिफारिश के बाद ₹10 और ₹20 के 1-1 अरब पीस पॉलीमर नोट जारी कर ट्रायल करने का प्रस्ताव रखा था।अगर यह फील्ड ट्रायल सफल रहता है, तो इसके बाद इन दोनों मूल्यवर्गों में पॉलीमर बैंक नोटों का नियमित रूप से जारी किया जाना शुरू कर दिया जाएगा। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि पॉलीमर नोटों की शुरुआत अभी शुरुआती चरण में है।
क्यों पड़े पॉलीमर नोटों की जरूरत?
कागज के नोटों की तुलना में पॉलीमर नोटों के कई फायदे होते हैं। अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों के अनुसार, पॉलीमर यानी प्लास्टिक से बने नोट कागज वाले नोटों की तुलना में काफी लंबे समय तक चलते हैं। ये नोट पानी से खराब नहीं होते, आसानी से फटते नहीं हैं और पसीने या गंदगी से जल्दी मैले नहीं होते। ₹10 और ₹20 जैसे छोटे नोटों का इस्तेमाल बहुत ज्यादा होता है, इसलिए कागज के नोट जल्दी खराब हो जाते हैं।
क्या बंद हो जाएंगे पुराने कागज वाले नोट?
सरकार ने इस बात पर पूरी स्थिति साफ कर दी है। आरबीआई इन नए पॉलीमर नोटों को मौजूदा कागज के नोटों के साथ ही सर्कुलेशन में लाएगा। कागज की करेंसी को पूरी तरह बंद करने या उसे पॉलीमर नोटों से बदलने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है।
डिजिटल पेमेंट पर क्या पड़ेगा असर?
यह पूछे जाने पर कि क्या प्लास्टिक नोट आने से यूपीआई और डिजिटल भुगतानों पर असर पड़ेगा, वित्त मंत्रालय ने कहा, इसका कोई प्रभाव पड़ेगा या नहीं, इसका सही आकलन पॉलीमर नोटों के नियमित रूप से जारी होने के बाद ही किया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि कागजी/पॉलीमर बैंक नोट और डिजिटल पेमेंट सिस्टम एक-दूसरे के पूरक हैं और जनता की सुविधा के लिए दोनों विकल्प मौजूद रहेंगे।